एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में ‘टॉक्सिक’ पर संवाद
ओशो अनुज स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी ने मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर बढ़ने का दिया संदेश
डॉ. मुकेश बत्रा और ओशो अनुज, स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी ने विद्यार्थियों से किया खुला संवाद, ध्यान, आत्म-जागरूकता और सार्थक जीवन पर दिया जोर।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए दो डिजिटल नवाचार, रिश्तों में स्वस्थ संवाद और सकारात्मक भावनाओं को तकनीक से जोड़ने का प्रयास।
नोएडा। एमिटी विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के रेखी फाउंडेशन सेंटर फॉर साइंस ऑफ हैप्पीनेस की ओर से शुक्रवार को विद्यार्थियों के लिए ‘टॉक्सिक : मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा, संस्थापक बत्रा ग्रुप ऑफ क्लीनिक्स, मुंबई और ओशो अनुज व ओशो फ्रेग्रेन्स के संस्थापक स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी ने विद्यार्थियों से मानसिक एवं भावनात्मक विषाक्तता, तनाव, ध्यान, आत्म-जागरूकता, रिश्तों और उद्देश्यपूर्ण जीवन जैसे विषयों पर खुलकर संवाद किया।
यह कार्यक्रम ‘खुशहाली और अध्यात्म पर वैश्विक नेताओं के साथ संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किया गया। यह सेंटर फॉर साइंस ऑफ हैप्पीनेस के पॉडकास्ट का 32वां सत्र भी था।
मन की विषाक्तता को पहचानना जरूरी
कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी ने कहा कि विषाक्तता को केवल बाहरी वातावरण या खान-पान से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। व्यक्ति के विचार, भावनाएं, व्यवहार, तनाव और रिश्तों में पैदा होने वाली नकारात्मकता भी उसके मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली को प्रभावित करती है। ऐसे में स्वयं के भीतर चल रही प्रक्रियाओं को पहचानना और उनमें आवश्यक बदलाव लाना महत्वपूर्ण है।
सेंटर फॉर साइंस ऑफ हैप्पीनेस के प्रमुख प्रो. नितिन अरोरा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खुशहाली पर चर्चा तभी सार्थक होगी, जब विद्यार्थी अपने जीवन में मौजूद तनाव और नकारात्मकता के स्रोतों को पहचानें तथा स्वस्थ सोच, बेहतर संबंधों और संतुलित जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएं।
चिंता और अवसाद के शुरुआती संकेतों पर चर्चा
संवाद के पहले चरण में पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने मानसिक विषाक्तता और खुशहाली के संबंध के साथ-साथ चिंता और अवसाद के शुरुआती संकेतों तथा स्वास्थ्य देखभाल में होम्योपैथी की भूमिका पर चर्चा की।
इसके बाद स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी ने ध्यान, मन की बेचैनी के कारणों और आंतरिक शांति पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने ध्यान को केवल एक तकनीक के रूप में देखने के बजाय जागरूकता और स्वयं को समझने की प्रक्रिया के रूप में देखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने भीतर की हलचल को समझने लगे तो जीवन में अधिक शांति और संतुलन की संभावना पैदा होती है।
विद्यार्थियों के डिजिटल नवाचार बने आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में एमिटी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विकसित दो डिजिटल नवाचार भी प्रस्तुत किए गए। पहला नवाचार ऐसा संवाद सहायक चैटबॉट है, जिसका उद्देश्य रिश्तों में होने वाली नकारात्मक और विषाक्त बातचीत को कम करने में सहायता करना है। यह उपयोगकर्ता को तत्काल प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरकर सोचने और बेहतर संवाद का विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित करता है।
दूसरा नवाचार चेहरा पहचानने पर आधारित मुस्कान उपकरण है, जो चेहरे पर मुस्कान को पहचानकर सकारात्मक भावनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़े संकेत के रूप में उसका उपयोग करता है।
विद्यार्थियों ने जीवन से जुड़े सवाल पूछे
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सवाल पूछे। प्रियजन को खोने के बाद उत्पन्न भावनात्मक स्थिति, प्री-डायबिटीज के शुरुआती संकेत, दूसरों से तुलना और प्रतिस्पर्धा से बाहर निकलने, अपनी गलती स्वीकार करने में होने वाली कठिनाई तथा यह जानते हुए भी कि जीवन में क्या बदलना है, उस बदलाव को व्यवहार में न ला पाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान एमिटी विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अकादमिक नेतृत्व एडिशनल प्रो वाइस चांसलर, प्रो. डॉ.संजीव बंसल, एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के चांसलर एवं एएसटीआईएफ के अध्यक्ष प्रो. डॉ. डब्ल्यू. सेल्वमूर्ति, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश की कुलपति प्रो.डॉ. बलविंदर शुक्ला ने भी पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा और ओशो अनुज, स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी से भी मुलाकात की।
21 सितंबर को दिल्ली में पुस्तक विमोचन और प्रेस वार्ता
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मुकेश बत्रा और स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी द्वारा सहलिखित पुस्तक ‘टॉक्सिक : स्टोरीज, साइंस एंड रेमेडीज फॉर ए क्लीनर माइंड, बॉडी एंड स्पिरिट’ का विमोचन भी किया गया। पुस्तक में शरीर और जीवनशैली से जुड़े विषैले तत्वों के साथ तनाव, नकारात्मक विचारों, भावनात्मक दबाव और रिश्तों में पैदा होने वाली मानसिक विषाक्तता को समझने तथा उससे बाहर निकलने के उपायों पर चर्चा की गई है।
पुस्तक के लेखकों के अनुसार, इसका पहला संस्करण बिक चुका है। अब 21 सितंबर को दिल्ली के ललित रीजेंसी होटल में पुस्तक विमोचन और प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में डॉ. अनुषा अय्यर, श्रीमती मेनका संजय गांधी और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्था ब्लूम्सबरी की ओर से भी प्रतिनिधि इस मीडिया कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
एमिटी में आयोजित इस कार्यक्रम में ओशो अनुज स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी का मूल संदेश यही रहा कि बाहरी परिस्थितियों को बदलने के साथ-साथ व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं, व्यवहार और संबंधों को भी समझना होगा। आत्म-जागरूकता, ध्यान और स्वस्थ संवाद के माध्यम से मानसिक विषाक्तता को कम करके ही अधिक संतुलित और सार्थक जीवन की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
झलकियाँ


प्रस्तुति


