अपनी अपनी राह
ज्ञान का प्रकाश आने दो

अपनी अपनी राह

।।अपनी-अपनी राह।।

।।सच्चाई।।

लिखना सब जानते हैं, पर पढ़ना जानता बिरला ही,

बोलना सब जानते हैं, पर सुनना जानता बिरला ही,

अरे! लिखने-बोलने से कुछ नहीं होता,  ज्ञान के सागर में तो,

पढ़ने और सुनने वाला ही, डुबकी लगाता कोई बिरला ही।।

परीक्षाएँ

परीक्षाएँ खत्म होने वाली हैं, छुट्टियाँ लगने वाली हैं,

चारों ओर देखो तो, शिक्षण संशय खाली-खाली है,

प्यारे बच्चों छुट्टियों में घर पर,बेकार मत बैठे रहना,

खुब मन लगा के पढ़ना,अभी बापू की ख्वाहिशें खाली है।।

ज्ञान का प्रकाश आने दो

रचनाकार

कवि मुकेश कुमावत मंगल टोंक।