मधुर रिश्ते और पारिवारिक स्नेह किसी भी परिवार में जीवन की अनमोल पूंजी हैं। एक परिवार में धन से अधिक महत्व रिश्तों का होता है। रिश्ता वह नहीं होता जो केवल दिखाया जाता है, बल्कि रिश्ता वह है जो सच्चे मन से निभाया जाता है।
कहा भी गया है—
पुत्र की परख विवाह के बाद,
पुत्री की युवावस्था में,
पति की बीमारी में,
पत्नी की गरीबी में,
भाई की मुसीबत में,
संतान की बुढ़ापे में,
और सास की परख बहू आने के बाद होती है।
परिवारों में विघटन अक्सर इसलिए होता है क्योंकि लोग झुकने की बजाय टूटना पसंद करते हैं। छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते खत्म करने की बात कर देते हैं, जबकि समझदारी यह है कि प्रेम से छोटी-छोटी बातों को समाप्त कर दिया जाए, न कि प्रेम को।
दुनिया की सबसे बड़ी ताकत प्रेम ही है। झाड़ू के तिनके जब प्रेम से एक साथ रहते हैं, तो वे कचरा साफ करते हैं; लेकिन वो ही तिनके जब बिखर जाते हैं, तो स्वयं कचरा बन जाते हैं।
जीवन में आहार, विहार और विचार—इन तीनों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। स्वस्थ तन और शांत मन ही सुखी जीवन का आधार हैं।
परिवार की एकता हमें हर सुख-दु:ख में संबल देती है।
एक उल्लसित परिवार
अपने बच्चों को महत्व दीजिए, अपने स्वास्थ्य को समय दीजिए। जब जीवन में कठिन समय आता है, तब यही परिवार और आपका स्वास्थ्य सबसे बड़ा सहारा बनते हैं।
मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा और सफल क्यों न बन जाए, अपने कामों के लिए सहायक रख सकता है, लेकिन अपने स्वास्थ्य और अपने जीवन का भार उसे स्वयं ही उठाना पड़ता है। इसलिए कहा गया है – पहला सुख निरोगी काया।
अच्छा और सुपाच्य आहार स्वास्थ्य को ठीक रखता है और हमारे विचारों को भी सात्विक बनाता है। यदि संभव हो तो दिन में कम से कम एक समय—विशेषकर रात्रि का भोजन—पूरा परिवार एक साथ बैठकर करे। इससे परिवार में प्रेम, संवाद और अपनापन बढ़ता है।
परिवार में प्रेम बांटते रहिए, क्योंकि प्रेम बांटने से ही प्रेम बढ़ता है।
रचनाकार
प्रमिला त्रिवेदी
प्रस्तुति
कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुतिसहयोगी