कविता

कविता

फ्रिज़ की कहानी आधा कटा खीरा, घीया, टमाटर, पड़े मुरझाए आपस में लिपटकर, हो गए बासी, कोई खाना न चाहे अब, जब थे ताज़े, तब चाहते थे हमें सब। रख…
कविता

कविता

जब मैं थी ही नहीं — 1980 से आज तक कभी मन करता है समय की घड़ी को उलटा घुमा दूँ, आज की चमकती स्क्रीन से निकलकर सन् 1980 की…
कविता

कविता

हिंदी बड़े भाग्य मानुष तन पाया, हिंदुस्तान में बसेरा भाया। पढ़कर हिंदी,लिखकर हिंदी, भाषा का है मान बढ़ाया। हिंदी को वट वृक्ष बनाया, चहुँ दिशा में है फैलाया। जड़ों को…
शब्दों की आत्मा 

शब्दों की आत्मा 

शब्दों की आत्मा शब्दों में उलझ गया यह मन, जो कहना था वह कह न सका। कुछ शब्द मिले, कुछ वाक्य बने, लेकिन भावों में बह न सका।   चुन-…
कविता

कविता

मुझे तो भगवान ने जन्म ही दिया है तुम ढूँढते रहो मंदिरों में भगवान, मैंने तो उन्हें अपने घर में देखा है, किसी पत्थर की मूर्ति में नहीं, माँ की…
कविता

कविता

उलझन से सुलझन मैं नाराज़ नहीं होती आजकल, बस कुछ दिनों तक खामोश हो जाती हूँ। क्योंकि जिन बातों को लोग कहकर भूल जाते हैं, उन्हीं बातों में मैं सालों…
काव्य मंच

काव्य मंच

सम्मानित मित्रो आज दिनांक 4.9.26 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के उपलक्ष मे साहित्य सोम संगम,सीतापुर(उ.प्र.)की दिल्ली राज्य ईकाई के द्वारा ई-कवि सम्मेलन का आयोजन सँस्थापक श्री सोमेश…
रक्षा बंधन

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन  रूठना-मनाना, हँसना-हँसाना, बीते लम्हे फिर लौट के आएँ। स्नेह की ये डोर कभी होती न लाचार है। धागों में बसी दुआ, आँखों में प्यार है॥   दूर सही…
शिव शंभू

शिव शंभू

शिव शंभू  शिव शंभू, बोलो शिव शंभू। बड़े हितकारी बड़े दयालु। नाम जपो, तुम नाम जपो। अलख निरंजन, सब दुःख भंजन। सब संकट को पार लिए। पीकर विष का विषम…