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	<title>Uncategorized &#8211; Uljhan Suljhan</title>
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	<title>Uncategorized &#8211; Uljhan Suljhan</title>
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	<item>
		<title>लोकरंग</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/lokrang/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Nov 2026 04:21:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत की माटी, कला और संस्कृति के नाम कहीं बाँस की बारीक बुनावट, कहीं मिट्टी की सुंदर सजावट, कहीं लकड़ी पर उकेरे अरमान, कहीं रंगों में रची पहचान। हर राज्य&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>भारत की माटी, कला और संस्कृति के नाम</h1>
<p>कहीं बाँस की बारीक बुनावट,<br />
कहीं मिट्टी की सुंदर सजावट,<br />
कहीं लकड़ी पर उकेरे अरमान,<br />
कहीं रंगों में रची पहचान।</p>
<p>हर राज्य का अपना रंग है,<br />
हर शिल्प में अनूठा ढंग है,<br />
कहीं कठपुतली की मुस्कान,<br />
कहीं बंधेज की अलग शान।</p>
<p>असम के बाँस की कलाकारी,<br />
राजस्थान की माटी प्यारी,<br />
कहीं चाक पर मिट्टी घूमती,<br />
कहीं कारीगर की कला झूमती।</p>
<p>कहीं मधुबनी के रंग निराले,<br />
कहीं कश्मीर के पश्मीने प्यारे,<br />
कहीं गुजरात की कच्छ कढ़ाई,<br />
कहीं पंजाब की फुलकारी छाई।</p>
<p>कहीं लकड़ी के खिलौने बोलें,<br />
कहीं हस्तकला के रंग घोलें,<br />
कहीं धागों में सपने बुने,<br />
कहीं पत्थर में आकार चुने।</p>
<p>हर वस्तु में श्रम की गाथा,<br />
हर कला में पुरखों की परिभाषा,<br />
पीढ़ी-दर-पीढ़ी जो सँवरती आई,<br />
वही हमारी विरासत कहलायी।</p>
<p>इन रंगों को निहारते-निहारते,<br />
मन के कुछ पुराने द्वार खुले,<br />
मिट्टी, पुट्टी से कुछ गढ़ने के,<br />
मन में फिर अरमान पले।</p>
<p>कितनी सुंदर सृजन की भाषा,<br />
हाथों में कितनी अद्भुत आशा,<br />
एक साधारण वस्तु को कलाकार,<br />
दे देता है कितना सुंदर आकार।</p>
<p>ये केवल बाजारों की रौनक नहीं,<br />
ये संस्कृति की जीवित पहचान हैं,<br />
इन कारीगरों के हाथों में,<br />
भारत की सदियों की शान है।</p>
<p>आओ इनके हुनर को मान दें,<br />
लोककलाओं को नया सम्मान दें,<br />
जब तक मिट्टी में महक रहेगी,<br />
तब तक संस्कृति भी महकती रहेगी।</p>
<p>न मिटने दें इन रंगों की छाया,<br />
न खोने दें पुरखों की माया,<br />
कला बचेगी तो पहचान रहेगी,<br />
भारत की संस्कृति सदा महान रहेगी।</p>
<p>सरोज प्रसाद राय</p>
<figure id="attachment_9836" aria-describedby="caption-attachment-9836" style="width: 212px" class="wp-caption alignnone"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-9836" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg" alt="" width="212" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg 212w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit.jpg 565w" sizes="(max-width: 212px) 100vw, 212px" /><figcaption id="caption-attachment-9836" class="wp-caption-text">उलझन सुलझन</figcaption></figure>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुनिता जी की कलमकारी</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/sunita-ji-ki-kalam-kaaree/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Oct 2026 03:21:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा का बंटाधार आजकल तो शिक्षा का हो रहा बंटाधार राजनीति के दुष्चक्र में शिक्षा को भी फांस लिया आए दिन नई नए खेल खेले जा रहे क्या-क्या नहीं हो&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 dir="ltr">शिक्षा का बंटाधार</h1>
<p dir="ltr">आजकल तो शिक्षा का हो रहा बंटाधार<br />
राजनीति के दुष्चक्र में शिक्षा को भी फांस लिया<br />
आए दिन नई नए खेल खेले जा रहे<br />
क्या-क्या नहीं हो रहा स्कूलों में<br />
ये उत्सव, वो गतिविधि<br />
खेल, रैली, प्रदर्शनी और भी बहुत कुछ<br />
नहीं हो रही तो बस केवल पढ़ाई<br />
परीक्षाएं एकदम नजदीक आ रहीं<br />
ऊपर से सरकार को कई नवाचारों की सूझ रही<br />
परिणाम कम आने पर फिर शिक्षकों से नोटिस में बात की जाएगी<br />
करना चाहते हैं बहुत कुछ अभी<br />
पर नीतियाँ नहीं चाह रहीं<br />
किसी को अपने सिलेबस की चिंता सता रही<br />
तो किसी को रिविज़न की चिंता खा रही<br />
पर विभागीय नीतियों में ये सब धराशाई हो रहीं<br />
कभी विकसित भारत के नाम पर पूरा सप्ताह लील लिया जाता<br />
तो कभी और किसी नाम के<br />
जैसे स्कूल शिक्षा के नहीं, इन्हीं कामों के लिए बने हों<br />
शिक्षक और बच्चे खुद असमंजस में हैं<br />
कभी पोस्टर बनाओ, कभी निबन्ध लिखवाओ<br />
कभी रंगोली सजाओ, कभी डांस करवाओ<br />
कभी वहाँ ले जाओ, कभी यहाँ ले जाओ<br />
केवल एक या दो दिन की बात नहीं<br />
पूरे साल भर चलता है यह दोहरापन<br />
फिर शिक्षा में गुणवत्ता की बात करते हैं<br />
कभी-कभी शिक्षक ही भूल जाता है<br />
कि उसका मुख्य कार्य क्या है<br />
केवल आयोजन तक ही सीमित नहीं<br />
इन सबका फ़ोटो खींचो, वीडियो भी बनाओ<br />
आईडी पर अपलोड करो<br />
कभी साइट तो कभी नेटवर्क की समस्या और तनाव में जी रहा है शिक्षक<br />
फ़िर सोचता है हमारा मुख्य ध्येय तो हमसे छीन लिया<br />
बाकी सब करना पड़ रहा है<br />
आज बोर्ड की कक्षाओं को बुलाया गया<br />
टेस्ट होंगे, बोर्ड परीक्षा परिणाम उन्नयन के<br />
बच्चे आए भी लेकिन &#8230;&#8230;&#8230;<br />
पढ़ाई नहीं कर सके<br />
स्कूल में टूर्नामेंट का समापन था<br />
साउंड खूब गूंज रहा था<br />
कार्यक्रम रंगारंग चल रहा था<br />
बच्चे कमरों में बंद थे<br />
कोलाहल से परेशान भी थे<br />
न तो सेल्फ स्टडी कर पा रहे, न टेस्ट दे पा रहे<br />
इतने शोर शराबे में संभव भी नहीं<br />
अभी तो एक और कार्यक्रम में शिरकत करना है<br />
जिसका शायद उनकी पढ़ाई से दूर-दूर भी सम्बन्ध नहीं<br />
लेकिन जाना है, आला कमान का ऑर्डर है<br />
और क्या नीतियाँ लिखूँ, ऐसी नीतियां बनाई जा रहीं<br />
जिससे शिक्षा और गर्त में जा रही<br />
सरकारी स्कूल हर रैली, आयोजन का हिस्सा होता है<br />
जिससे वो शिक्षा में पिछड़ता जा रहा है<br />
इसका दुःख एक सरकारी शिक्षक से बेहतर कौन समझ सकता है</p>
<h1 dir="ltr"><b>जागो, अब जागो</b></h1>
<p dir="ltr">सोच बदलो, समय बदलो,<br />
बदल रहा संसार,<br />
आँखें खोलो, सच को देखो,<br />
मत रहो अब लाचार।</p>
<p dir="ltr">अंधविश्वास की बेड़ियों को,<br />
आज हमें है तोड़ना,<br />
झूठे भ्रम और झूठी बातों से,<br />
नाता अपना छोड़ना।</p>
<p dir="ltr">शिक्षा केवल डिग्री नहीं है,<br />
जीवन की पहचान,<br />
सही-गलत को समझ सके जो,<br />
वही सच्चा इंसान।</p>
<p dir="ltr">नारी का सम्मान हो हर घर में,<br />
बेटी को मिले अधिकार,<br />
भेदभाव की दीवार गिराकर,<br />
बनाएँ सुंदर संसार।</p>
<p dir="ltr">जल, जंगल और धरती माँ को,<br />
हम सबको है बचाना,<br />
आने वाली पीढ़ियों के लिए,<br />
हरियाली को है सजाना।</p>
<p dir="ltr">जाति-धर्म के नाम पर लड़कर,<br />
कब तक होंगे दूर?<br />
प्रेम, सद्भाव और भाईचारे से,<br />
हर मन हो भरपूर।</p>
<p dir="ltr">सोशल मीडिया की चमक में,<br />
सच को मत खो देना,<br />
सोच-समझकर बात स्वीकारो,<br />
हर बात पर मत रोना।</p>
<p dir="ltr">जागृति की एक किरण ही,<br />
अंधियारा हर सकती है,<br />
एक जागा हुआ इंसान भी,<br />
दुनिया बदल सकता है।</p>
<p dir="ltr">आओ मिलकर शपथ ये लें—<br />
नहीं रहेंगे अनजान,<br />
जागरूक बनेंगे, जागरूक करेंगे,<br />
यही बने हमारी पहचान।</p>
<p dir="ltr">जागो, अब जागो,<br />
समय पुकार रहा है,<br />
तुम्हारे जागने से ही<br />
नया सवेरा आ रहा है।</p>
<h1 dir="ltr"><b>प्रदूषण का कहर</b></h1>
<p dir="ltr">हवा हुई है ज़हर आज,<br />
धुआँ उगलते कारखाने,<br />
साँसों पर पहरा बैठा है,<br />
कहाँ गए वो दिन सुहाने?</p>
<p dir="ltr">नदियाँ मैली, तालाब सूखे,<br />
कचरे से भरती धार,<br />
धरती माँ की चीख सुनो अब,<br />
बढ़ता जाता अत्याचार।</p>
<p dir="ltr">पेड़ कटे तो छाँव भी रूठी,<br />
पंछी छोड़ गए बसेरा,<br />
कंक्रीट के इस जंगल में,<br />
कहाँ मिलेगा नीला सवेरा?</p>
<p dir="ltr">धुआँ, धूल और शोर ने मिलकर,<br />
जीना किया मुहाल,<br />
प्रकृति से जो खिलवाड़ किया,<br />
भुगत रहा इंसान आज।</p>
<p dir="ltr">बच्चों की साँसें पूछ रही हैं—<br />
किसका है यह दोष?<br />
हमने ही तो जहर घोला है,<br />
हवा, नदी और मिट्टी में रोज।</p>
<p dir="ltr">अब भी वक्त है, चेतो मानव,<br />
मत करना प्रकृति का नाश,<br />
पेड़ लगाओ, जल बचाओ,<br />
स्वच्छ रखो अपना आकाश।</p>
<p dir="ltr">कम करो कचरा, रोक प्रदूषण,<br />
धरती को दो नया जीवन,<br />
आज बचाएँ पर्यावरण को,<br />
कल मुस्काएगा हर जन।</p>
<p dir="ltr">प्रकृति हमारी माँ है प्यारी,<br />
इसका मत अपमान करो,<br />
स्वच्छ हवा और निर्मल जल से,<br />
आने वाला कल खुशहाल करो।</p>
<p dir="ltr">जागो मानव, समय पुकारे,<br />
अब तो अपनी भूल सुधार,<br />
वरना आने वाली पीढ़ियाँ<br />
पूछेंगी—क्यों किया प्रकृति पर वार?</p>
<h1 dir="ltr">बिल</h1>
<p dir="ltr">हर माह आता है बिल—<br />
पानी का,<br />
बिजली का,<br />
अख़बार का,<br />
और भी न जाने किस-किस का&#8230;</p>
<p dir="ltr">पर नहीं आता कोई बिल<br />
एक स्त्री के त्याग का,<br />
रसोई में बिताए कई घंटों का,<br />
परिवार को दिए उसके समर्पण का।</p>
<p dir="ltr">सुबह से शाम तक थककर<br />
कितना चूर हुई,<br />
इसका भी कोई बिल नहीं आता।</p>
<p dir="ltr">काश! ऐसा होता—<br />
उसकी मेहनत का भी बिल आता,<br />
उसकी चुप्पी का भी बिल आता,<br />
उसके त्याग की भी कोई कीमत होती,<br />
कुछ वजूद उसका भी होता।</p>
<p dir="ltr">होकर भी वह<br />
परिवार की धुरी,<br />
अदृश्य ही सदैव बनी रहती है।</p>
<p dir="ltr">टूटकर खुद,<br />
फिर भी खड़ी रहती है&#8230;<br />
