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	<title>Interview &#8211; Uljhan Suljhan</title>
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	<title>Interview &#8211; Uljhan Suljhan</title>
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		<title>सूर्य</title>
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		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 11:28:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
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					<description><![CDATA[सूर्य सूर्य केवल एक खगोलीय पिंड या अग्नि का गोला नहीं है, बल्कि वह मानव चेतना, आध्यात्मिकता और जीवन-शक्ति का केंद्रीय स्रोत है। प्राचीन काल से ही विश्व की अनेक&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>सूर्य</h2>
<p>सूर्य केवल एक खगोलीय पिंड या अग्नि का गोला नहीं है, बल्कि वह मानव चेतना, आध्यात्मिकता और जीवन-शक्ति का केंद्रीय स्रोत है। प्राचीन काल से ही विश्व की अनेक सभ्यताओं में सूर्य को ‘ईश्वर’ रूप में पूजा गया है। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में सूर्य का स्थान सर्वोपरि और आधारभूत माना गया है।</p>
<p>सूर्य के आध्यात्मिक महत्त्व के प्रमुख आयाम इस प्रकार हैं—</p>
<h3>आत्मा का प्रतीक</h3>
<p>(The Soul of the Universe)</p>
<p>वेदों में कहा गया है— “सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च”, अर्थात् सूर्य समस्त चराचर जगत की आत्मा है। जैसे शरीर आत्मा के बिना निष्प्राण है, वैसे ही सूर्य के बिना ब्रह्मांड की कल्पना अधूरी है। आध्यात्मिक दृष्टि से सूर्य हमारी अंतरात्मा का प्रतीक है—वह प्रकाश जो भीतर के अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करता है।</p>
<h3>ऊर्जा और जीवन-शक्ति का स्रोत</h3>
<p>(Source of Prāṇa)</p>
<p>सूर्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा का मूल स्त्रोत है। योग विज्ञान में उसे ‘प्राणदाता’ माना गया है। शरीर की पिंगला नाड़ी, जिसे सूर्य नाड़ी भी कहा जाता है, हमारे भीतर साहस, सक्रियता और जीवन-शक्ति का संचार करती है। सूर्य किरणें न केवल विटामिन-डी प्रदान करती हैं, बल्कि सूक्ष्म स्तर पर हमारी आभा को भी शुद्ध और संतुलित करती हैं।</p>
<h3><strong>ज्ञान और प्रबुद्धता का प्रतीक </strong></h3>
<p>(Symbol of Wisdom)</p>
<p>सूर्य अज्ञान के अंधकार को नष्ट करने वाला ज्ञान है। गायत्री मंत्र सूर्यस्वरूप सविता देव को समर्पित है, जिसमें प्रार्थना की जाती है— *“धियो यो नः प्रचोदयात्”*—हे प्रभु, हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। सूर्य यह सिखाता है कि सत्य स्वयं प्रकाशमान होता है; उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।</p>
<h3>निस्वार्थ सेवा और अनुशासन</h3>
<p>सूर्य का आध्यात्मिक संदेश धर्म और कर्तव्य पर आधारित है। वह बिना किसी भेदभाव के राजा-रंक, पुष्प-कांटे सभी को समान प्रकाश देता है। उसकी निरंतरता और अनुशासन हमें यह सिखाते हैं कि बिना फल की चिंता किए अपने कर्म करते रहना ही जीवन का वास्तविक धर्म है।</p>
<h3>यौगिक महत्त्व &#8211; सूर्य नमस्कार</h3>
<p>हठयोग में सूर्य नमस्कार केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि सूर्य के प्रति कृतज्ञता की एक गहन आध्यात्मिक साधना है। इसके बारह चरण साधक को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ते हैं, जिससे शरीर, मन और आत्मा का सामंजस्य स्थापित होता है।</p>
<p>आध्यात्मिक रूप से सूर्य बाहरी प्रकाश से अधिक हमारे भीतर के प्रकाश का मार्गदर्शक है। वह *“तमसो मा ज्योतिर्गमय”* का सजीव स्वरूप है—अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला शाश्वत गुरु। सूर्य की उपासना वस्तुतः अपने भीतर की दिव्यता, संकल्प-शक्ति और चेतना को जागृत करने की साधना है।</p>
<p>रचनाकार</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-8628" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260117-WA0004-257x300.jpg" alt="" width="257" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260117-WA0004-257x300.jpg 257w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260117-WA0004-879x1024.jpg 879w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260117-WA0004-768x895.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260117-WA0004.jpg 985w" sizes="(max-width: 257px) 100vw, 257px" /></p>
<p>डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’<br />
अहमदाबाद (गुजरात)</p>
<p>पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति</p>
<figure id="attachment_7957" aria-describedby="caption-attachment-7957" style="width: 298px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-7957" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-01-07-35-45-112_com.canva_.editor-edit-298x300.jpg" alt="" width="298" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-01-07-35-45-112_com.canva_.editor-edit-298x300.jpg 298w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-01-07-35-45-112_com.canva_.editor-edit-150x150.jpg 150w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-01-07-35-45-112_com.canva_.editor-edit-768x774.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-01-07-35-45-112_com.canva_.editor-edit.jpg 989w" sizes="(max-width: 298px) 100vw, 298px" /><figcaption id="caption-attachment-7957" class="wp-caption-text">कल्पनाकार है शब्दशिल्प</figcaption></figure>
<figure id="attachment_7943" aria-describedby="caption-attachment-7943" style="width: 293px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-7943" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-14-11-19-27-067_com.google.android.googlequicksearchbox-edit-293x300.jpg" alt="" width="293" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-14-11-19-27-067_com.google.android.googlequicksearchbox-edit-293x300.jpg 293w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-14-11-19-27-067_com.google.android.googlequicksearchbox-edit-1001x1024.jpg 1001w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-14-11-19-27-067_com.google.android.googlequicksearchbox-edit-768x786.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot_2025-12-14-11-19-27-067_com.google.android.googlequicksearchbox-edit.jpg 1080w" sizes="(max-width: 293px) 100vw, 293px" /><figcaption id="caption-attachment-7943" class="wp-caption-text">चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)</figcaption></figure>
