देश के युवाओं के नाम एक पत्र
(शिक्षक श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी एवं उनके गुरु स्वर्गीय श्री सत्यपाल जी की शिक्षाओं को स्मृति में रखकर।)
प्रिय युवाओ!
आशा है आप सभी स्वस्थ, प्रसन्न और उत्साह से भरपूर होंगे। आज मैं आप सभी से एक महत्वपूर्ण विषय पर बात करना चाहता हूँ—हमारी सोच, हमारे जीवन के मूल्य और हमारे चरित्र की शक्ति को लेकर। यह पत्र एक अद्भुत शिक्षक श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी को केंद्र में रखकर मैंने लिखा है, जिन्होंने अपने जीवन को समाज की बुराइयों से दूर रखते हुए सदैव सत्य और आदर्शों की राह अपनाई। उन्होंने अपने पूजनीय गुरु स्वर्गीय श्री सत्यपाल जी के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त की, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन छात्रों को सामाजिक बुराइयों से बचाने और उनके मन को मजबूत बनाने को तैयार करने में लगा दिया।
आप सब जानते हैं कि आज के युवा ही कल का भविष्य हैं। समाज, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की बागडोर आपके हाथों में है। लेकिन वर्तमान समय में जहाँ चारों ओर नकारात्मक प्रभाव, प्रलोभन और बुरी संगत का जाल फैला हुआ है, वहाँ सही राह पर चलना कठिन तो होता जा रहा है लेकिन नामुमकिन नहीं। ऐसे समय में, हमें श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी और उनके गुरु श्री सत्यपाल जी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि
“संयम, अनुशासन और सत्य की राह पर चलना न केवल संभव है, बल्कि अत्यंत संतोषप्रद और गौरवपूर्ण होने के साथ साथ लक्ष्यों को पाने के लिए निर्बाध भी है।”
आज समाज अनेक कुरीतियों से घिरा हुआ है जिनमें भ्रष्टाचार, मद्यपान, बेईमानी, और स्वार्थपरता विद्यमान हैं। कई युवा इन कुरीतियों में फँसकर अपना भविष्य नष्ट कर लेते हैं। लेकिन श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि जिस व्यक्ति का आत्मबल प्रबल हो और जिसका विश्वास सच्चाई में अडिग हो, वह किसी भी परिस्थिति में सही राह से नहीं भटक सकता और ऐसा ही प्रयास उनके गुरु श्री सत्यपाल जी ने किया था।
उनका मानना था कि मजबूत मन ही किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा हथियार है। इतना मजबूत कि वह किसी भी प्रलोभन का विरोध कर सके, किसी भी कुरीति के प्रभाव से बच सके और कठिन परिस्थितियों में भी सच्चाई का साथ दे सके। उनके गुरु श्री सत्यपाल जी ने उनमें यह गुण विकसित किया था और उन्होंने इसे अपने छात्रों तक पहुँचाया।
श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी का जीवन एक उज्ज्वल उदाहरण है कि कोई व्यक्ति किस प्रकार सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकता है। उन्होंने कभी भी बुरी संगति, बुरी आदतों या अनैतिक कार्यों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उनके गुरु ने उन्हें सिखाया था कि बुरी आदतें छोटी शुरुआत से जन्म लेती हैं, लेकिन धीरे-धीरे वे हमारे जीवन में बड़ा अवरोध बन जाती हैं।
युवाओं के पास असीम ऊर्जा और शक्ति होती है, लेकिन यदि इस ऊर्जा का गलत दिशा में प्रयोग किया जाए तो यह नष्ट हो जाती है। नशा, अनैतिकता, लालच और झूठ से सदैव बचें। हमेशा अच्छे लोगों की संगति में रहें, क्योंकि आपकी संगति ही आपके विचारों और कर्मों को निर्धारित करती है।
शिक्षा केवल किताबों को रटने या अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। सच्ची शिक्षा वह है जो हमें एक गरिमामयी, ईमानदार और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा दे। श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी केवल ज्ञान के समर्थक नहीं थे, बल्कि वे विवेक और नैतिकता को भी सर्वोपरि मानते थे। उन्होंने अपने गुरु श्री सत्यपाल जी से यह सीखा था कि एक सच्चा शिक्षित व्यक्ति वह होता है जो:
– अपने मन और इच्छाओं पर नियंत्रण रखता है।
– सच बोलने का साहस रखता है, चाहे परिस्थिति कितनी भी जटिल या विषम क्यों ना हो।
– बड़ों का सम्मान करता है और नैतिक मूल्यों का पालन करता है।
– सही और गलत का भेद स्पष्ट रूप से समझता है।
– अपने ज्ञान का उपयोग समाज के उत्थान के लिए करता है।
यदि हम इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो हम न केवल स्वयं को सशक्त बना सकते हैं, बल्कि अपने समाज को भी एक नई दिशा दे सकते हैं।
श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी केवल अपने व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे समाज के विकास को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते थे। वे हमेशा अपने छात्रों को सिखाते थे कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
आज हमारे देश को ईमानदार, नैतिक और निःस्वार्थ युवा नेताओं की आवश्यकता है। एक राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं के चरित्र पर निर्भर करता है। यदि युवा पीढ़ी भ्रष्टाचार, लोभ और स्वार्थ से मुक्त होकर अपने विकास के साथ-साथ समाज के कल्याण के लिए कार्य करे, तो हमारे देश को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
आप सभी के पास यह परिवर्तन लाने की शक्ति है। श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी और उनके गुरु श्री सत्यपाल जी के जीवन से प्रेरणा लें। सत्य की राह चुनें और हर चुनौती को आत्मबल से पार करें।
जीवन संघर्षों से भरा है, लेकिन हर संघर्ष आपके आत्मबल को परखने का एक अवसर भी है। यदि जीवन में कभी कठिनाइयाँ आएँ, तो घबराएँ नहीं। यदि कभी कोई गलती हो जाए, तो उससे सीखें और आगे बढ़ें। विफलताओं को अपनी पहचान न बनने दें, बल्कि अपनी दृढ़ता से यह सिद्ध करें कि आप हर कठिनाई से पार पा सकते हैं।
यदि आप कभी दुविधा में पड़ें, तो श्री ब्रह्मपाल सिंह नागर जी के मूल्यों को याद करें—सत्य, अनुशासन, आत्म-संयम और सेवा। यदि उन्होंने इन सिद्धांतों पर चलकर एक प्रेरणादायक जीवन जिया, तो आप भी ऐसा कर सकते हैं!
युवा ही भविष्य के निर्माता होते हैं। सुनिश्चित करें कि जो भविष्य आप रचें, वह सत्य की विजय, विवेक की प्रबलता और अच्छाई की श्रेष्ठता का प्रतीक बने।
मैं आप सभी से यह आग्रह करता हूँ कि आज और अभी यह संकल्प लें कि हम सदैव सत्य, ईमानदारी और नैतिकता की राह पर चलेंगे। समाज की बुराइयों से बचेंगे और अपने चरित्र को सशक्त बनाएँगे। यदि हम यह संकल्प लें और उस पर अडिग रहें, तो हम न केवल स्वयं को, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी एक नई ऊँचाई तक पहुँचा सकते हैं।
आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ,
एक शुभचिंतक जो आपकी क्षमताओं में अटूट विश्वास रखता है।
आपका अपना
राजीव