सबको सँभालती है,<br />
और अपने हिस्से का दर्द<br />
चुपचाप सहती रहती है।</p>
<figure id="attachment_9374" aria-describedby="caption-attachment-9374" style="width: 225px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-9374" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-225x300.jpg 225w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-768x1024.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-1152x1536.jpg 1152w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-1536x2048.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260210-WA0064-scaled.jpg 1920w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /><figcaption id="caption-attachment-9374" class="wp-caption-text">सुनीता मीना</figcaption></figure>
<p dir="ltr">सुनिता मीना<br />
उपप्राचार्य और स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन<br />
सवाई माधोपुर महिला प्रकोष्ठ (राज.)</p>
<p dir="ltr">प्रस्तुति</p>
<figure id="attachment_9836-2" aria-describedby="caption-attachment-9836-2" style="width: 212px" class="wp-caption alignnone"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-9836" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg" alt="" width="212" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg 212w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit.jpg 565w" sizes="(max-width: 212px) 100vw, 212px" /><figcaption id="caption-attachment-9836-2" class="wp-caption-text">उलझन सुलझन</figcaption></figure>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लाल रंग</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/red-color/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 10:27:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[मां तो सभी रंगों में खिलती है पर मुझे लाल रंग विशेष पसंद है। जब नवरात्रि में माँ दुर्गा की लाल चुनरी देखते हैं, तो मन श्रद्धा से भर उठता&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_8443" aria-describedby="caption-attachment-8443" style="width: 300px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-8443" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260114-WA0040-300x214.jpg" alt="" width="300" height="214" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260114-WA0040-300x214.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260114-WA0040-1024x730.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260114-WA0040-768x548.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260114-WA0040.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-8443" class="wp-caption-text">प्रमिला त्रिवेदी<br />स्थानीय संपादक, उलझन सुलझन, बेंगलुरु महिला प्रकोष्ठ</figcaption></figure>
<p>मां तो सभी रंगों में खिलती है पर मुझे लाल रंग विशेष पसंद है।</p>
<p>जब नवरात्रि में माँ दुर्गा की लाल चुनरी देखते हैं, तो मन श्रद्धा से भर उठता है। माँ का यह लाल रूप हमें उनकी शक्ति, ममता और निर्भयता का स्मरण कराता है। भक्त अपने मन की इच्छाएँ लेकर माँ के दरबार में आते हैं और विश्वास के साथ अपनी झोली उनकी कृपा के आगे फैला देते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>माँ की लाल चुनरी केवल एक वस्त्र नहीं, भक्त की आस्था का सुंदर प्रतीक है। उसमें किसी को अपनी माँ की ममता दिखाई देती है, किसी को संकटों से लड़ने का साहस मिलता है, तो किसी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुझे भी लाल रंग बहुत प्रिय है। इस रंग में एक अपनापन महसूस होता है। माँ की लाल चुनरी जब लहराती है, तो लगता है जैसे उसमें भक्ति की लहरें उठ रही हों। मंदिर में बजती घंटियाँ, जलते हुए दीपक, गूँजते हुए जयकारे और माँ के चरणों में चढ़े लाल पुष्प—ये सभी मिलकर मन को एक अद्भुत शांति प्रदान करते हैं।</p>
<p>लेकिन माँ की सच्ची भक्ति केवल चुनरी चढ़ाने या पूजा करने तक सीमित नहीं है। यदि हम किसी दुखी व्यक्ति को सहारा दें, किसी जरूरतमंद की सहायता करें, किसी स्त्री का सम्मान करें और अपने मन में करुणा बनाए रखें, तो यही हमारी भक्ति का वास्तविक रूप है।</p>
<p>माँ दुर्गा हमें सिखाती हैं कि शक्ति का अर्थ किसी को हराना नहीं, बल्कि अन्याय के सामने डटकर खड़े होना है। प्रेम का अर्थ केवल अपने लोगों को चाहना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख को समझना भी है।</p>
<p>लेकिन माँ की सच्ची भक्ति केवल चुनरी चढ़ाने या पूजा करने तक सीमित नहीं है। यदि हम किसी दुखी व्यक्ति को सहारा दें, किसी जरूरतमंद की सहायता करें, किसी स्त्री का सम्मान करें और अपने मन में करुणा बनाए रखें, तो यही हमारी भक्ति का वास्तविक रूप है।</p>