<figure id="attachment_7850" aria-describedby="caption-attachment-7850" style="width: 300px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-7850" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/2025-05-09_18-51-092-300x230.jpg" alt="" width="300" height="230" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/2025-05-09_18-51-092-300x230.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/2025-05-09_18-51-092-768x590.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/12/2025-05-09_18-51-092.jpg 850w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-7850" class="wp-caption-text">प्रस्तुतकर्ता</figcaption></figure>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>साक्षात्कार</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/interview/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 03:28:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
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					<description><![CDATA[🌸 रश्मि आनंद वर्मा जी 🌸 परिचय मेरा नाम रश्मि आनंद वर्मा है। मैं वर्तमान में अजमेर स्थित एक प्रतिष्ठित डिफेंस अकादमी में सेंटर मैनेजर के रूप में कार्यरत हूँ।&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>🌸 रश्मि आनंद वर्मा जी 🌸</h2>
<h3>परिचय</h3>
<p>मेरा नाम रश्मि आनंद वर्मा है। मैं वर्तमान में अजमेर स्थित एक प्रतिष्ठित डिफेंस अकादमी में सेंटर मैनेजर के रूप में कार्यरत हूँ। मैंने एमबीए (CRM – कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट) में किया है, जिसने मुझे न केवल व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाया, बल्कि मानवीय संबंधों को बेहतर ढंग से समझने में भी सहायता दी।</p>
<p>मेरे अंदर एक रचनात्मक आत्मा बसी है। मैं कहानियाँ और कविताएँ लिखती हूँ, जो मेरे मन के भावों और अनुभवों का प्रतिबिंब होती हैं। इसके अलावा मैं एक अच्छी गायिका भी हूँ। संगीत मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जो मुझे सुकून देता है।</p>
<p>मेरी सबसे बड़ी ताकत है – संवेदनशीलता और दूसरों की बातें ध्यानपूर्वक सुनना। मैं ऐसे लोगों की मदद करना चाहती हूँ जो मानसिक रूप से कठिन परिस्थितियों में फँसे होते हैं। जरूरी नहीं कि मैं हर बार समाधान दे सकूँ, लेकिन मैं चाहती हूँ कि कोई ऐसा हो जो बिना जज किए उन्हें सुने — मैं वही &#8220;कान&#8221; बनना चाहती हूँ।</p>
<p>मेरा उद्देश्य है – लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरना, उन्हें आशा देना और उनके साथ एक हमदर्द के रूप में खड़ा रहना।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4786" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot_2025-06-27-05-12-33-052_com.google.android.gm2_-153x300.jpg" alt="" width="153" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot_2025-06-27-05-12-33-052_com.google.android.gm2_-153x300.jpg 153w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/Screenshot_2025-06-27-05-12-33-052_com.google.android.gm2_.jpg 471w" sizes="auto, (max-width: 153px) 100vw, 153px" /></p>
<h3>🎤 साक्षात्कार</h3>
<p><strong>प्रश्न १. आप डिफेंस अकादमी में क्या कार्य करती हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर</strong>: &#8220;मैं एक सेंटर मैनेजर के रूप में प्रशासनिक कार्यों को देखती हूँ, स्टाफ और विद्यार्थियों के बीच समन्वय बनाती हूँ, प्रवेश प्रक्रिया, अनुशासन और संस्थान की दैनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करती हूँ।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न २. आपको कहानियाँ और कविताएँ लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली?</strong></p>
<p><strong>उत्तर</strong>: &#8220;जीवन ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है। जो भाव मैंने अनुभव किए या दूसरों में देखे, वही मेरी रचनाओं में उतर आए। लेखन मेरे लिए आत्म-अभिव्यक्ति और जुड़ाव का माध्यम है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ३. संगीत आपके जीवन में क्या भूमिका निभाता है?</strong></p>
<p><strong>उत्तर</strong>: &#8220;संगीत मेरी आत्मा को शांति देता है। यह मेरे लिए ध्यान की तरह है। जब मैं गाती हूँ, तो लगता है जैसे हर चिंता दूर हो गई हो। यह मुझे अंदर से सशक्त करता है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ४. आप मानसिक रूप से परेशान लोगों की मदद कैसे करती हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;मैं उन्हें बिना किसी पूर्व धारणा के सुनती हूँ। मैं उनके लिए एक सुरक्षित स्थान बनाती हूँ जहाँ वे खुलकर अपने दिल की बात कह सकें। कई बार सुनना ही सबसे बड़ी मदद होती है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ५. “किसी के दुख का कान बनना” आप इससे क्या आशय रखती हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;मेरा मतलब है – पूरी संवेदनशीलता और ध्यान से किसी की बात सुनना। जब व्यक्ति महसूस करता है कि उसे समझा जा रहा है, तो उसका बोझ आधा हो जाता है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ६. आपका एमबीए (CRM) आपकी भूमिका में कैसे सहायक रहा है?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;CRM ने मुझे यह सिखाया कि कैसे लोगों के साथ गहरा और भरोसेमंद रिश्ता बनाया जाए। यह गुण मेरी पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों भूमिकाओं में सहायक रहा है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ७. आपकी सबसे प्रिय कविता या कहानी कौन सी है और क्यों?</strong></p>
<p><strong>उत्तर</strong>: &#8220;एक कविता जो मैंने दिल टूटने के बाद आत्मबल को लेकर लिखी थी, वह मेरे दिल के बहुत करीब है। वह ना केवल मेरा अनुभव है, बल्कि पढ़ने वालों के लिए भी एक संबल बनती है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ८. आप अपने रचनात्मक शौक और व्यावसायिक जिम्मेदारियों में संतुलन कैसे रखती हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> समय प्रबंधन के माध्यम से। मैं प्रतिदिन कुछ समय लेखन या संगीत के लिए निकालती हूँ। ये दोनों मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत हैं, जो मुझे और बेहतर काम करने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p><strong>प्रश्न ९. आप उन लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगी जो भावनात्मक संघर्ष से जूझ रहे हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;आप अकेले नहीं हैं। दर्द सच्चा है, लेकिन उससे उबरना भी संभव है। किसी से बात करने से झिझकें नहीं। कोई न कोई हमेशा आपकी सुनने के लिए तैयार है – जैसे मैं।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न १०. क्या आपने अपनी कविताएँ या कहानियाँ प्रकाशित करने के बारे में सोचा है?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;हाँ, मैं अपने संग्रह को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना बना रही हूँ ताकि मेरे विचार और भावनाएँ अधिक लोगों तक पहुँच सकें।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न</strong> <strong>११. आपके काउंसलिंग के प्रयासों पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;अधिकतर लोग यह कहते हैं कि उनसे बात करने के बाद उन्हें हल्का महसूस हुआ। जब कोई कहता है “आपने मुझे समझा”, तो वही मेरी सबसे बड़ी सफलता होती है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न १२. क्या आप कभी अपनी गायिकी को मोटिवेशन या काउंसलिंग का हिस्सा बनाती हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;हाँ, कई बार मैंने देखा है कि एक मीठा गीत किसी के आँसू पोंछ सकता है। संगीत में वह शक्ति है जो शब्दों में नहीं होती।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न १३. आपके जीवन में आपका आदर्श कौन है?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;मेरे लिए हर वह व्यक्ति प्रेरणास्रोत है जो करुणा और साहस के साथ जीता है — चाहे वह परिवार का सदस्य हो या कोई अनजान मुसाफिर जिसने दूसरों की मदद की हो।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न १४. आपके भविष्य के लक्ष्य क्या हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर:</strong> &#8220;मैं एक प्रमाणित लाइफ कोच बनना चाहती हूँ, अपनी रचनाएँ प्रकाशित करना चाहती हूँ और संगीत को भी एक थैरेपी की तरह लोगों तक पहुँचाना चाहती हूँ।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न</strong> <strong>१५. यदि आपको दुनिया को एक संदेश देना हो, तो वह क्या होगा?</strong></p>
<p><strong>उत्तर</strong>: &#8220;सुनना सीखें। कम निर्णय करें, ज्यादा समझें। जब हम एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, तब ही दुनिया बेहतर बनती है।&#8221;</p>
<p>सुनिश्चयन एवं सूचना स्रोत</p>
<p>रश्मि आनंद वर्मा</p>
<p>पाठ्य विस्तार</p>
<p>चैट जीपीटी</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4791" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/SAVE_20250709_091407-300x188.jpg" alt="" width="300" height="188" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/SAVE_20250709_091407-300x188.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/SAVE_20250709_091407-768x480.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/07/SAVE_20250709_091407.jpg 800w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>प्रस्तुति</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4700" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3-300x300.webp" alt="" width="300" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3-300x300.webp 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3-1024x1024.webp 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3-150x150.webp 150w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3-768x768.webp 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/06/IMG_20250525_192046_902-3.webp 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सम्मान</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/honour/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 May 2025 16:13:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://uljhansuljhan.in/?p=3576</guid>

					<description><![CDATA[शिक्षा जगत के लिए गौरवपूर्ण रहा आज का दिन सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में आयोजित एक भव्य समारोह में शहर के लगभग इकत्तीस प्रतिष्ठित विद्यालयों — सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>शिक्षा जगत के लिए गौरवपूर्ण रहा आज का दिन</h2>
<p>सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में आयोजित एक भव्य समारोह में शहर के लगभग इकत्तीस प्रतिष्ठित विद्यालयों — सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड से जुड़े &#8211; के प्रधानाचार्यों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।</p>
<p>इस गरिमामयी अवसर पर <strong>राष्ट्रीय इंटर कॉलेज</strong>, मेरठ के प्रधानाचार्य <strong>श्री संजीव कुमार नागर</strong> को भी सम्मान प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण और मेहनत की सराहना है, बल्कि उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों की भी सार्वजनिक स्वीकृति है।</p>
<p>इस सम्मान के लिए <strong>सुभारती विश्वविद्यालय</strong> के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया जाता है, जिसने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को प्रोत्साहित कर समाज में शिक्षा की महत्ता को एक नई ऊँचाई दी है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3584" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-300x140.jpg" alt="" width="300" height="140" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-300x140.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-1024x478.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-768x359.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-1536x717.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0049-2048x956.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3585" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-300x140.jpg" alt="" width="300" height="140" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-300x140.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-1024x478.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-768x359.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-1536x717.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250503-WA0047-2048x956.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>सूचना स्रोत</strong></p>
