गुर्जर समाज की पाँच होनहार महिलाओं – निर्मल डेढ़ा, अन्नू भड़ाना, नीतू श्यामदेव भड़ाना, डॉ. निकिता नागर एव वंदना तोंगड़ – ने अपने जीवन के संघर्षों और सफलताओं से यह सीखा कि यदि महिलाएँ संगठित होकर कार्य करें, तो वे न केवल खुद को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी ला सकती हैं।
ये पाँचों अलग-अलग क्षेत्रों में कामयाब थीं – कोई शिक्षा के क्षेत्र में, कोई सामाजिक कार्य में, तो कोई स्वास्थ्य और पर्यावरण सुधार के लिए काम कर रही थी। लेकिन इनके दिलों में एक ही आग थी –
समाज की हर महिला को जागरूक और सशक्त बनाना।
संघर्ष से संकल्प तक
इन पाँचों ने अपने-अपने जीवन में कई मुश्किलें देखीं। कभी समाज की बंदिशों का सामना किया, तो कभी अवसरों की कमी ने इनके रास्ते रोके। लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। अपने आत्मविश्वास, मेहनत और साहस के बल पर इन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। एक दिन, जब ये पाँचों एक कार्यक्रम में मिलीं, तो इन्होंने महसूस किया कि समाज में कई ऐसी महिलाएँ हैं, जिनके पास हौसला तो है, लेकिन सही दिशा नहीं।
“अगर हमें आगे बढ़ने में इतनी मुश्किलें आई हैं, तो सोचो, उन महिलाओं का क्या होता होगा, जो अकेली हैं, जिनके पास मार्गदर्शन नहीं है?” निर्मल डेढ़ा ने कहा।
नीतू श्यामदेव भड़ाना ने सहमति जताते हुए कहा, “हमें कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे हर महिला को प्रेरणा मिले और वह खुद को सक्षम महसूस करे।”
‘एम्पावर्ड गुजरिया’ की उत्पत्ति
बस, यहीं से एक नए सफर की शुरुआत हुई। इन पाँचों ने मिलकर एक समूह बनाया – ‘एम्पावर्ड गुजरिया’, जिसका उद्देश्य था महिलाओं को पहचानना, उनसे संवाद करना और उन्हें प्रेरित करना कि वे बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए कुछ उल्लेखनीय करें।
कार्यक्रम और पहल
इस समूह ने समाज में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए।
प्रेरणादायक वार्ताएँ
उन महिलाओं की कहानियाँ सामने लाना, जिन्होंने कठिनाइयों का सामना कर सफलता प्राप्त की।
स्वरोज़गार और आत्मनिर्भरता कार्यशालाएँ
महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बेकिंग, डिजिटल मार्केटिंग जैसे कौशल सिखाना।
शिक्षा और साक्षरता अभियान
उन महिलाओं को शिक्षित करना, जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा।
स्वास्थ्य और स्वच्छता कार्यक्रम
महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी जानकारी देना।
पर्यावरण और समाज सेवा
वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और अन्य सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना।
समाज पर प्रभाव
धीरे-धीरे इस पहल का असर दिखने लगा। जिन महिलाओं को कभी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी, वे अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही थीं। कोई अपना छोटा व्यवसाय चला रही थी, तो कोई सामाजिक कार्यों में भाग ले रही थी। महिलाएँ आत्मनिर्भर हो रही थीं, आत्मविश्वास से भर रही थीं, और सबसे बड़ी बात – वे अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही थीं।
सभी समुदायों की महिलाओं तक विस्तार
‘एम्पावर्ड गुजरिया’ की सफलता ने केवल गुर्जर समाज की महिलाओं को, बल्कि अन्य समुदायों की महिलाओं को भी प्रेरित किया। अब अन्य समुदायों की महिलाएँ भी इसी तरह के समूह बना रही थीं, ताकि वे अपने समाज के लिए कुछ कर सकें।
निर्मल डेढ़ा, अन्नू भड़ाना,नीतू श्यामदेव भड़ाना,डॉ निकिता नागर एव वंदना तोंगड़ ने सिर्फ अपनी कहानियाँ नहीं लिखीं, बल्कि समाज की लाखों महिलाओं के लिए एक नई राह भी बनाई। ‘एम्पावर्ड गुजरिया’ सिर्फ एक समूह नहीं, बल्कि एक क्रांति थी – महिलाओं को उनके अधिकार, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की शक्ति दिलाने की क्रांति।
आज भी यह पहल निरंतर आगे बढ़ रही है, और हर महिला को यह संदेश दे रही है –
“तुम्हारी शक्ति अनंत है, बस तुम्हें उसे पहचानने की जरूरत है!”
सूचना स्रोत
नीतू श्यामदेव भड़ाना जी के द्वारा साझा सूचना का चैट जीपीटी की सहायता से किया गया विस्तार।
विशेष आभार
ज्योति भड़ाना
प्रस्तुति