साक्षर निरक्षर और निरक्षर साक्षर की सी प्रतीति देता है?
हमारी नित्यप्रति की ज़िंदगी में अनेक मौकों पर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जब एक साक्षर व्यक्ति निरक्षर के जैसा व्यवहार करता है और एक निरक्षर व्यक्ति अपने ज्ञान और समझदारी से साक्षर से भी आगे दिखता है।

ऐसे मौके जब साक्षर निरक्षर-सा दिखे
सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना
साक्षर व्यक्ति होने के बावजूद जब कोई कचरा सड़क पर फेंकता है या सार्वजनिक शौचालयों को गंदा करता है, तो वह निरक्षर जैसा व्यवहार करता है।
ट्रैफिक नियम तोड़ना
अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद, जब कोई रेड लाइट जंप करता है, हेलमेट नहीं पहनता या ग़लत दिशा में वाहन चलाता है, तो वह निरक्षर-सा प्रतीत होता है।
बड़ों और जरूरतमंदों का अपमान करना
शिक्षा का असली उद्देश्य संस्कार और विनम्रता सिखाना है। जब कोई साक्षर व्यक्ति बुजुर्गों, गरीबों या ज़रूरतमंदों से बदतमीजी से पेश आता है, तो वह साक्षर होकर भी निरक्षर लगता है।
भेदभाव और अंधविश्वास फैलाना
यदि कोई शिक्षित व्यक्ति जात-पात, धर्म, रंग या लिंग के आधार पर भेदभाव करता है या अंधविश्वासों को बढ़ावा देता है, तो उसकी शिक्षा का कोई मतलब नहीं रह जाता।
नैतिकता का अभाव
चोरी, रिश्वत, धोखाधड़ी, झूठ बोलना जैसी बुरी आदतें किसी भी शिक्षित व्यक्ति को अनपढ़ बना देती हैं।
ऐसे मौके जब निरक्षर साक्षर-सा दिखे
व्यवहार और संस्कार से सम्मान अर्जित करना
एक अनपढ़ व्यक्ति यदि सच्चाई, ईमानदारी और आदर का पालन करता है, तो वह शिक्षित लोगों से भी अधिक सम्माननीय लगता है।
गहरी समझ और ज्ञान
कई बार अनपढ़ व्यक्ति जीवन के व्यवहारिक ज्ञान से संपन्न होते हैं, जो उन्हें बड़े-बड़े शिक्षित लोगों से अधिक समझदार बनाता है।
कर्मठता और आत्मनिर्भरता
बिना औपचारिक शिक्षा के भी जो लोग मेहनत करके अपनी आजीविका कमाते हैं और अपने परिवार को पालते हैं, वे वास्तव में साक्षरता के असली मापदंड पर खरे उतरते हैं।
सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना
अनपढ़ व्यक्ति कभी-कभी जात-पात, धर्म, भाषा की दीवारों को तोड़कर सभी को समान रूप से अपनाते हैं, जो एक शिक्षित समाज की निशानी है।
व्यावहारिक बुद्धिमत्ता
कई बार अशिक्षित व्यक्ति अपने अनुभव और सहज ज्ञान से ऐसी समस्याओं का समाधान निकाल लेते हैं, जिनका हल शिक्षित लोग भी नहीं ढूंढ पाते।
शिक्षा सिर्फ़ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हमारे आचरण और नैतिकता में भी झलकनी चाहिए। यदि पढ़ा-लिखा व्यक्ति अच्छे संस्कारों से रहित है, तो उसकी शिक्षा व्यर्थ है। वहीं, यदि एक अनपढ़ व्यक्ति अपनी बुद्धिमत्ता, ईमानदारी और शिष्टाचार से जीवन को सही दिशा देता है, तो वह वास्तव में शिक्षित कहलाने योग्य है।