नई स्पर्धा की भूमिका
साथियो! सृष्टि में केवल अपनी सोचना और जग की सोचना चिंतनi के दो अलग अलग क्षेत्र हैं और डॉक्टर सूरज सिंह नेगी जी ने जग की सोचते हुए बेहद पवित्र भाव से राजस्थान भर में एक मुहिम को छेड़ा हुआ है जिसका केंद्र है ‘पाती’। इसमें विविध किस्म की ‘पाती’ सम्मिलित हैं। इस सिलसिले को नवीन आयाम देते हुए उन्होंने नई घोषणा की है जिसका विवरण इस प्रकार है –
पाती अपनों को….
मुहिम की एक और पाती
इस बार का विषय है
युवाओं के लिए पाती
किसी राष्ट्र का यदि भविष्य देखना है तो उसके युवाओं का वर्तमान देखना ज़रूरी है।
वे युवा ही हैं जिनके कंधों पर समूचे राष्ट्र की जिम्मेदारी है। युवा यदि अनुशासित, परिश्रमी, ईमानदार, चरित्रवान, जीवन मूल्यों में विश्वास करने वाले होंगे तो देश उतनी ही अधिक तरक्की करेगा और तरक्की की कोई सीमा नहीं वह तो अनन्त है। इसके विपरीत यदि युवा शक्ति दिग्भ्रमित, दिशाहीन, काम से जी चुराने वाली अर्थात् काहिल, असंवेदनशील, कृतघ्न हो तो ऐसे युवाओं के बलबूते आगे बढ़ना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है।
आज के परिप्रेक्ष्य में युवाओं का दिग्दर्शन अति आवश्यक है। उस युवा शक्ति का जो
अल्प समय में बहुत ऊंची छलांग लगाने,
प्रतिस्पर्धा को ही जीवन का एक मात्र लक्ष्य मानने,
घर के बुजुर्गों को बेकाम का समझने,
निज राष्ट्र की संस्कृति, भाषा, रहन सहन को पुरातनवादी समझने के सिद्धांतों का वरण कर रही है।
एक और विकराल समस्या जो महसूस की जा रही है वो है
युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृति,
जो धीरे धीरे ही सही लेकिन शरीर में जहर घोलकर उनको विवेकहीन करती जा रही है।
इसके अतिरिक्त न केवल महानगरों, वरन कस्बों एवं गांव में भी युवाओं के सट्टे में लिप्त होने के समाचारों से समाचार-पत्र भरे पड़े रहते हैं।
ये स्थितियां किसी परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए ठीक नहीं है।
अब प्रश्न उठता है कि आखिर इसका ‘उपाय क्या है!’
उपाय है हम सभी के पास है।
आज के बच्चों ने अभिभावकों, बड़े बुजुर्गों, परिवार और समाज से जो दूरियां बना ली हैं। यह स्थिति इस सबके मूल में है।
क्या कारण रहे वह अलग विषय है।
इस दूरी का सबसे बड़ा खामियाजा परिवार और समाज तो भुगत ही रहे हैं। इनसे कहीं आगे राष्ट्र भुगत रहा है।
इस सब से गलत आशय लेना ठीक नहीं है। ऐसा नहीं है कि आज के बच्चे समझदार नहीं हैं, अच्छा नहीं सोचते। बस कई बार अच्छे और बुरे में फ़र्क करने में चूक कर जाते हैं और एक छोटी सी भूल, गलती को परिवार के साथ साझा नहीं कर पाते। बस यही अक्षमता ऐसी स्थितियों परिस्थितियों की जनक बन जाती है और दूरियों में परिवर्तित होती चली जाती है। और! यही दूरी उनको धीरे धीरे परिवार से दूर लेती चली जाती है और वो जाने अनजाने में कई बार ऐसे निर्णय करते चले जाते हैं जिनकी प्रतिपूर्ति कर पाना संभव नहीं हो पाता।
आइए एक समर्पित पाती युवाओं को केंद्र में रखकर लिखिए।
जिसमें
आपके जीवन के अनुभव,
