वीडियो 📸 विश्लेषण

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सारांश

यह वीडियो साहित्य और समाज के बीच गहरे संबंध पर केंद्रित है, जिसमें साहित्य को समाज का दर्पण बताया गया है। वीडियो की शुरुआत साहित्य के विभिन्न रूपों जैसे गद्य, पद्य, कथा, नाटक और सोशल मीडिया से डॉ रीना वर्मा करती हैं और यह दर्शाया गया है कि समय के साथ साहित्य में निरंतर परिवर्तन और नई विधाओं का विकास हुआ है।

वीडियो में एक ग्रुप डिस्कशन का उल्लेख है, जिसे संवाद पॉजिटिव डायलॉग के स्टूडियो में पहली बार आयोजित किया गया। इस चर्चा में साहित्य के प्रभावी रूप और उसके समाज पर सकारात्मक प्रभाव पर विचार साझा किए गए। इस समूह का नाम संवाद सप्तक रखा गया, जिसका उद्देश्य सकारात्मक साहित्य के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज को सही दिशा प्रदान करना है। इस समूह की योजना है कि वे हर दो-तीन महीने में बैठक करें और पुस्तकों, लेखों, कविताओं, थिएटर, सोशल मीडिया पेजेस और यूट्यूब चैनल्स को इसमें शामिल करें।

चर्चा में कई लेखकों और उनकी पुस्तकों का वर्णन हुआ जिनमें आदर्श जैनर, लाल बहार, करोड़ी सिंह बैंसला, सुनीता बैंसला, डॉक्टर प्रशांत कुमार, राजपाल सिंह कसाना, राजेश कुमार डेढ़ा, हितेंद्र सिंह, सीमा भड़ाना, निर्मल डेढ़ा, नीतू भड़ाना, अनु भड़ाना आदि शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रसिद्ध कवि पीके आजाद ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और एक कविता प्रस्तुत की, जो सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा और भ्रूण हत्या के विरोध में है।

कविता में “एक भगवान के बनाए सब नर नर एक जैसा, सबको ही अधिकार दीजिए” जैसे शक्तिशाली और समतावादी विचार व्यक्त किए गए हैं। यह कविता उस दिल्ली की घटना के खिलाफ है, जिसके बाद देश भर में विरोध स्वरूप मोमबत्ती मार्च हुआ था। कवि ने समाज से आग्रह किया है कि बेटियों के प्रति नकारात्मक भावनाओं को त्यागकर बेटों को संस्कार दिए जाएं, ताकि सामाजिक कुरीतियों का अंत हो सके।

प्रमुख बिंदु

– साहित्य समाज का दर्पण है, जिसमें गद्य, पद्य, कथा, नाटक और सोशल मीडिया शामिल हैं।

– समय के साथ साहित्य की नई विधाओं का विकास हुआ है और यह समाज को प्रभावित करता है।

– पहली बार संवाद पॉजिटिव डायलॉग के स्टूडियो में ग्रुप डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसका नाम संवाद सप्तक रखा गया।

– संवाद सप्तक समूह का उद्देश्य है सकारात्मक साहित्य का प्रचार-प्रसार करना जो समाज को सही दिशा दे सके।

– समूह की योजना है कि वे हर 2-3 महीने में बैठक करें और विभिन्न साहित्यिक माध्यमों को जोड़ें।

– चर्चा में कई लेखकों और उनकी पुस्तकों पर विचार विमर्श हुआ।

– सुप्रसिद्ध कवि पीके आजाद की कविता ने दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या और समान अधिकार जैसे विषयों को उजागर किया।

– कविता का मूल संदेश है कि सभी मनुष्य समान हैं और समाज को बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

– सामाजिक कुरीतियों का अंत केवल संस्कारों और समान अधिकारों के माध्यम से संभव है।

संवाद सप्तक समूह की योजना

विषय/विवरण

समूह का नाम – संवाद सप्तक।

समीक्षा आवृत्ति – दो-तीन महीने में एक बार।

समीक्षा के साहित्यिक माध्यम – पुस्तकें, लेख, कविताएँ, थिएटर, सोशल मीडिया पेज, यूट्यूब चैनल।

उद्देश्य – सकारात्मक साहित्य का प्रचार और समाज की सही दिशा में प्रेरणा देना।

सदस्य  – साहित्यिक रुचि वाले लोग, लेखक, कवि, समाजसेवी।

प्रमुख कविताएँ और लेखकों के नाम

लेखक/कवि – उल्लेखित कृति/विशेषता

आदर्श जैनर – भारत 2047

लाल बहार – हिम्मत मेहनत और नीयत

किरोड़ी सिंह बैंसला – किताब का नाम Not specified

सुनीता बैंसला – शिक्षा कलाम की कलम

डॉक्टर प्रशांत कुमार – एहसास काव्यधारा

राजपाल सिंह कसाना – सरपंच, आधी दुनिया का सच

राजेश कुमार डेढ़ा – केदार से कैलाश तक

पी.के. आजाद (कवि) – सामाजिक कुरीतियों पर कविता

हितेंद्र सिंह, सीमा भड़ाना, निर्मल डेढ़ा आदि, समूह के अन्य सदस्य और साहित्यकार।

निष्कर्ष

इस वीडियो में साहित्य को समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो न केवल सामाजिक चेतना को बढ़ावा देता है बल्कि सकारात्मक बदलाव की दिशा भी निर्धारित करता है। संवाद सप्तक समूह का गठन इस दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक और सशक्त बनाना चाहता है। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कविताएँ और लेख समाज में जागरूकता फैलाने में सहायक हैं। सभी मनुष्यों को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त होना चाहिए, और यह संदेश साहित्य के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रसारित किया जा सकता है।

सूचना स्रोत

यूट्यूब वीडियो

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति

कल्पनाकार है शब्दशिल्प

नोट जीपीटी

प्रस्तुतकर्ता