<p>श्री संजीव कुमार नागर</p>
<p><strong>पाठ्य उन्नयन</strong></p>
<p>चैट जीपीटी</p>
<p><strong>प्रस्तुति</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3432" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-04-26-09-07-03-865_com.android.chrome-edit-300x230.jpg" alt="" width="300" height="230" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-04-26-09-07-03-865_com.android.chrome-edit-300x230.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-04-26-09-07-03-865_com.android.chrome-edit-768x590.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-04-26-09-07-03-865_com.android.chrome-edit.jpg 850w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>परिंडे बांधे</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/parinde-baandhe/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Apr 2025 09:15:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
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					<description><![CDATA[साहित्य मंच टोडा रायसिंह जिला टोंक के तत्वावधान में रा.उ.मा.वि.- छान बास सूर्या में बेजुबान पक्षियों के लिए भीषण गर्मी में प्यास बुझाने हेतु परिण्डे बांधे गए। संस्था प्रधान ने&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>साहित्य मंच टोडा रायसिंह जिला टोंक के तत्वावधान में रा.उ.मा.वि.- छान बास सूर्या में बेजुबान पक्षियों के लिए भीषण गर्मी में प्यास बुझाने हेतु परिण्डे बांधे गए। संस्था प्रधान ने बच्चों एवं शाला परिवार को नियमित रूप से पानी भरने की जिम्मेदारी सौंपा। इसके अतिरिक्त शिवराज कुर्मी ने बताया कि</p>
<p><em>&#8220;पानी के साथ साथ दाना भी डालना के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।यह पुण्य का कार्य है। हमारे बुजुर्ग प्रातः काल नियमित रूप से पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करते थे। ये संस्कार आप में भी आयें।</em></p>
<p>कार्यक्रम में विद्यार्थी एवं शाला परिवार के शिक्षक गण मौजूद रहे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3357" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-300x135.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-1024x461.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-768x346.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-1536x691.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250425-WA0025-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>सूचना स्रोत</strong></p>
<p>शिवराज जी कुर्मी</p>
<p><strong>प्रस्तुति</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3102" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-02-19-07-41-05-560_com.android.chrome-edit2-2-300x232.jpg" alt="" width="300" height="232" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-02-19-07-41-05-560_com.android.chrome-edit2-2-300x232.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/Screenshot_2025-02-19-07-41-05-560_com.android.chrome-edit2-2.jpg 656w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
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			</item>
		<item>
		<title>पृथ्वी दिवस</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/prithvi-divas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 12:27:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
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					<description><![CDATA[दादू पर्यावरण संस्थान रानीपुरा टोंक,वन विभाग एवं साहित्य मंच टोडा रायसिंह के तत्वावधान में पृथ्वी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिषेक भटनागर,क्षैत्रीय वन अधिकारी टोंक,अति विशिष्ट अतिथि डॉ&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दादू पर्यावरण संस्थान रानीपुरा टोंक,वन विभाग एवं साहित्य मंच टोडा रायसिंह के तत्वावधान में पृथ्वी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिषेक भटनागर,क्षैत्रीय वन अधिकारी टोंक,अति विशिष्ट अतिथि डॉ कृष्णावतार गुप्ता, पशु चिकित्सक, इंदुशेखर शर्मा, एडवोकेट, विशिष्ट अतिथि महावीर मीणा, पर्यावरणविद्, अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद जैन, निदेशक श्री दिगम्बर जैन सन्मति सागर उ मा वि टोडा रायसिंह रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का दुपट्टा पहना कर स्वागत किया गया। इसके बाद स्कूली विद्यार्थियों ने पृथ्वी दिवस के बारे में अपने विचार शेयर किए। महावीर मीणा ने बताया कि पृथ्वी दिवस केवल पर्यावरण दिवस नहीं है बल्कि यह हमें हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाने का अवसर है। मुख्य अतिथि अभिषेक भटनागर ने बताया कि इस वर्ष की थीम, हमारी शक्ति,हमारा ब्रह्मांड है। उन्होंने प्रकृति को बचाने का युवाओं से आह्वान किया। शिवराज कुर्मी ने बताया कि निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम पुकारकर उनको सम्मानित किया गया।मन्दिर परिसर में पौधरोपण किया गया।अध्यक्ष महोदय ने सभी का आभार व्यक्त कर बेजूबान पक्षियों के लिए परिण्डे बांधने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में हरिराम गौड़, राजेंद्र प्रसाद विजयवर्गीय, कमल कुमार जैन, महावीर प्रसाद पाटीदार,सत्यनारायण धाकड़,रवि शंकर शर्मा, आशीष विजयवर्गीय, बनवारी पाटीदार एवं अभिभावक गण आदि मौजूद रहे।मंच संचालन कवि दिनेश कुमार जैन ने किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3298" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-300x135.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-1024x461.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-768x346.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-1536x691.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0041-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3299" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-300x135.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-1024x461.