जीवन के टेढ़े मेढ़े रास्तों से आगे निकलने,
हताशा से उबरने,
जीवन जीने के तरीके,
संवेदनशीलता,
बुजुर्गों के सम्मान की सीख,
सबके लिए अपनेपन का भाव निहित हो।
उनको आसमान में उड़ने की सीख ज़रूर दें, लेकिन नज़रें ज़मीन पर हों। यह भी बताएं। जीवन में बहुत कुछ कमाने का ज्ञान दें लेकिन धन दौलत के अतिरिक्त दूसरों का स्नेह, अपनापन कमाने का हुनर सिखाते हुए।
जीवन में अपनों की अहमियत क्या होती है यह भी सिखाएं। उनको दुनिया के किसी भी देश में जाने की आजादी ज़रूर दें लेकिन अपनी माटी, अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सीख भी ज़रूर दें। ऐसी बहुत सी बातें आप अपने पत्र में समाहित कर सकते हैं जो युवाओं को उनके विवेक के सर्वोत्तम उपयोग का ज्ञान दें। यक़ीन मानिए आपका अपना कोई युवा आपके पत्र की बाट जोह रहा है और यह पाती ही उसमें परिवर्तनों की सुखद बयार बहा देगी। एक ऐसा पत्र जो उसके जीवन की दिशा बदल सकता है।
आइए कलम उठाइए और एक पाती जरूर लिखिए अपने घर, परिवार, पड़ोस, रिश्तेदार या समाज के किसी भी युवा को। फिर चाहे वो आपकी औलाद हो, भाई हो, बहिन हो, शिष्य हो, नाती हो, नातिन हो, दोहिता हो अथवा दोहिती या आपका कोई अपना कोई अन्य प्रिय।
इस बार यह भी आग्रह है कि जो पत्र किसी युवा को केन्द्र में रखकर लिखा जा रहा है उसकी एक प्रति डाक से उस युवा को भेजिए जिसे संबोधित कर वो पत्र लिखा गया है। और! एक प्रति हमें भिज।
नियमावली
प्रतियोगिता के नियम और शर्तें निम्नानुसार होंगी-
प्रतियोगिता की शर्तें :
1. इस प्रतियोगिता में कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। पत्र के साथ इस आशय का एक प्रमाण पत्र भी लिख कर संलग्न करें कि जिसे पत्र लिखा गया है उसकी एक प्रति उस युवा को डाक से प्रेषित कर दी गई है।
2. अधिकतम शब्द सीमा 1000 शब्द होगी।
3. केवल काग़ज़ के एक तरफ हाथ से लिखे पत्र ही स्वीकार होंगे।
4. काग़ज़ में पर्याप्त हाशिया छोड़ना है।
5. पत्र प्राप्ति मेल या व्हाट्सएप से स्वीकार्य नहीं होगी।
6. पत्र प्राप्ति का माध्यम केवल डाक द्वारा जो रजिस्टर्ड या साधारण हो सकता है |
7. प्राप्त पत्रों का मूल्यांकन तीन सदस्यीय टीम से कराया जाएगा जो भाषा शैली, विषय वस्तु, प्रभावशीलता के आधार पर मूल्यांकन करेंगे।
8. अंतिम रूप से चयनित पत्रों को पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है।
9. पत्र प्राप्त होने की अंतिम तिथि 15 मार्च, 2025।
इसके पश्चात तिथि बढ़ाई नहीं जाएगी।
पत्र प्राप्ति का आधिकारिक पता
डॉ. सूरज सिंह नेगी
केयर ऑफ डॉ. मीना सिरौला,
413 रामानुजन निवास
वनस्थली विद्यापीठ निवाई
टोंक – 30 40 22 (राजस्थान)
तो आइए इस अनूठी पत्र लेखन प्रतियोगिता में स्वयं भी भागीदार बनिए और अपने आस पास के लोगों को भी पत्र लेखन के लिए प्रेरित कीजिए।
विनीत
डॉ. सूरज सिंह नेगी
डॉ. मीना सिरौला
(संयोजक/सह संयोजक पाती अपनों को मुहिम)
मोबाइल नंबर 9660119122
प्रस्तुति और सहयोगी तथा याचक
लिंक
uljhansuljhan.in