<p>माँ दुर्गा हमें सिखाती हैं कि शक्ति का अर्थ किसी को हराना नहीं, बल्कि अन्याय के सामने डटकर खड़े होना है। प्रेम का अर्थ केवल अपने लोगों को चाहना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख को समझना भी है।</p>
<p>आइए, इस नवरात्रि माँ की लाल चुनरी के साथ अपने मन में भी प्रेम, साहस, दया और विश्वास के रंग भरें। अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करें और ऐसा जीवन जिएँ, जिसमें हमारे व्यवहार से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सके।</p>
<p>क्योंकि माँ को अर्पित लाल चुनरी तभी सार्थक होगी, जब हमारे हृदय में भी माँ के गुणों के रंग खिलेंगे।</p>
<p>🙏 माँ की कृपा सब पर बनी रहे। हर घर में सुख, शांति और प्रेम का दीप जले।</p>
<p>जय माता दी!</p>
<p>प्रमिला त्रिवेदी</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सम्मान</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/honour-9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:11:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://uljhansuljhan.in/?p=11243</guid>

					<description><![CDATA[सम्मान हर्षा ठक्कर ‘हिना’ की रचना का मूल भाव अत्यंत स्पष्ट है—सम्मान की वास्तविक गरिमा, पात्रता और चयन की निष्पक्षता। इसमें कोई बड़ा असंगत अंश नहीं है, लेकिन स्व-नामांकन के&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सम्मान</strong></h1>
<p>हर्षा ठक्कर ‘हिना’ की रचना का मूल भाव अत्यंत स्पष्ट है—सम्मान की वास्तविक गरिमा, पात्रता और चयन की निष्पक्षता। इसमें कोई बड़ा असंगत अंश नहीं है, लेकिन स्व-नामांकन के पक्ष और उसके संभावित प्रभाव से जुड़े विचारों में कुछ पुनरावृत्ति थी। उसे समेटकर प्रवाह को अधिक सहज और चिंतनपरक बनाया जा सकता है।</p>
<p>सम्मान की तलाश</p>
<p>एक छोटा-सा विचार मन में आया—कभी सम्मान पाने वाले व्यक्ति को यह बताने की आवश्यकता नहीं होती थी कि “मैं इस सम्मान के योग्य हूँ।” उसके कार्य, प्रतिभा और समाज में योगदान को देखकर सम्मान देने वाले स्वयं उसे खोजते थे। सम्मान की गरिमा शायद इसी में थी कि पात्रता का निर्णय व्यक्ति स्वयं नहीं, बल्कि उसके कार्यों को देखकर दूसरे करते थे।</p>
<p>आज समय बदल गया है। अनेक संस्थाओं में सम्मान के लिए स्वयं नामांकन करना पड़ता है। व्यक्ति को अपने कार्यों और उपलब्धियों का विवरण देना होता है और कभी-कभी यह भी बताना पड़ता है कि वह सम्मान का पात्र क्यों है।</p>
<p>इसके पीछे एक व्यावहारिक पक्ष भी है। हर योग्य व्यक्ति को पहचानने वाले लोग हों, यह आवश्यक नहीं। अनेक प्रतिभाएँ अपने सीमित दायरे में निरंतर काम करती रहती हैं और स्वयं आगे न आएँ तो संभव है कि उनका योगदान व्यापक स्तर पर सामने ही न आ पाए। ऐसे में स्व-नामांकन को अवसर का माध्यम माना जा सकता है, अहंकार का नहीं।</p>
<p>फिर भी विचारणीय प्रश्न यह है कि जब सम्मान पाने की इच्छा, सम्मान के पीछे की साधना से बड़ी हो जाए, तो सम्मान की गरिमा कहीं कमजोर तो नहीं पड़ने लगती? अपनी उपलब्धियों को प्रस्तुत करना अनुचित नहीं, लेकिन स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की होड़ सम्मान के मूल उद्देश्य पर प्रश्न अवश्य खड़े कर सकती है।</p>
<p>इसलिए शायद प्रश्न स्व-नामांकन या पर-नामांकन का नहीं, बल्कि चयन की पारदर्शिता, पात्रता के निष्पक्ष आकलन और सम्मान के उद्देश्य का है।</p>
<p>क्योंकि सच्चा सम्मान केवल वह नहीं, जिसके लिए व्यक्ति स्वयं दरवाज़ा खटखटाए; सच्चा सम्मान तो वह है, जहाँ उसके कर्मों की दस्तक सुनकर सम्मान स्वयं उसके द्वार तक पहुँच जाए।</p>
<p>रचनाकार</p>
<p>हर्षा ठक्कर ‘हिना’</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाषण प्रतियोगिता</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/bhashan-competition/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 04:07:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8216;शहीद-ए-आज़म&#8217; भगत सिंह जयंती के अवसर पर भाषण प्रतियोगिता दिनांक 28 सितंबर 2026 को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>&#8216;<strong>शहीद-ए-आज़म&#8217; भगत सिंह जयंती के अवसर पर भाषण प्रतियोगिता</strong></h1>
<p>दिनांक 28 सितंबर 2026 को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद द्वारा भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में NSS स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को भगत सिंह जी के साहस, त्याग, देशभक्ति एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करना था। प्रतिभागियों ने अपने भाषणों के माध्यम से भगत सिंह जी के जीवन, विचारों एवं देश के लिए उनके योगदान को प्रस्तुत किया। प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों में मीनाक्षी, अमन सिंघानिया, टिंकू यादव, अनिकेत, हिमांशी गौतम और राधा सिंह प्रमुख थे।</p>
<p>कार्यक्रम में NSS के चारों यूनिट के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गंगवार , डॉ. रीतेश यादव, डॉ. सीमा रानी , डॉ. शिवम गुप्ता तथा महाविद्यालय के अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे ।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी को श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा उनके आदर्शों और देशभक्ति की भावना से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।</p>
<p>झलकियाँ</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-11361" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-169x300.jpg" alt="" width="169" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-169x300.jpg 169w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-576x1024.jpg 576w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-768x1365.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-864x1536.jpg 864w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-1152x2048.jpg 1152w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0135-scaled.jpg 1440w" sizes="auto, (max-width: 169px) 100vw, 169px" /></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-11362" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-300x181.jpg" alt="" width="300" height="181" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-300x181.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-1024x619.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-768x464.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-1536x928.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260928-WA0136-2048x1238.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>सूचना स्रोत</p>
<figure id="attachment_6127" aria-describedby="caption-attachment-6127" style="width: 300px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-6127" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250828-WA0023-1-300x234.jpg" alt="" width="300" height="234" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250828-WA0023-1-300x234.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250828-WA0023-1-1024x799.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250828-WA0023-1-768x599.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250828-WA0023-1.jpg 1118w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-6127" class="wp-caption-text">प्रो. (डॉ) राकेश राणा जी</figcaption></figure>
<p>प्रस्तुति</p>
<figure id="attachment_9836-3" aria-describedby="caption-attachment-9836-3" style="width: 212px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-9836" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg" alt="" width="212" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg 212w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit.jpg 565w" sizes="auto, (max-width: 212px) 100vw, 212px" /><figcaption id="caption-attachment-9836-3" class="wp-caption-text">उलझन सुलझन</figcaption></figure>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्तुति</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/prayer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Oct 2026 06:56:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[नवदुर्गा नवदुर्गा के नौ रूपों से और एक नारी का जीवन चक्र का प्रतिबिम्बं झलकता है। नारी जब जन्म लेती है तो                 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>नवदुर्गा</strong></h1>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-11446" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008-169x300.jpg" alt="" width="169" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008-169x300.jpg 169w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008-575x1024.jpg 575w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008-768x1367.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008-863x1536.jpg 863w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/10/IMG-20261013-WA0008.jpg 899w" sizes="auto, (max-width: 169px) 100vw, 169px" /></p>
<p>नवदुर्गा के नौ रूपों से और<br />
एक नारी का जीवन चक्र का<br />
प्रतिबिम्बं झलकता है।<br />
नारी जब जन्म लेती है तो                                      शैलपुत्री का रूप होती है।</p>
<p>कुमारी का है तो वह बृह्मचारिणी का रूप होती है।<br />
किशोरी अवस्था में है तो वह<br />
चद्रघंटा का रूप होती है।<br />
नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करती है तो कुष्मांडा का रूप होती है।<br />
संतान को जन्म देने के बाद में वह<br />
स्कंदमाता का रूप होती है।<br />
संयम को धारण करने वाली<br />
कात्यायनी का रूप होती है।<br />
अपने स्कल्प से अपने परिवार की रक्षा करने वाली<br />
कालरात्रि का रूप होती है।<br />
