तस्वीर पर रचना

तस्वीर पर रचना

तस्वीर पर रचना

हम साथ-साथ हैं
राहें चाहे अलग-अलग हों,
मंज़िल फिर भी एक है,
धूप मिले या छाँव मिले,
हाथों में हाथ हो तो हर मौसम नेक है।
कभी तुम थक जाना,
तो मैं तुम्हारा सहारा बन जाऊँगी,
कभी मेरी आँखें नम हों,
तो तुम मेरी मुस्कान बन जाना।
जीवन की राह में
हर कदम आसान नहीं होता,
लेकिन साथ चलने वाला कोई अपना हो,
तो कोई सफ़र अनजान नहीं होता।
न शिकायतों का बोझ हो,
न रिश्तों में कोई दीवार हो,
बस विश्वास बना रहे दिलों में,
और हर पल एक-दूसरे का साथ हो।
कल कैसा होगा, कौन जाने,
आज इतना तो विश्वास है—
चाहे जैसे भी हों हालात,
हम साथ-साथ हैं…
और यही सबसे खूबसूरत बात है।
प्रमिला त्रिवेदी

प्रस्तुति

उलझन सुलझन