मौन

मौन के भीतर की आवाज।
मौन, वीराने में मन का मीत है,
मौन, जीवन का सुगम संगीत है।
मौन, मूक अभिव्यक्ति तुम्हारे आमंत्रण की,
मौन, पत्रिका मेरे नेह निमन्त्रण की।
कह सकी जो मैं न अब तक
तुम जिसे सुन ना सके
मौन मेरे और तुम्हारे बीच की वह बात है।
मौन मेरे हृदय की मरुभूमि में,
शरद पूनम की उजली रात है।
मौन कोई सन्नाटा नहीं है,
मौन जीवन का तराना है,
आहत तन को दुनिया देखे
पीड़ा मन की मन ही जाने
तन के घाव सभी भर जाएं
मन टूटा, न जुड़ना जाने
तन, मन के वश हो जाता है
जब मन, बुद्धि वश आता है
मौन एक अंतर्मुखी साधना
मौन एक साधना है,
यह खोज उसे अपने भीतर ले जाती है,
जहाँ मौन है, शांति है, और!
एक ऐसा प्रेम जो किसी शर्त पर आधारित नहीं।
मौन जीवन का सुगम संगीत है,
मन रूपी मरुभूमि में चंद्र के समान है,
आध्यात्मिक दृष्टि से मौन एक तपस्या है
मौन एक अंतर्मुखी साधना है
जो चेहरे को देखे और मौन को पहचाने।
शब्द निरर्थक हो जाएं,
भाव समझ आ जाए।
सृजक

प्रमिला त्रिवेदी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति



