भूमिका
समझिए कि कैसे व्यक्तित्व का निर्माण होता है क्षमताओं के क्रमिक विकास के साथ साथ।
व्यक्तित्व का परिचय
साथियो! आज हमारे बीच मौजूद हैं शिक्षाविद श्री भंवर सिंह जी, जिन्होंने अंग्रेजी भाषा के अपने गहन ज्ञान से अनेक बालकों का भविष्य संवारा। वे केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि समाज में मानव संपदा के रूप में विकसित हुए हैं। उन्होंने समाज के बीच पर्याप्त समय बिताकर मानवीय आचार-व्यवहार की गहरी समझ प्राप्त की है।
शिक्षा और सामाजिक योगदान
एक शिक्षाविद के रूप में उन्होंने शिक्षा को रूपांतरित करने और समुदायों को ऊपर उठाने के लिए खुद को समर्पित किया। उनकी दूरदर्शिता ने उन्हें नवीन शिक्षण विधियों, समावेशी प्रथाओं और मूल्य-आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को सशक्त बनाने की प्रेरणा दी। वे केवल साक्षरता और कौशल विकास तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक समानता को बढ़ावा देकर समाज में शिक्षा और नैतिकता का समावेश किया।
उनका प्रयास कक्षाओं से परे जाकर सामाजिक जागरूकता, नैतिक जिम्मेदारी और सतत विकास को बढ़ावा देता है, जिससे एक प्रगतिशील और जागरूक समाज का निर्माण संभव हो पाता है।
संघर्ष और प्रेरणा
श्री भंवर सिंह जी कहते हैं—
“मैं अपने समग्र जीवन को एक गजब के संघर्ष के रूप में पाता हूं और इसी को दृष्टिगत रखते हुए मैं अक्सर यह अंग्रेजी कहावत दोहराता हूँ—
“Life is nothing without struggle.”
उनका सेवा क्षेत्र में प्रवेश एक महत्वपूर्ण निर्णय था, जिसे उन्होंने अपनी अर्धांगिनी के सुझाव और प्रेरणा से लिया। एक कृषक परिवार में जन्मे श्री सिंह को बचपन से ही संघर्ष का अनुभव था। उन्हें काउंसलिंग या मार्गदर्शन की कोई सुविधा नहीं मिली, लेकिन उनके सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी चाचा श्री श्याम सिंह ने उनकी शैक्षणिक सफलताओं को देखते हुए सेवा क्षेत्र में जाने की सलाह दी।
शिक्षा क्षेत्र में योगदान
श्री भंवर सिंह जी को अध्यापन कार्य सबसे श्रेष्ठ दायित्व लगा, क्योंकि इससे उन्हें असंख्य विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का अवसर मिला। साथ ही, अपने स्वयं के बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए भी पर्याप्त समय और कौशल प्राप्त हुआ। उनका यह मानना है कि—
“विद्यार्थी जीवन में मैंने तमाम अभावों को देखा और परिजनों की मुझसे निहित अपार आशाओं को महसूस किया। मेरी माँ, चाचा, पिता, भाई-बहन और मेरी अर्धांगिनी—सभी की अनंत अपेक्षाएँ थीं, और मैं किसी भी रूप में उन्हें निराश नहीं करना चाहता था।”
उन्होंने केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया।
परिवार और दायित्व निर्वहन
अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी की आशाओं, अपेक्षाओं और सुझावों को सर्वाधिक महत्व दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके बच्चों का भविष्य संवर सके और समाज को भी लाभ मिले।
“अपनी अर्धांगिनी से विछोह के बाद भी जब मैं उनका स्मरण करता हूँ, तो पाता हूँ कि उन्होंने अपने जीवनकाल में मुझे एक समर्पित जीवनसाथी के रूप में देखा। उनके द्वारा दिए गए संस्कार मेरे बच्चों के समर्पित भाव में दृष्टिगोचर होते हैं।”
समाज सेवा और जीवन का ध्येय
श्री सिंह जी ने अपने जीवन के पिछले बावन वर्षों को पूर्णतः समाज सेवा को समर्पित किया। शिक्षण कार्य के साथ-साथ उन्होंने समाज सेवा के लिए समय निकालना आवश्यक समझा। वे कहते हैं—
“शिक्षा और समाज सेवा से जुड़े रहने से मुझे अपार आनंद की अनुभूति होती थी। यह केवल व्यक्तिगत संतुष्टि नहीं थी, बल्कि इससे संबंधित अन्य सभी पक्षों को संतुष्ट करने में भी मदद मिली।”
हालांकि, शारीरिक अक्षमताएँ बढ़ने के बावजूद, वे आज भी समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर रहते हैं।
समाज और राजनीति संदर्भित सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण
श्री भंवर सिंह जी के अनुसार—
“सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र अलग-अलग होते हुए भी एक-दूसरे के पूरक हैं। इन दोनों क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकने में सक्षम व्यक्ति ही दोनों में सफल हो सकता है।”
वे इस बारीक अंतर को बनाए रखते हुए सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने पर बल देते हैं।
श्री भंवर सिंह जी एक शिक्षक, समाजसेवी, विचारक और मार्गदर्शक के रूप में समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का कार्य किया और संघर्ष को अपने जीवन का एक अभिन्न अंग माना। उनका जीवन यह दर्शाता है कि संघर्ष, शिक्षा, सेवा और समाज को समर्पण ही एक सच्चे शिक्षाविद की पहचान होती है।
आइए, हम सभी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के उत्थान में योगदान दें!
सूचना स्रोत
श्री भंवर सिंह जी
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