कविता

🌹 ऐ जिन्दगी 🌹 ढूँढती हैं, जिसे मेरी आंखें। ऐ जिन्दगी मै तेरे, आईने में खुद को ही तलाशती हूँ, रोज नयी ख्वाहिशें बुनकर मैं सपने तलाशती हूँ ढूँढती हैं…
आत्मकथ्य

आत्मकथ्य

आत्मकथ्य डॉ. अशोक कुमार चौधरी अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जनपदीय इकाई द्वारा आयोजित ‘संघ साहित्य एवं राष्ट्रभाषा’ विषयक विचार गोष्ठी में सम्मानित होना मेरे लिए केवल व्यक्तिगत गौरव का…
आत्मबल

आत्मबल

।।आत्मबल।। तू कर तन्हा मुझे मैं खुद से बतियाऊँगी तू भर आँखों में उदासी की शाम का धुंधलका मैं होंठों पे मुस्कान का सूरज उगाऊँगी तू लगा पैरों में बदिंशों…
मेरे कान्हा

मेरे कान्हा

मेरे कान्हा कुछ पंक्तियां, कान्हा के लिए। मोर मुकुट मुरलीधर की मनभावन, मनमोहन की मधुर धुन मधुरम- मधुरम प्रीत शरण है प्रीत झरण है प्रीत ही यमुना घाट पलकों के…
प्रतिभाग का आत्मकथ्य

प्रतिभाग का आत्मकथ्य

आत्मकथ्य | श्री संजीव कुमार नागर प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, नूरनगर, लिसाड़ी मैं मानता हूँ कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज, संस्कृति और संस्कारों से…
श्योराज जी की ऊर्जामयी लेखनी

श्योराज जी की ऊर्जामयी लेखनी

भूमिका यह कविता पन्ना धाय के अद्वितीय त्याग और राजधर्म के प्रति उनकी निष्ठा को आल्हा छंद की वीर रसात्मक लय में प्रस्तुत करती है। कवि श्योराज जी बम्बेरवाल ‘सेवक’…
कविता

कविता

मौन मौन के भीतर की आवाज। मौन, वीराने में मन का मीत है, मौन, जीवन का सुगम संगीत है। मौन, मूक अभिव्यक्ति तुम्हारे आमंत्रण की, मौन, पत्रिका मेरे नेह निमन्त्रण…
कितना प्यारा है यह!

कितना प्यारा है यह!

भूमिका एक छोटा-सा प्रश्न आपके मन में आज भी कहीं बैठा होगा…क्या आपने कभी किसी पल में बिना सोचे, बिना रुके, बस दिल से निकलते हुए कहा था — “अरे……
खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज

खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज

खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का समागम नई दिल्ली। खेतिहर पशुपालक गुर्जर समाज के प्रबुद्ध नागरिकों एवं सजातीय प्रतिनिधियों का एक महत्वपूर्ण समागम नई दिल्ली में संपन्न हुआ।…
प्रस्ताव की संस्तुति

प्रस्ताव की संस्तुति

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नोएड़ा के तत्वावधान में 8 फरवरी शाम 3 बजे से प्रारंभ होने वाली एक वर्कशॉप Manthan for Mentors...talk on parenting, जो कि बच्चों के पालन पोषण…