पुत्र को जन्मदिवस पर शुभ कामनाएं

रुग्णावस्था के दौरान के आंतरिक भाव
प्रिय पुत्र मनीष के जन्मोत्सव दिनाक 15-2-26 पर उसके पापा के उद्गार एवं आशीर्वाद
मनीष तुम्हारे जन्मदिवस पर क्या क्या मैं आशीष बिखेरूं।
सेवा भावों में बन बैठे मुझको तो तुम उच्च सुमेरु।
कोई कहे सुत श्रवण जैसा इस जग में कैसा होता है?
तो मैं कहता पुत्र मेरे वो मनीष जैसा ही होता है।
देख मेरे तन-मन की पीड़ा उसको देखा चुप-चुप रोते।
उसके अन्तर के भावों को देखा मैंने धीरज खोते।
पितृ, ऋषि, और देव ऋणों संग मानव सदा जन्म लेता है।
कोई ऋणों को संग ले जाता कोई मुक्ति ले लेता है।
ऐसा लगता सभी ऋणों से तुमने तो मुक्ति पा ली है।
पर सेवा उपकार भाव से ईश्वर की भक्ति पा ली है।
नहीं तुम्हारा काम कोई भी निज जीवन में रुक पाएगा।
निश्छल भावों के कारण वो स्वतः ही होता जायेगा।
आशीषों के सिवा मेरे तो पास नहीं है कोई खजाना।
तुमको पाकर ऐसा लगता पास मेरे है महा खजाना।
सुखी रहो परिवार सहित तुम सभी कामना पूरी होवें।
ईश करे सन्तान तुम्हारे जैसी ही हर घर में होवे।
शैव्या छैल छबीली मेरी बाबा की है महा लाड़ली।
जीवन में हर सुख भोगेगी देवों ने हर पीर टाल दी।
सोनाक्षी के क्या गुण गाऊँ बाबा की सेवाकारी है।
सेवा से जो भी फल मिलता उसकी पूरी अधिकारी है।
पौत्र विनायक सदा-सदा से बाबा के हृदय का टुकड़ा।
सहमा सा उसको पाया है देख-देख बाबा का दुखड़ा।
गुण सारे पापा के उसमें सेवा करके खुश होता है।
रहे कहीं भी फिर भी देखा बाबा के संग में होता है।
मेरे घर के क्या कहने हैं घर है फूलों का गुलदस्ता।
इस घर को महकाने में ही रेनू को है मिली सफलता।
रेनू में भी सेवा संचित घर को रखती सदा संभाले।
पापा की सेवा में कोई कमी रहे न मार्ग निकाले।
आशीषों का महा खजाना तुम सबको अर्पित करता हूँ।
संकट नहीं कोई भी आवे ईश्वर से विनती करता हूँ।
मान और प्रतिष्ठा अपनी सदा बनायें जग में रखना।
प्यार सदा छोटों से करना मन से मान बड़ों का करना।
तेरी सुरलोकी मम्मी ने घर का उपवन किया था सृजित।
उसको मेरी पुत्रवधू ने बड़े प्रेम से रखा सुरक्षित।
ग्रह आई और लगा गई टल तुम सब की सेवा का फल है।
ये भी मिट जायेगी जल्दी जो कमजोरी की कल कल है।
अस्पताल में लगा था ऐसा मृत्यु ने आ मुझे पुकारा।
तब ही लगा मृत्यु को जैसे तुमने सेवा कर ललकारा।
देवों ने भी पुत्र तुम्हारा पूरा-पूरा साथ दिया था।
देव लोक से आकर जैसे मेरे सर रख हाथ दिया था।
छोटा बैठा दूर देश में बैठ मेरी चिंता करता है।
रश्मि के संग दिव्यांक भी कभी-कभी बातें करता है।
आशीष यही सुरलोकी मम्मी पीड़ा नहीं कोई भी झेले।
रहो प्रेम से सदा सदा ही कभी न होवे तेरे मेरे।
मनीष तुम्हारे जन्मदिवस पर संजो दीदी है प्रफुल्लित।
करे ईश से यही प्रार्थना रहे सर्वदा भैया हर्षित।
शत्याधिक वर्षी पा जीवन स्वस्थ रहो जीवन में अपने।
मेरा है आशीष यही सब पूरे होंगे देखे सपने।
रचनाकार

कृष्ण
दिनांक 15-2-28
प्रस्तुति