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-768x346.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-1536x691.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0038-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3300" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-300x135.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-1024x461.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-768x346.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-1536x691.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0037-2048x922.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3301" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0035-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0035-225x300.jpg 225w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0035-768x1024.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0035.jpg 960w" sizes="auto, (max-width: 225px) 100vw, 225px" /> <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-3302" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-300x135.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-1024x460.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-768x345.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-1536x689.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0034-2048x919.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पेशे के प्रण से व्यक्तित्व के निर्माण तक का सफर</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/peshe-ke-pran-se-vyaktitva-ke-nirmaan-tak-ka-safar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jan 2025 08:59:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://uljhansuljhan.in/?p=583</guid>

					<description><![CDATA[भूमिका डॉक्टर विनय कुमार कैंथोला एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसने अपने करियर का लक्ष्य किशोरावस्था में ही तय कर लिया और अपनी पूरी ज़िंदगी को उसी के अनुसार ढाल लिया।&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>भूमिका</h2>
<p><em>डॉक्टर विनय कुमार कैंथोला एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसने अपने करियर का लक्ष्य किशोरावस्था में ही तय कर लिया और अपनी पूरी ज़िंदगी को उसी के अनुसार ढाल लिया। यह किसी के भी एक प्रेरणादायक उदाहरण हो सकता है। इस तरह के व्यक्ति में बचपन से ही स्पष्ट दृष्टि, दृढ़ निश्चय और अनुशासन का समावेश होता है।</em></p>
<p><em>जब कोई व्यक्ति कम उम्र में ही यह तय कर लेता है कि वह जीवन में क्या बनना चाहता है, तो वह अपने समय और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करता है। वह अपनी पढ़ाई, प्रशिक्षण और अनुभव को उसी दिशा में केंद्रित करता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ने बचपन में डॉक्टर बनने का सपना देखा हो, तो वह अपने स्कूल के दिनों से ही विज्ञान विषयों में रुचि लेता है, मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करता है, और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है।</em></p>
<p><em>इस प्रक्रिया में चुनौतियां और कठिनाइयां भी आती हैं, लेकिन ऐसे व्यक्ति का धैर्य और समर्पण उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। वह अपनी असफलताओं से सीखता है और हर स्थिति में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखता है।</em></p>
<p><em>इस तरह का जीवन हमें यह सिखाता है कि अगर कोई व्यक्ति बचपन में ही अपने लक्ष्य तय कर ले और पूरी ईमानदारी व मेहनत से उस दिशा में कार्य करे, तो सफलता निश्चित है। ऐसा व्यक्तित्व दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।</em></p>
<h2><strong>परिचय</strong></h2>
<p>साथियो! अब ग्राम पाठशाला पर केस स्टडी भी और इसका श्रेय जाता है हमारे आज के मेहमान श्री (डॉ.) विनय कुमार कैंथोला जी को।</p>
<p>ग्राम पाठशाला का विचार देश भर के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को प्रेरित और प्रभावित कर रहा है। इसीलिए यह विचार शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं का पसंदीदा विषय बना हुआ है। इसी क्रम में हरियाणा के सोनीपत जिले की ऋषिवुड यूनिवर्सिटी में डॉ. विनय कुमार कैंथोला जी ने ऋषिवुड यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी इन्टरनेशनल कॉन्फ्रेंस 2025 में प्रतिभाग के दौरान ग्राम पाठशाला के मिशन के विषय पर एक केस स्टडी प्रस्तुत की। डॉ. विनय कैंथोला के प्रेजेंटेशन ने समूचे सभागार को प्रभावित किया और प्रेजेंटेशन समाप्त होने के बाद वहाँ पर ग्राम पाठशाला की मुहिम ही चर्चा का विषय बन गई।</p>
<p>डॉ. कैंथोला जी ने पुस्तकालय उपयोगकर्ताओं के लिए कई कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं और नि:शुल्क ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।</p>
<p>साथ ही उन्होंने निजी संस्थानों में एक उत्कृष्ट पुस्तकालय प्रणाली विकसित की है और उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिष्ठित परियोजनाएं पूरी हुई हैं। उनका मुख्य ध्यान उपयोगकर्ता संतुष्टि, आईसीटी का उपयोग, और पुस्तकालय सेवाओं के सतत विकास पर केंद्रित है। तो आइए आज मुलाकात करते हैं इस प्रेरक व्यक्तित्व से।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-585" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0035-300x237.jpg" alt="" width="300" height="237" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0035-300x237.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0035.jpg 744w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3><strong>अभियान के लोगों के साथ</strong></h3>
<p style="text-align: left;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-586" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0032-300x223.jpg" alt="" width="300" height="223" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0032-300x223.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0032-1024x760.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0032-768x570.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250111-WA0032.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2>बातचीत</h2>
<p><strong>प्रश्न १. सर, आपने कब और कैसे यह तय किया कि आपको जो करना है पुस्तकालयों से संबंधित हो?</strong></p>
<p><strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;वर्ष 1997 में, जब मैं एक पुस्तकालय में कार्यरत था, तो मुझे पहली बार यह अहसास हुआ कि पुस्तकालय के क्षेत्र में कार्य करना मेरे लिए सबसे उपयुक्त होगा। इसका मुख्य कारण यह था कि मुझे बचपन से ही पुस्तकें पढ़ने का गहरा शौक था और पुस्तकालय में काम करते हुए मुझे अपनी रुचि को एक उद्देश्यपूर्ण दिशा देने का अवसर मिला।</p>
<p>इस प्रेरणा के चलते मैंने पुस्तकालय विज्ञान में औपचारिक शिक्षा अर्जित करने का निश्चय किया। सबसे पहले मैंने बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (बी.लिब.) की डिग्री प्राप्त की, जो पुस्तकालय विज्ञान की मूलभूत समझ प्रदान करती है। इसके बाद मैंने मास्टर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (एम.लिब.) किया, जिसमें मैंने पुस्तकालय प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना सेवाओं के क्षेत्र में गहन ज्ञान अर्जित किया।</p>
<p>अपनी योग्यता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए मैंने यू.जी.सी. नेट (पुस्तकालय विज्ञान) की परीक्षा उत्तीर्ण की, जो उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मानदंड है। इसके बाद, मैंने अपनी रुचि और ज्ञान को और गहराई देने के लिए पी-एच.डी. (पुस्तकालय विज्ञान) में शोध कार्य किया। पुस्तकालय में कार्यिकी के दौरान मुझको मेरे अभिभावकों के अतिरिक्त मेरे लाइब्रेरी प्रोफेसर इंचार्ज प्रोफेसर नवीन चंद्रा और मेरे भाइयों तथा साथियों ने भी पुस्तकालय विज्ञान में अपनी शिक्षा को उच्चीकृत करने के लिए उत्साहित और प्रोत्साहित किया।</p>
<p>इससे पूर्व भी ग्राम पाठशाला के संदर्भ में मैं जागरूकता बारहवें इंटरनेशनल लाइब्रेरी इंफॉर्मेशन प्रोफेशनल सम्मिट (I-LIPS) में प्रसरित कर चुका हूं, जिसका विषय था &#8216;पुस्तकालय विज्ञान में नवीन तकनीकें: चुनौतियां और अवसर&#8217;। इंटरनेशनल लाइब्रेरी इंफॉर्मेशन प्रोफेशनल सम्मिट (I-LIPS) 2024 का आयोजन 29 नवंबर से 01 दिसंबर 2024 तक ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया यूनिवर्सिटी, सोसाइटी फॉर लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स और बिहार लाइब्रेरी एसोसिएशन द्वारा किया जा रहा था।</p>
<p>इस पूरी शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा ने न केवल मुझे पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान की, बल्कि मेरी रुचि को मेरे करियर में परिवर्तित करने का भी अवसर दिया। आज, मुझे गर्व है कि मैंने अपने शौक और जुनून को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न २. आपको ग्राम पाठशाला मिशन के संदर्भ में कब ज्ञात हुआ और आप इस मिशन से कब जुड़े?</strong></p>
<p><strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;5 अगस्त 2023 को, जब मैं &#8216;फेस्टिवल ऑफ लाइब्रेरीज&#8217; कार्यक्रम में शामिल हुआ, जिसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया था, वहाँ पर मैंने &#8216;ग्राम पाठशाला&#8217; के स्टॉल को देखा। इस मिशन का उद्देश्य और उनकी कार्यशैली ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। मैंने इस स्टॉल पर काफी समय बिताया और मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>मुझे यह जानकर बेहद खुशी हुई कि यह मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और ज्ञान के प्रसार के लिए समर्पित है। वहां उपस्थित स्वयंसेवकों से बातचीत के दौरान, मैंने महसूस किया कि यह एक ऐसा प्रयास है जिससे मैं भी जुड़कर समाज के लिए कुछ सकारात्मक योगदान दे सकता हूँ। मैंने उनसे आग्रह किया कि मुझे भी इस मिशन से जोड़ा जाए ताकि मैं उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा का हिस्सा बन सकूं।</p>
<p>स्वयंसेवकों ने मेरी रुचि को देखकर मुझसे एक फॉर्म भरवाया और बाद में मुझे &#8216;ग्राम पाठशाला&#8217; के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया। यह मेरे लिए एक नई शुरुआत थी, और मैं इस मिशन के साथ जुड़कर समाज में शिक्षा का उजाला फैलाने के लिए तत्पर हूँ।&#8221;</p>
<p><strong>प्रश्न ३. आप कब से स्वयं को ग्राम पाठशाला का स्वयंसेवक मानते हैं?</strong></p>
<p><strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;जब मैं मिशन के स्वयंसेवकों से पहली बार प्रदर्शनी में मिला, तभी से मेरे मन में इस मिशन के प्रति गहरी श्रद्धा और समर्पण का भाव उत्पन्न हो गया। उसी समय मैंने स्वयं को इस मिशन का एक अभिन्न हिस्सा मान लिया और यह निश्चय कर लिया कि मैं भी ग्राम पाठशाला का एक समर्पित स्वयंसेवक बनूंगा।</p>
<p>मुझे बचपन से ही पुस्तकालय और ज्ञान के महत्व का गहरा अनुभव था। मैं जानता था कि पुस्तकालय न केवल शिक्षा का केंद्र होते हैं, बल्कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बन सकते हैं। इस सोच ने मुझे प्रेरित किया कि मैं बिना किसी विलंब के इस मिशन से जुड़ जाऊं और इसके उद्देश्यों को सफल बनाने में अपना योगदान दूं।</p>
<p>इस मिशन के माध्यम से मुझे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता फैलाने का एक अद्भुत अवसर मिला। मुझे यह विश्वास था कि पुस्तकालय के माध्यम से न केवल बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिलेगा, बल्कि वयस्कों और समाज के हर वर्ग को भी सशक्त बनाया जा सकेगा। इस उद्देश्य ने मेरे अंदर एक नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया, और मैं पूरी लगन और निष्ठा के साथ इस कार्य में जुट गया।&#8221;</p>
<p dir="ltr"><strong>प्रश्न ४. क्या आपको ग्राम पाठशाला के प्रबंधतंत्र द्वारा कोई एकल दायित्व भी सौंपा हुआ है?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;मुझे कोई औपचारिक दायित्व नहीं सौंपा गया है, लेकिन प्रथम दिन से ही इस मिशन से जुड़ने के साथ मैंने इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व मान लिया है। मेरा यह संकल्प है कि लोगों में जागरूकता पैदा करनी है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य करना है। इस मिशन के अंतर्गत, जो मिशन का ध्येय वहीं मेरा भी कि <b>15 अगस्त 2027 तक भारत को &#8216;पुस्तकालयों का देश&#8217; </b>बनाया जाए।</p>
