बदलते परिवेश में हमारी भूमिका
श्री रोशनलाल छोकर

बदलते परिवेश में हमारी भूमिका

समाज में वैवाहिक संस्कार के बदलते के मायने और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

विवाह समाज का सबसे पवित्र, संवेदनशील और आधारभूत बंधन माना जाता है। यह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और मूल्यों का मिलन होता है। किंतु वर्तमान समय में यह पवित्र संबंध धीरे-धीरे सामाजिक दिखावे, फिजूलखर्ची और दहेज की प्रतिस्पर्धा में बदलता जा रहा है। यह स्थिति न केवल हमारे गुर्जर समाज, बल्कि सम्पूर्ण समाज के लिए गहन चिंतन का विषय बन चुकी है।

आज वैवाहिक समारोहों में दिखावे की होड़ ने कई परिवारों को आर्थिक कर्ज में धकेल दिया है। बेटियों के माता-पिता मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव झेलने को मजबूर हैं। अनेक बार यही दिखावा वैवाहिक तनाव, पारिवारिक कलह, तलाक और सामाजिक विघटन का कारण बन जाता है। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि विवाह की असली गरिमा सादगी, आपसी समझ और संस्कारों में निहित होती है, न कि भव्य आयोजनों और लेन-देन में।

सच्चाई यह है कि खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए दहेज नहीं, बल्कि संस्कार, विश्वास और सम्मान की आवश्यकता होती है। विवाह कोई व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि जीवनभर निभाया जाने वाला सामाजिक और नैतिक अनुबंध है। यदि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देना चाहते हैं, तो हमें यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि दिखावा, दहेज और अनावश्यक खर्च समाज को भीतर से खोखला कर रहे हैं।

अब समय आ गया है कि हम सामूहिक रूप से आत्ममंथन करें और अपने गांवों तथा शहरों में सरल, सादगीपूर्ण और दहेज-मुक्त विवाह को प्रोत्साहित करें।

समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब उसकी शुरुआत हम स्वयं से करें—

* विवाह में अनावश्यक खर्चों को सीमित करें और रिश्तों की अहमियत को प्राथमिकता दें।

* बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता का आधार बनाएं।

* दहेज, घरेलू हिंसा, तलाक और दहेज हत्या जैसे सामाजिक अभिशापों के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े हों।

यह स्मरण रखना आवश्यक है कि यदि हम आज अपनी चुप्पी नहीं तोड़ेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को हमारी गलतियों की कीमत चुकानी पड़ेगी। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जो सादगी, समानता, सम्मान और संस्कारों पर आधारित हो।

*दहेज नहीं, संस्कार चाहिए

*सरल विवाह, खुशहाल परिवार।

सूचना स्रोत

श्री रोशनलाल छोकर

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति

चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)
प्रस्तुतकर्ता