आर्ट वर्क को लेकर टॉक शो आयोजित

आर्ट वर्क को लेकर टॉक शो आयोजित

कला संवाद – नवीकरणीय कल्पनाएँ

प्रस्तावना

कला मात्र सौंदर्य की नहीं, बल्कि चेतना की भी साधना है। जब कलाकार अपने रंगों में समाज, प्रकृति और भविष्य की चिंता को पिरोता है, तब रचना एक आंदोलन बन जाती है। आज पर्यावरण संकट, प्लास्टिक प्रदूषण और संसाधनों की अंधाधुंध खपत से जूझते विश्व में, नवीकरणीय पदार्थों का प्रयोग कला के क्षेत्र में नई दिशा और दृष्टि प्रदान करता है।

विवरण

इसी विचार को केंद्र में रखते हुए 6 अप्रैल 2025 को, दिल्ली स्थित राजघाट के गांधी दर्शन गैलरी में, वन कन्या आर्ट ग्रुप और राज आर्ट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष आर्ट टॉक और आर्ट कैंप का आयोजन किया गया। इस आयोजन का विषय था –

“कला कार्यों में नवीकरणीय पदार्थों का प्रयोग”

यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण रहा कि कला कैसे समाज और पर्यावरण के बीच एक संवेदनशील सेतु का कार्य कर सकती है।

आयोजन की झलकियाँ

विषयवस्तु पर संवाद

प्रतिभागियों और विशेषज्ञों ने नवीकरणीय पदार्थों के रचनात्मक उपयोग, उनके पर्यावरणीय लाभ और कलात्मक संभावनाओं पर सारगर्भित चर्चा की। यह संवाद न केवल कलात्मक था, बल्कि विचारशील और भविष्यद्रष्टा भी।

लैंडस्केप आधारित आर्ट कैंप

प्रतिभागियों ने प्राकृतिक दृश्यों और पर्यावरणीय विषयों को लेकर पेंटिंग्स बनाई, जिनमें उनकी भावनाओं, दृष्टिकोण और कला के प्रति समर्पण का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

नवीकरणीय पदार्थों से निर्मित गणेश प्रतिमाएँ

विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं भगवान श्री गणेश की वे अद्वितीय कलाकृतियाँ, जिन्हें पूरी तरह से नवीकरणीय सामग्री जैसे पेपर मेशे, प्राकृतिक रंग, जैविक वस्तुएँ आदि से निर्मित किया गया था। ये कलाकृतियाँ न केवल सौंदर्य की दृष्टि से समृद्ध थीं, बल्कि कलाकार विशेष की कल्पनाशीलता, स्थायित्व के प्रति प्रतिबद्धता, और संवेदनशील दृष्टिकोण की जीवंत अभिव्यक्ति थीं।

उद्देश्य और प्रेरणा

इस आयोजन का मूल उद्देश्य था –

“कला को प्रकृति के करीब लाना, और कलाकारों को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व से जोड़ना।”

यह एक सृजनात्मक प्रयास था, जिसमें कलाकारों ने न केवल नई सामग्री को अपनाया, बल्कि अपनी दृष्टि में भी नवीनता लाई। यह आयोजन कला को एक जागरूकता अभियान के रूप में प्रस्तुत करने की एक सुंदर कोशिश थी – जहाँ रंगों में पर्यावरण बोलता है, रेखाओं में संवेदना बहती है।

आइडिया

श्री राजेश कुमार डेढ़ा

पाठ्य उन्नयन

चैट जीपीटी

प्रस्तुति