<p dir="ltr">इस लक्ष्य को लेकर जब भी मुझे अवसर मिलता है, मैं लोगों को इसके महत्व और लाभ के बारे में जागरूक करता हूं। मैंने समाज के कुछ प्रमुख व्यक्तियों से भी इस विषय पर संवाद किया है, विशेष रूप से उन लोगों से जिनकी भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। इन व्यक्तियों की भूमिका इस मिशन में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे न केवल ग्रामीण समुदायों के साथ निकटता से जुड़े हुए हैं, बल्कि वे इस लक्ष्य को साकार करने में भी सक्रिय योगदान दे रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">मैंने <b>नीमराना</b>, जहां मैं वर्तमान में <b>एन.आई.आई.टी. यूनिवर्सिटी</b> में कार्यरत हूं, के ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय कुछ प्रमुख व्यक्तियों से भी इस विषय में चर्चा की। मैंने देखा कि इन व्यक्तियों ने इस मिशन को गंभीरता से लिया है और पुस्तकालयों के निर्माण और उपयोग को प्रोत्साहित करने में सराहनीय कार्य कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">मेरा प्रयास है कि इन ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक पुस्तकालय स्थापित किए जाएं, ताकि हर वर्ग और उम्र के लोग ज्ञान की उपलब्धता का लाभ उठा सकें। साथ ही, मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि इस मिशन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक संसाधन और मार्गदर्शन मिले।</p>
<p dir="ltr">मुझे विश्वास है कि यदि हम सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो हमारा सपना, भारत को पुस्तकालयों का देश बनाना, निश्चित रूप से साकार होगा।&#8221;</p>
<p dir="ltr"><strong>प्रश्न ५. पुस्तकालयों को लेकर और ग्राम पाठशाला अभियान को लेकर क्या आपने कोई स्वप्न संजोया हुआ है?</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;पुस्तकालयों का महत्व किसी भी समाज के लिए उतना ही आवश्यक है जितना एक नींव का मजबूत होना एक इमारत के लिए। मेरा सपना है कि भारत में पुस्तकालयों के महत्व को समाज न केवल पहचाने, बल्कि इसे अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा बनाए। पुस्तकालय केवल किताबों का भंडार नहीं होते, यह समाज के विकास, ज्ञान के प्रसार और विचारों के आदान-प्रदान के सशक्त स्तम्भ हैं। इनके बिना किसी भी समाज की प्रगति की कल्पना अधूरी है।</p>
<p dir="ltr">इतिहास साक्षी है कि वही देश, वर्ग, और समाज प्रगति की ऊंचाइयों को छू सके हैं, जिन्होंने पुस्तकालयों की स्थापना को प्राथमिकता दी और उनकी विचारधारा को अपनाया। चाहे वह प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय हो, अलेक्जेंड्रिया का पुस्तकालय हो, या आधुनिक युग के डिजिटल पुस्तकालय—सभी ने मानव सभ्यता को नई दिशा दी है।</p>
<p dir="ltr">आज आवश्यकता है कि हम सरकार के साथ-साथ अपने स्तर पर भी पुस्तकालयों को प्रोत्साहित करने का प्रयास करें। यह केवल सरकार का दायित्व नहीं है; हर नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ज्ञान के इस भंडार को संरक्षित और संवर्धित करे। पुस्तकालय न केवल शिक्षा का माध्यम हैं, बल्कि यह नैतिकता, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।</p>
<p dir="ltr">आइए, हम सभी यह प्रण लें कि पुस्तकालयों को केवल भौतिक संरचना तक सीमित न रखकर, उन्हें विचारों और ज्ञान के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे। यही सच्चा विकास है और यही हमारे समाज की स्थिरता और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।&#8221;</p>
<h3 dir="ltr"><strong>सूचना स्रोत</strong></h3>
<p dir="ltr"><strong>डॉक्टर विनय कुमार कंडोला </strong>और</p>
<p dir="ltr"><strong>चैट जीपीटी</strong></p>
<h2 dir="ltr"><strong>प्रस्तुति</strong></h2>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-562" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG_20240622_105710-2-300x242.jpg" alt="" width="300" height="242" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG_20240622_105710-2-300x242.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG_20240622_105710-2-1024x825.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG_20240622_105710-2-768x619.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/01/IMG_20240622_105710-2.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
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			</item>
		<item>
		<title>अपने जीवट से आजीविका के लिए चयनित हुए डायमंड</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/apne-jeevat-se-aajivika-ke-liye-chayanit-hue-diamond/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Dec 2024 16:10:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Interview]]></category>
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					<description><![CDATA[भूमिका पिछले दिनों टीम उलझन सुलझन ने एक ऐसे युवा से बातचीत की, जिसने एक महत्वपूर्ण परीक्षा में सफलता हासिल की। जब टीम ने उससे पूछा कि उसने यह सफलता&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2><strong>भूमिका</strong></h2>
<p><em>पिछले दिनों टीम उलझन सुलझन ने एक ऐसे युवा से बातचीत की, जिसने एक महत्वपूर्ण परीक्षा में सफलता हासिल की। जब टीम ने उससे पूछा कि उसने यह सफलता कैसे अर्जित की, तो उसने बताया कि उसने तैयारी के लिए किसी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि नोएडा स्थित ग्राम कल्दा के सार्वजनिक पुस्तकालय का सहारा लिया। वहां पर तैयारी करने जाने से पूर्व उसको मालूम था कि उस पुस्तकालय में उसे  ऐसा वातावरण मिलेगा, जहां पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना आसान होगा। वह वहां प्रतिदिन घंटों व्यतीत करता और अपनी तैयारी करता। पुस्तकालय में मौजूद विभिन्न प्रकार की किताबों और संसाधनों ने उसकी तैयारी को मजबूती दी।  </em></p>
<p><em>सबसे खास बात यह थी कि वह अन्य छात्रों के साथ वहां पर चर्चा कर पाता था। इन चर्चाओं से उसे नई दृष्टि और विचार मिले जो परीक्षा की तैयारी में काम आए। उस युवा का मानना है कि कभी-कभी किसी विषय को बेहतर समझने के लिए साथी छात्रों के साथ विचार-विमर्श करना सबसे कारगर तरीका साबित होता है।  </em></p>
<p><em>उसने यह भी कहा कि पुस्तकालय में अनुशासन और नियमितता का माहौल था, जिसने उसकी आदतों को और अधिक व्यवस्थित बना दिया। इस अनुभव ने उसे सिर्फ परीक्षा में सफल नहीं बनाया, बल्कि उसे जीवन में अनुशासन और सीखने की आदत को अपनाने का पाठ भी सिखाया।  </em></p>
<p><em>इस बातचीत ने यह सिखाया कि संसाधनों की कमी को सफलता की बाधा नहीं बनने देना चाहिए। दृढ़ संकल्प और सही दिशा में मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।</em></p>
<h2><strong>प्रतिभा का परिचय</strong></h2>