अपने परिवार को ही अपना सर्वस्व मानने वाली<br />
महागौरी का रूप है।<br />
अपनी संतान को रिद्धि सिद्धि का आशीर्वाद देने वाली सिद्धीदात्री का रूप होती है।<br />
और ऐसे सारी सृष्टि में व्याप्त है मां दुर्गा की शक्ति</p>
<p>जय माता रानी की।<br />
प्रमिला त्रिवेदी ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिखावे के इस दौर में</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/dikhave-ke-is-daur-mein/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 20:37:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[दिखावे के इस दौर में चेहरों पर मुस्कान बहुत है, पर मन में सन्नाटा है, रिश्तों की भीड़ खड़ी है फिर भी, कौन किसके साथ निभाता है? &#160; बातों में&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>दिखावे के इस दौर में</strong></h1>
<p>चेहरों पर मुस्कान बहुत है,</p>
<p>पर मन में सन्नाटा है,</p>
<p>रिश्तों की भीड़ खड़ी है फिर भी,</p>
<p>कौन किसके साथ निभाता है?</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बातों में अपनापन बहुत है,</p>
<p>व्यवहारों में दूरी है,</p>
<p>हर कोई अच्छा दिखना चाहे,</p>
<p>पर! भीतर कितनी मजबूरी है?</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आज यहाँ संवेदनाएँ भी,</p>
<p>कभी-कभी प्रदर्शन बन जाती हैं,</p>
<p>आँखें नम हों या मन टूटे,</p>
<p>तस्वीरें फिर भी मुस्काती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कुछ रिश्ते बस नाम के हैं,</p>
<p>कुछ रिश्ते मतलब से चलते हैं,</p>
<p>सच कह दो तो लोग बदलते,</p>
<p>मीठे झूठ पर हाथ मिलते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मैंने भी यह दुनिया देखी है,</p>
<p>चुप रहकर बहुत कुछ जाना है,</p>
<p>हर चमक सोना नहीं होती,</p>
<p>हर अपना अपना नहीं होता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अब दिखावे से दूर खड़ी हूँ,</p>
<p>मन को सच के पास रखती हूँ,</p>
<p>कम लोगों से रिश्ता रखकर,</p>
<p>दिल में सच्ची आस रखती हूँ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुझे भीड़ नहीं चाहिए अब,</p>
<p>बस दो दिल सच्चे मिल जाएँ,</p>
<p>बिना कहे जो दर्द समझें,</p>
<p>बिना दिखावे साथ निभाएँ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>क्योंकि जीवन छोटा-सा सफर है,</p>
<p>किस बात का इतना दिखावा?</p>
<p>अंत में साथ वही रह जाता,</p>
<p>जिसने सच में हाथ बढ़ाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>चेहरा नहीं, चरित्र बोलें,</p>
<p>रिश्ते नहीं, संवेदना तौले—</p>
<p>काश इस दिखावे की दुनिया में,</p>
<p>हम फिर से इंसान बनें थोड़े।</p>
<p>सृजक</p>
<figure id="attachment_10977" aria-describedby="caption-attachment-10977" style="width: 300px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-10977" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012-300x200.jpg 300w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012-1024x682.jpg 1024w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012-768x512.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012-1536x1023.jpg 1536w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260908-WA0012.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-10977" class="wp-caption-text">सरोज प्रसाद राय<br />उलझन सुलझन, स्थानीय संपादिका<br />जयपुर महिला प्रकोष्ठ</figcaption></figure>
<p>प्रस्तुति</p>
<figure id="attachment_9836-4" aria-describedby="caption-attachment-9836-4" style="width: 212px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-9836" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg" alt="" width="212" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg 212w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit.jpg 565w" sizes="auto, (max-width: 212px) 100vw, 212px" /><figcaption id="caption-attachment-9836-4" class="wp-caption-text">उलझन सुलझन</figcaption></figure>
<p>सरोज प्रसाद राय</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>फूल वालों की सैर</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/phool-walon-kee-sair/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2026 15:12:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Inspiration]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://uljhansuljhan.in/?p=11146</guid>

					<description><![CDATA[फूल वालों की सैर (तहजीब और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक) यह एक वार्षिक उत्सव है जो दिल्ली में मनाया जाता है और हिंदू-मुस्लिम समुदाय मिलकर फूलों की चादर और पंखे&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>फूल वालों की सैर</h1>
<h2>(तहजीब और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक)</h2>
