कोटपुतली कार्यक्रम
गुर्जर समाज के शिक्षाविदों द्वारा विजय सिंह ‘पथिक’ उर्फ भूप सिंह गुर्जर की जयंती के उपलक्ष में कांफ्रेंस करने के साथ-साथ समाज के इस ऐतिहासिक व्यक्तित्व से परिचित कराना और शोध को बढ़ावा देना भी है। अतः इस जयंती के उपलक्ष में ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ‘पथिक’ के व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करेंगे।
गुर्जर शिक्षाविदों के तत्वाधान में स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी तथा विश्व के सबसे लंबे किसान आंदोलन के नेतृत्व कर्ता विजय सिंह पथिक उर्फ भूप सिंह गुर्जर की जयंती के उपलक्ष में कांफ्रेंस आयोजित कर उनको याद करेंगे। विजय सिंह पथिक ने राजस्थान को कर्मभूमि बनाया और बिजोलिया किसान आंदोलन को विश्व पटल पर रखा। स्वयं महात्मा गांधी ने उनकी प्रशंसा की। विजय सिंह पथिक की संगठनात्मक क्षमता का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि उन्होंने राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से प्रजामंडल आंदोलन सहित अनेक बहुउद्देशीय तथा बहुआयामी गतिविधियां प्रारंभ की ।
गुर्जर शिक्षाविदों की ऑनलाइन बैठक प्रो. पी. एस. वर्मा की अध्यक्षता तथा प्रो आर. के. गुर्जर की सहयोग से आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में वक्ताओं के रूप में प्रोफेसर राकेश राणा, प्रो. कैलाश चंद गुर्जर, प्रो. धीर सिंह धाबाई, प्रो. कुलदीप सिंह महुआ विजय सिंह ‘पथिक’ के व्यक्तित्व और कृतित्व के साथ-साथ उनके राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक विचारों तथा तत्कालीन समाज में उनके प्रभाव और परिणाम पर चर्चा करेंगे। डॉ. रूप सिंह और डॉ. रीना वर्मा कार्यक्रम में वर्तमान संबंध में विजय सिंह ‘पथिक’ के विचारों की प्रासंगिकता और व्यक्तित्व निर्माण में उनके विचारों की भूमिका पर विचार प्रकट करेंगे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. जे. आर. कसाना करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को विजय सिंह पथिक के साथ-साथ समाज के ऐतिहासिक व्यक्तित्व से परिचित कराना और शोध को बढ़ावा देना है।
संबोधन
समाजशास्त्री जगराम जी कसाना
“पथिक जी बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उनका कार्य यथार्थ पूर्ण था। सामंतवाद के खिलाफ थे और आमजन को साथ ले कर किसान आंदोलन के साथ साथ प्रजामण्डल आंदोलन में भी योगदान दिया। राजस्थान सेवा संघ और अनेक पत्र पत्रिकाओं से यह प्रमाणित होता है कि तत्कालीन समय में सबसे अधिक प्रखर बुद्धिजीवी और धरातलीय कार्य करने वाले विजय सिंह पथिक थे।”
प्रो. विमल कुमार यादव
“विजय सिंह पथिक से अंग्रेज और अंग्रेजों के सरपरस्त लोग भयभीत थे। पथिक को वो स्थान मिलना चाहिए जो गांधी और बॉस को मिला।”
प्रो. आर. पी. गुर्जर
“विजय सिंह पथिक जी की जन्मभूमि यद्यपि बुलंदशहर थी, लेकिन कर्मस्थली राजस्थान थी। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े किसान आंदोलन का नेतृत्व किया और सफलता प्राप्त की।”
सुर्खियां
चित्रदीर्घा
जयपुर कार्यक्रम
आज राजस्थान पथिक सेना संगठन के तत्वावधान में महान क्रांतिवीर श्री विजय सिंह जी पथिक की 144वीं जयंती का आयोजन श्री आनंदी लाल पोद्दार मूक बधिर संस्थान जयपुर में किया गया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह बजाड़ ने बताया कि विजय सिंह जी पथिक एक प्रभावी पर सीधे और सरल इंसान थे और संकल्पों के दृढ़ थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कमिशनर इन्कम टैक्स श्री लक्ष्मण सिंह जी ने की और उन्हीं के द्वारा पथिक जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम में श्री उदयलाल जी भड़ाना (विधायक मांडल), श्री सुरेश जी गुर्जर (विधायक खानपुर झालावाड़) मुख्य अतिथि रहे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि gkap प्रदेश अध्यक्ष श्री राजेंद्र जी तंवर और अधिवक्ता श्री जगदीश बेडम जी, नगर निगम कोषाध्यक्ष श्री विश्वेंद्र जी तंवर, ci श्री नंदकिशोर जी, कोटा यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष श्री लोकेश जी गुर्जर पधारे और पथिक जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष श्री राम सराधना और जयपुर जिला अध्यक्ष अधिवक्ता संजीव द्वारा समस्त अतिथियों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों का सहभोज करवाकर पथिक जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। जिसमें अतिथि श्री लक्ष्मण सिंह जी और विधायक उदयलाल जी द्वारा प्रदेश अध्यक्ष के. शंकर सिंह बजाड़ के साथ समस्त बच्चों को हाथों से भोजन करवाया गया। कार्यक्रम में समाज और संगठन के सभी गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
चित्रदीर्घा
विवरणरहित अन्य कार्यक्रम
सूचना स्रोत
डॉ राकेश राणा जी
प्रस्तुति