धन्यवाद सा (राजस्थानी भाव)

धन्यवाद सा (राजस्थानी भाव)

‘धन्यवाद सा’

धन्यवाद सा धन्यवाद, उण सगला ने धन्यवाद,

जो लाइसेंस लेकर गाड़ी चलावें, उण रा धन्यवाद,
जो कटबा री गाया ने बचावें, उण रा धन्यवाद,
जो बेटा संग बेटी नै पढ़ावें, उण रा धन्यवाद,
जो सभ्यता, संस्कृति ने बचावें, उण रा धन्यवाद।।
धन्यवाद सा धन्यवाद…
जो जल्दी उठकर मंदिर जावें, उण रा धन्यवाद,
जो गीता रा गुण गाता जावें, उण रा धन्यवाद,
जो शाकाहारी भोजन खावें, उण रा धन्यवाद,
जो मातृभूमि की सेवा को जावें, उण रा धन्यवाद।।
धन्यवाद सा धन्यवाद…..
जो पेड़ लगावे,पेड़ बचावें, उण रा धन्यवाद,
जो नदी,तालाब,बांध सजावें, उण रा धन्यवाद,
जो चॅंदा,सूरज,तारे पूजन जावें, उण रा धन्यवाद
जो धरती,अम्बर निर्मल बनावें, उण रा धन्यवाद।।
धन्यवाद सा धन्यवाद…
जो ईमानदारी से नौकरी करता, उण रा धन्यवाद,
जो ईमानदारी से न्याय करता, उण रा धन्यवाद,
जो ईमानदारी से ईलाज करता, उण रा धन्यवाद,
जो ईमानदारी से शासन करता, उण रा धन्यवाद।।
धन्यवाद सा धन्यवाद….
जो मात-पिता रे पाॅंव दबावें, उण रा धन्यवाद,
जो गरीबा ने छाॅंव दिलावें, उण रा धन्यवाद,
जो मजबूरा रा घाव मिटावें, उण रा धन्यवाद,
जो जीवों को भोज करावें, उण रा धन्यवाद।।
धन्यवाद सा धन्यवाद, उण सगला ने धन्यवाद,
कवि मुकेश कुमावत ‘मंगल’

टोंक (राजस्थान)