<p>यह एक वार्षिक उत्सव है जो दिल्ली में मनाया जाता है और हिंदू-मुस्लिम समुदाय मिलकर फूलों की चादर और पंखे अर्पित करते हैं! यह उत्सव महरौली क्षेत्र में मनाया जाता है.<br />
इसकी अवधि तकरीबन एक सप्ताह की होती है.<br />
मुख्य गतिविधि &#8211; हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर फूलों की चादर और पंखे चढ़ाते हैं.<br />
विशेषता &#8211; यह उत्सव दिल्ली की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है. इस दौरान रंगारंग झांकियां, कव्वालियां, लोक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं.<br />
भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल जिनकी लोकप्रियता कम हो गई है बहुत लोगों को तो उसका नाम भी नहीं मालूम.<br />
फूल वालों की सैर का महत्व सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के मूल में देखा जा सकता है जो उसे बढ़ावा देता है. भारत के धार्मिक संस्कृतियों का मिश्रण है और अपनी आध्यात्मिकता और मान्यताओं के लिए जाना जाता है.<br />
यह त्यौहार सिराज़-उद दीन ज़फर के शासनकाल के दौरान अपने चरम पर पहुंच गया था, जिसे अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के नाम से जाना जाता है. उनके शासन काल में 1857 में भी फूल वालों की सैर मनाने गए थे जब दिल्ली अंग्रेजों की घेराबंदी में थी. यह मुगलों के<br />
अंतिम फूल वालों की सैर थी.<br />
यह त्यौहार सांप्रदायिक भावना का छिपा हुआ रत्न<br />
फूल वालों की सैर है.<br />
ऐसा मानना है कुतुब मीनार के पास योगमाया का मंदिर है जिसे हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है और वहाँ पर फूलों के पंखे चढ़ाए जाते हैं. कुतुबुद्दीन अख्तियार काकी की दरगाह पर फूलों की चादर और पंखे चढ़ाए जाते हैं.<br />
ऐसे त्योहारों को भी बढ़ावा देना चाहिए जो हमारे देश की आपसी सद्भाव प्रेम को बढ़ावा दे.</p>
<p>रचनाकार</p>
<p>गीता ठाकुर</p>
<p>स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन</p>
<p>दिल्ली महिला प्रकोष्ठ</p>
<p>प्रस्तुति</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षण में नवाचार</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/shikshan-mein-navachaar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 00:04:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://uljhansuljhan.in/?p=10321</guid>

					<description><![CDATA[शिक्षण में नवाचार आज दिनांक 26.06.2026, दिन शुक्रवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला ‘‘शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1>शिक्षण में नवाचार</h1>
<p>आज दिनांक 26.06.2026, दिन शुक्रवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला ‘‘शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान से संवर्धन’’ विषय पर आयोजित की गयी। कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. प्रेरणा मित्तल, प्रधानाचार्या, श्रीराम कॉलेज, मु.नगर, टेªनर रितु कश्यप, डॉ. अनिल कश्यप योगी, अंकित चौधरी, पंकज धीमान, विकास भार्गव, रीटा दहिया और प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।<br />
डॉ. प्रेरणा मित्तल ने बताया कि</p>
<p>&#8220;शिक्षा में नवाचार वो तकनीक है जिससे शिक्षक अपनी बात को नये आयामों के माध्यम से बच्चों को समझाते है, नवाचार वह है, जो किसी भी माध्यम से नये विचारों के साथ नये साधनों का प्रयोग करते है। गुरूकुल प्रणाली केवल गुरू पर निर्भर करती थी लेकिन समय बदलने के साथ आज ये तकनीक बदल चुकी है।<br />
बच्चे की समझने की शक्ति अलग-अलग होती है, जब भी हम किसी भी विषय की शुरूआत करते है तो हम बेसिक से शुरू करते है। आप बच्चों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक साधनों का प्रयोग किया जाता है।&#8221;<br />
रीतु कश्यप ने बताया कि</p>
<p>&#8220;डॉ.मारिया मॉन्टेसरी के अनुसार मॉन्टेसरी शिक्षा बाल केन्द्रित शिक्षण पद्धति है जिससे बच्चों को उसकी रुचि, क्षमता और विकास की गति के अनुसार स्वतंत्र वातावरण में स्वयं अनुभव करके सीखने का अवसर दिया जाता है। शिक्षक का कार्य केवल मार्गदर्शन करना होता है। हमें बच्चों की स्वभाविक सीखने की प्रक्रिया को समझना होगा। एक श्रेष्ठ शिक्षक को विद्यार्थियों का मार्गदर्शक, संवेदनशील, रचनात्मक एवं धैर्यवान होना चाहिए।<br />
बच्चे अपनी कक्षा में शिक्षकों के साथ खुशी की अनुभूति करें न कि किसी डर या भय के साथ वे कक्षा में बैठे रहें। शिक्षकों को कक्षा का खुशनुमा माहौल बनाना चाहिए, क्योंकि खुशनुमा माहौल में ही बच्चे सीखते है और शिक्षक से कनेक्ट होते है। बच्चों को छोटे-छोटे सूक्ष्म कार्य जैसे- शर्ट के बटन बंद करना या खोलना, जूतों की फीते बांधना आदि सिखाने चाहिए।<br />
शिक्षक को अक्षरों एवं इंग्लिश लैटर के उच्चारण सही बोलना बच्चों को सिखाना चाहिए, जिससे बच्चों के शब्दों व वाक्यों के उच्चारण भी सही होगें।&#8221;<br />
कार्यशाला में डॉ. अनिल योगी ने बताया कि</p>
