भूमिका
यातायात जागरूकता लोगों को सुरक्षित, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा के लिए प्रेरित करती है। यह सड़क सुरक्षा नियमों का पालन, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, ईंधन बचत, और यातायात जाम कम करने में मदद करती है। जागरूकता से दुर्घटनाओं में कमी और प्रदूषण नियंत्रण में सुधार होता है। समाज और पर्यावरण दोनों के लिए यह आवश्यक है।
विवरण
दिनांक 18.01.2025, दिन शनिवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में नेहरू युवा केन्द्र मुजफ्फरनगर के तत्वावधान में समन्वय विभाग यातायात प्रशासन मुजफ्फरनगर के साथ सडक सुरक्षा जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम का शुभारम्भ जिला युवा अधिकारी प्रतिभा शर्मा, यातायात जिला प्रभारी इन्द्रजीत सिंह तथा प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
प्रतिभा शर्मा ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए बताया कि
“यह सप्ताह यातायात जागरूकता के रूप में मनाया जा रहा है इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यातायात के नियमों से एवं वाहन चलाते वक्त आत्मसुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। 18 वर्ष से कम व बिना ड्राईविंग लाईसेंस के वाहन चलाना गैरकानूनी है, जिसका अधिकतर नागरिक पालन नहीं करते, आज आपको हमारे अधिकारियों द्वारा जो नियम बताये जायेगें आपको उन्हें अपने आस-पास के सभी नागरिकों को एवं अपने परिवार में बताना है जिससे वे उनका पालन कर सके।”
यातायात प्रभारी इन्द्रजीत सिंह ने यातायात के नियमों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि
“आज का विषय बडा ही गूढ है। क्या आप जानते हो एक दुर्घटना होने पर कितने लोग प्रभावित होते है शायद नहीं। क्योंकि दुर्घटना में घायल होने या मारे जाने वाले व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार, प्रशासन, वकील, डॉक्टर आदि की एक पूरी चैन प्रभावित होती है इसका मुख्य कारण है हमें यातायात के नियमों की अज्ञानता।
हमारे देश में विश्व का 10 प्रतिशत वाहन है और दुर्घटना में 11 प्रतिशत। दुर्घटना होने के चार मुख्य कारण है पहला वाहन चालक की कमी, दूसरा वाहन की कमी, तीसरा इंजीनियरिंग अर्थात सडकों का डिजाइन, चौथा वातावरण, ओवरलोडिंग भी कभी-कभी दुर्घटना का कारण बन जाती है।
अब बात आती है जागरूकता की जब कभी भी आप सड़क क्रॉस करें तो पहले दाहिने देखे फिर बायें देखे ऐसा 2-3 बार करें जब आप संतुष्ट हो जाये तभी रोड पा करें, किसी भी चौराहे का बायां हिस्सा खाली होता है लेकिन कुछ वाहन चालक उस खाली हिस्से में ही खडे हो जाते है, जो दुर्घटना का कारण बनता है। सडकों पर कुछ चिह्न बने होते है जिनका अपना-अपना अर्थ होता है उन्हें भी ठीक उसी प्रकार समझना चाहिए जैसे आप अपनी पुस्तके पढते है। जो नेक व्यक्ति किसी घायल व्यक्ति की मद्द करता है उसे गुड सेमेस्टर कहते है अगर किसी घायल व्यक्ति को एक घण्टे के अन्दर-अन्दर डॉक्टरी उपचार मिल जाता है तो उसके बचने की संभावना बढ जाती है इस घंटे को गोल्डन आँवर कहते है।”
उसके बाद इन्द्रजीत सिंह ने वाहन चालान के प्रकारों पर प्रकाश डाला।
अन्त में यातायात नियमों पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया जिसमें सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को नेहरू युवा केन्द्र की ओर से उपहार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के उपरान्त नेहरू युवा केन्द्र की ओर से जिला युवा अधिकारी प्रतिभा शर्मा एवं यातायात प्रभारी इन्द्रजीत द्वारा एन0एच0-58 वहलना चौक पर विद्यार्थियों को ले जाकर वास्तविक रूप में यातायात नियमों को समझाने एवं उनका पालन करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया।
सूचना स्रोत
प्रवेंद्र दहिया
प्रस्तुति