पंचायत रा चुनाव (राजस्थानी हास्य एवं जागरूकता कविता) देखो पंचायता म सरपंच ही सरपंच खड़ा हो रिया छः, मोकला पीसा लगा र, गांव म सबस्यू बड़ा हो रिया छः, जो…
विशेष त्यौहारी सृजन माथे की बिंदी कुमकुम होठों की आभा रक्तिम उठती गिरती हुई पलकें घुंघराली काली लटें अलकें गालों की सिन्दूरी लाली कानों के झुमके बाली आँखों में सजता…
जिन्दगी।। तू कर तन्हा मुझे मैं खुद से बतियाऊँगी तू भर आँखों में उदासी की शाम का धुधँलका मैं होंठों पे मुस्कान का सूरज उगाऊँगी तू लगा पैरों में बदिंशों…
हिन्दी के प्रति उद्गार जन-जन की भाषा है हिन्दी हर मन की भाषा है हिन्दी मन के भाव प्रकट करने की सबसे सरल भाषा है हिन्दी... राज्य, केन्द्र सरकारी कामकाजी…