भारत भू पर पधार रहे अमेरिकी नागरिकता प्राप्त शिशु के लिए मनोभाव

भारत भू पर पधार रहे अमेरिकी नागरिकता प्राप्त शिशु के लिए मनोभाव

प्रिंस शिशु ऋषि के अपने घर (भारत) आगमन पर आशीर्वादी मनोभाव

आज विदेश से शिशु मनोहर ऋषि देखो अपने घर आया।
प्यार भरा आशीष सभी से आज स्वयं उसने है पाया।
बाबा ओंकार द्युलोकी सूक्ष्म रूप धार कर आए,
अर्जुन ऋषि पौत्र दोनों को आशीषों के बंडल लाए।।

दादी अम्मा मधु आज तो नवल पौत्र लखकर हर्षाई।
आशीषों की पावन बूंदें ऋषि पौत्र पर हैं बरसाईं।
हेमंत देवना मम्मी पापा देखो कितने हैं हर्षाए,
अर्जुन और ऋषि पुत्रों को फिरते अपने कंठ लगाये।।

बुआ वसुन्धरा विशाल संग में स्वयं ऋषि समभाव लिये है।
भैया विराट विहान स्वयं भी मोहक ऋषि को छांव दिये हैं।
देवेन्द्र – सिमरन नाना नानी की भी है एक चमक निराली,
आशीषों से भरी स्वयं की झोली ही खाली कर डाली।।

समर्थ अपर्णा मामा मामी आशीषों की गठरी लाए।
देख भान्जे के मुखड़े को दीख रहे कितने हर्षाए।
दून घाटी का ही ना केवल आशीष गाँव का भी पाया है,
गुड से मीठा प्यार उन्होंने नवल शिशु पर बरसाया है।।

बाबा दादी सुशील अर्चना ने भी शिशु पर हाथ धरा है।
बुआ गार्गी अंशी और माधव चाचा ने प्यार करा है।
सम्बन्धी जो आए दूर से उनका है आशीष मनोहर,
बाबा कृष्ण की यही कामना ऋषि पर कृपा बरसे ईश्वर।।
आशीर्वाददाता
कृष्णदत्त शर्मा ‘कृष्ण’
निर्माण विहार, देहरादून
१२.०४.२५