‘बनारस लिटरेचर फेस्ट’ एक भव्य कार्यक्रम

‘बनारस लिटरेचर फेस्ट’ एक भव्य कार्यक्रम

वाराणसी। काशी, जिसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में जाना जाता है, अपने आप में साहित्य, कला और संस्कृति की जीवंत धरोहर है। बनारस का साहित्यिक परिचय अपने अनूठे ज्ञान सौंदर्य और अद्भुत विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी श्रृंखला में ‘बनारस लिटरेचर फेस्ट’ का तीसरा संस्करण, वाराणसी के होटल ताज में राष्ट्र के प्रतिष्ठित नागरिकों और साहित्य, कला एवं संस्कृति प्रेमियों की उपस्थिति में धूमधाम से आरंभ हुआ।

प्रमुख विशेषताएँ

फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में शहर और देश के कई गणमान्य अतिथियों, साहित्यकारों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। इस आयोजन ने न केवल साहित्य प्रेमियों को बल्कि कला और संस्कृति से जुड़े सभी वर्गों को एक साझा मंच प्रदान किया।

फेस्टिवल का उद्घाटन समारोह बेहद गरिमामय और उत्साहजनक रहा। वक्ताओं ने वाराणसी की साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए काशी को “ज्ञान और साहित्य की भूमि” बताया।

प्रथम दिन के विविध आयोजन

फेस्टिवल के पहले दिन साहित्य और कला की विभिन्न विधाओं से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिन भर चले आयोजनों में कविता पाठ, साहित्यिक चर्चाएं, संवाद सत्र, और विशेष कला प्रदर्शनियां शामिल रहीं।

गणेश जी की अनूठी कलाकृतियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र

फेस्ट के पहले दिन का मुख्य आकर्षण रहीं दिल्ली से आए प्रसिद्ध कलाकार राजेश कुमार डेढ़ा की अद्भुत कला प्रदर्शनी।

राजेश सिंह डेढ़ा ने भगवान गणेश की 3000 से अधिक दुर्लभ और विविध भाव-भंगिमाओं वाली कलाकृतियाँ प्रदर्शित कर सबका मन मोह लिया।

इन कृतियों में गणेश जी के विभिन्न रूप जैसे ध्यानमग्न, नृत्यरत, चिंतनशील और हास्य भाव को बेहद जीवंत और कलात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

साहित्य और संस्कृति के गहराते सरोकार

बनारस लिटरेचर फेस्ट में जुटे साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने काशी की साहित्यिक परंपरा के वर्तमान और भविष्य पर विचार साझा किए। फेस्ट के माध्यम से काशी की गौरवशाली धरोहर को नई पीढ़ी से जोड़ने और समकालीन मुद्दों पर रचनात्मक विमर्श की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

नवोदित रचनाकारों को मिला मंच

इस फेस्टिवल की एक और खासियत रही नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करना। युवाओं की कविताएँ, लघुकथाएँ और विचार मंच से साझा हुए, जिन पर वरिष्ठ साहित्यकारों ने प्रतिक्रिया भी दी।

साहित्यिक चेतना का जीवंत प्रमाण

बनारस लिटरेचर फेस्ट का यह तीसरा संस्करण यह साबित करता है कि काशी की साहित्यिक चेतना आज भी उतनी ही सशक्त और जीवंत है। फेस्टिवल ने यह संदेश दिया कि साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़े रखने की परंपरा बनारस में निरंतर आगे बढ़ रही है।

आयोजन समिति के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के नामचीन साहित्यकार, कवि और कलाकार फेस्ट में भाग लेंगे।