<p>&#8220;प्रत्येक विद्यार्थी के सीखने, रूचि, व्यक्तित्व और भावात्मक आवश्यकताएं अलग-अलग होती है। एक प्रभावी शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों के मनोविज्ञान को समझते हुए उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को विकसित करें।<br />
शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण, सकारात्मक अनुशासन, प्रभावी संप्रेेषण, प्रेरणा, भावात्मक संतुलन तथा कक्षा प्रबन्धक की आधुनिक तकनीकों से युक्त होना होगा।&#8221;<br />
उन्होंने कहा कि</p>
<p>&#8220;विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी तनावमुक्त एवं प्रसन्नतायुक्त होकर कक्षा में जाना चाहिए, क्योंकि यदि शिक्षक प्रसन्नचित रहेगा तो कक्षा का माहौल भी प्रसन्नचित होगा और ऐसे माहौल में विद्यार्थी सरलता से सीखते हैं।&#8221;<br />
अंत में प्रथम दिन के समापन पर प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया ने सभी अतिथियों एवं टेªनर का आभार व्यक्त किया और कहा कि</p>
<p>&#8220;एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचार नहीं करता बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करता है, नवाचार एवं मनोविज्ञान का ज्ञान शिक्षक को प्रत्येक बच्चें की क्षमता पहचाने और उसे सही दिशा देने में सक्षम बनाता है।&#8221;</p>
<h2></h2>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>काव्य रचना</title>
		<link>https://uljhansuljhan.in/poetry/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[UljhanSuljhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 12:40:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[🌸 छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल 🌸 मुखड़ा छोटी-छोटी गलियाँ, छोटे-छोटे गाँव, माखन की खुशबू, महके हर द्वार। छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल, ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>🌸 छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल 🌸</strong></h1>
<h5><strong>मुखड़ा<br />
छोटी-छोटी गलियाँ, छोटे-छोटे गाँव,<br />
माखन की खुशबू, महके हर द्वार।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।<br />
अंतरा 1<br />
छोटे-छोटे कदमों से चलता जाए,<br />
पायल बाजे छन-छन-छन।<br />
नन्हीं-सी मुसकान लिए कान्हा,<br />
मोहे लागे मनभावन।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।<br />
अंतरा 2<br />
छोटे-छोटे पेड़ों पे छोटे फूल,<br />
फूल महकें दिन और रात।<br />
फूलों जैसी हँसी हँसे कान्हा,<br />
मन में बस जाए बात।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।<br />
अंतरा 3<br />
माखन लेकर कान्हा भागे,<br />
पीछे भागे मैया।<br />
हँसता जाए, मुसकाता जाए,<br />
नटखट मेरो कन्हैया।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।<br />
अंतरा 4<br />
बंसी बाजे धीरे-धीरे,<br />
सुन ले सारा गाँव।<br />
कान्हा की धुन सुनते ही,<br />
नाचे मन हर बार।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।<br />
अंतरा 5<br />
माथे मोर मुकुट सोहे,<br />
गले में सुंदर हार।<br />
नन्हे-नन्हे चरणों वाले,<br />
मोहे लागे प्यार।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल। 💙<br />
अंत में:<br />
छोटी-छोटी गलियाँ, छोटे-छोटे गाँव,<br />
माखन की खुशबू, महके हर द्वार।<br />
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,<br />
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।</strong></h5>
<p>रचनाकार</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-10934" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260801-WA0002-200x300.jpg" alt="" width="200" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260801-WA0002-200x300.jpg 200w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260801-WA0002-683x1024.jpg 683w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260801-WA0002-768x1152.jpg 768w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/09/IMG-20260801-WA0002.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 200px) 100vw, 200px" /></p>
<p>प्रस्तुति</p>
<figure id="attachment_9836-5" aria-describedby="caption-attachment-9836-5" style="width: 212px" class="wp-caption alignnone"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-9836" src="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg" alt="" width="212" height="300" srcset="https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit-212x300.jpg 212w, https://uljhansuljhan.in/wp-content/uploads/2026/05/Screenshot_2026-04-16-06-23-26-077_com.android.chrome-edit.jpg 565w" sizes="auto, (max-width: 212px) 100vw, 212px" /><figcaption id="caption-attachment-9836-5" class="wp-caption-text">उलझन सुलझन</figcaption></figure>
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