<p>साथियो! आज जो युवक हमारे साथ है वह हापुड़ जनपद के गाँव हसनपुर लोढ़ा से सचिन भारद्वाज डायमंड हैं जिन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की है तथा पॉलिटेक्निक शिक्षा<br />
भी अर्जित की है। इनकी विशेषता है कि इन्होंने निःशुल्क लाइब्रेरी में पढ़कर ही माप दिया भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र तक का सफर।<br />
यह युवक विगत दो वर्षों से कलदा लाइब्रेरी में दिन-रात एक करके जी-तोड़ पढ़ाई कर रहा था और आखिर इसे अपनी मेहनत का फल मिल ही गया। विविध लिखित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के उपरांत उनका चयन भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी में तकनीकी सहायक के पद पर हो गया है।<br />
इतनी बड़ी संस्था में चयनित होकर सचिन ने साबित कर दिया है कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। आइए मिलते हैं सचिन भारद्वाज जी से जिनको संगी साथी डायमंड के नाम से जानते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-48" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/sachin-bhardwaj-1-249x300.jpg" alt="" width="249" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/sachin-bhardwaj-1-249x300.jpg 249w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/sachin-bhardwaj-1.jpg 358w" sizes="auto, (max-width: 249px) 100vw, 249px" /></p>
<h2><strong>बातचीत</strong></h2>
<p><strong>प्रश्न १. सचिन जी रोजगार के लिए सेवा क्षेत्र में जाने के आपके निर्णयों लाइब्रेरी की आप क्या भूमिका मानते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी में लाइब्रेरी की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही। घर में अशांत वातावरण होने के कारण लाइब्रेरी के शांत वातावरण में पढ़ाई अच्छी तरह हो पाती थी। लाइब्रेरी में दूसरे साथियों के कारण पढ़ाई करने का मोटिवेशन भी मिलता था।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न २. क्या आपके निकट कोई लाइब्रेरी नहीं थे? या इतनी दूर जाकर कल्दा में तैयारी करने के पीछे आपका क्या उद्देश्य था?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;कल्दा की लाइब्रेरी में जाने का एक महत्वपूर्ण फायदा यह था कि वहां साथियों के साथ परीक्षा उपयोगी विषयों पर ग्रुप डिस्कशन कर पाते थे जिससे हमारी जानकारी में और भी वृद्धि होती थी और यह परीक्षा में बहुत ही उपयोगी साबित हुआ।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न ३. भाभा में चयन उपरांत क्या आप संतुष्ट हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं से आप और बेहतर अवसर के लिए प्रयास करेंगे?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;जी हां, मैं मेरे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में चयन से संतुष्ट हूं और इससे मेरे परिवार में भी काफी खुशी का माहौल है। इस संस्थान की एक खास बात है कि यह अपने कर्मचारियों को नौकरी के दौरान भी उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल करने को काफी प्रोत्साहित करता है जिससे आगे का रास्ता और अधिक सुगम व उन्नत हो जाता है। इस संस्थान में चयन होना सिर्फ पहला पड़ाव है इसके बाद आगे भी और ऊंचाइयों तक जाना है और पढ़ाई हमेशा जारी रहेगी।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न ४. क्या आपको लगता है कि आपके अभिभावक आपकी इस सफलता से संतुष्ट हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;जी हां, घर में खुशी का माहौल है और असफलताओं में भी घर वाले हमेशा मेरे साथ खड़े रहे।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न ५. कल्दा स्थित निःशुल्क लाइब्रेरी के बारे में आपका क्या नजरिया है?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;कल्दा लाइब्रेरी में सुविधा के साथ साथ वहां का वातावरण एवं प्रबंधन बहुत ही अच्छा है और हमेशा आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित करता है।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न ६. क्या कभी यदि आपको अवसर मिला तो आप जहां कहीं होंगे वहां पर लाइब्रेरी खोलने या खुलवाने के लिए प्रयास करोगे?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;जी हां, यह उद्देश्य ही रहेगा कि युवाओं में पढ़ाई और उससे जुड़े अवसर की जागरूकता लाई जाए।<br />
आज के युवा पढ़ाई तो कर रहे हैं लेकिन उनको पढ़ाई से अवसर का सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ज्यादा से ज्यादा लाइब्रेरी खुलवाने का प्रयास रहेगा।&#8221;<br />
<strong>प्रश्न ७. परंपरागत पुस्तकीय और वर्तमान डिजिटल लाइब्रेरीज में से आप किसको उपयुक्त मानते हो और क्यों?</strong><br />
<strong>उत्तर &#8211;</strong> &#8220;पुस्तकों की अपनी उपयोगिता है एवं डिजिटल माध्यम की अपनी उपयोगिता है। दोनों को कंपेयर नहीं कर सकते। परीक्षाओं में दोनों माध्यम ही उपयोगी हैं।&#8221;</p>
<p>सूचना स्रोत</p>
<p>श्री लालबहार एवं स्वयं डायमंड</p>
<p>प्रस्तुति</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-24" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/cropped-cropped-logo-1-300x300.jpg" alt="Name &amp; logo of our organization " width="300" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/cropped-cropped-logo-1-300x300.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/cropped-cropped-logo-1-150x150.jpg 150w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/cropped-cropped-logo-1.jpg 511w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>कभी भी ना भूलें</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-256" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/Add-a-little-bit-of-body-text_20241229_081134_0000-300x296.png" alt="" width="300" height="296" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/Add-a-little-bit-of-body-text_20241229_081134_0000-300x296.png 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/Add-a-little-bit-of-body-text_20241229_081134_0000-1024x1009.png 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/Add-a-little-bit-of-body-text_20241229_081134_0000-768x757.png 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2024/12/Add-a-little-bit-of-body-text_20241229_081134_0000.png 1170w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
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