भूमिका
भारत के दक्षिण-पूर्व में फैला अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और इतिहास का अनोखा संगम है। यह द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में स्थित 572 द्वीपों का एक समूह है, जिनमें से केवल कुछ ही आबाद हैं। घने हरे-भरे वर्षावन, सुनहरे रेतीले समुद्र तट, स्वच्छ नीला पानी और अनोखी जैव विविधता इसे पर्यटकों के लिए एक स्वर्ग बनाते हैं।
इस यात्रा में हम पोर्ट ब्लेयर के ऐतिहासिक सेलुलर जेल से लेकर हैवलॉक और नील द्वीप के रमणीय तटों तक का अनुभव करेंगे। यहाँ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, समुद्री खेलों का रोमांच और प्रकृति की अद्भुत छटा हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती है। तो आइए, इस रोमांचक यात्रा के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीपों की खूबसूरती को करीब से महसूस करें!
वृत्तान्त
हमारा प्यारा भारत वर्ष पराधीनता की बेड़ियों में दशकों जकड़ा हुआ रहा था। राष्ट्रशक्ति सर्वथा क्षीणबल हो चुकी थी। आर्यावर्त की यह भूमि अनेक कुरीतियों से आच्छादित हो चुकी थी। और भी अनेकानेक कारण रहे हैं। तपस्वी मनीषियों का यह उद्घोष हुआ ‘पराधीन सपनेहु सुख नाहीं।’
इस उद्घोष से ऐसी चिंगारी उठी कि स्वाधीनता आन्दोलन का देश में श्रीगणेश हो गया जो शताब्दियों तक चला। ज्ञात-अज्ञात महामानवों ने, साधु-सन्तों ने अपने प्राणों की आहुतियां दे डालीं, उन किशोर-युवा वीरों, समाजसेवी-जनों, कान्तिवीर पुरुषों एवं महिलाओं ने मृत्युदण्ड भी देश को आजाद कराने के लिये स्वीकार कर लिया। दण्डस्थल के रूप में ब्रिटिश शासन में तत्समय वह अण्डमान निकोबार स्थल, काले पानी की सजा के नाम से कुख्यात सजास्थल हो गया था। वह स्थल जो आज भारत के पूर्वी छोर पर स्थित है, सैलुलर जेल अण्डमान निकोबार। वरिष्ठ नागरिक संस्थान के ट्रस्टी सहयोगी प्रबन्धक श्री कुन्दन लालजी सेठी ने इस पुण्यस्थली शहादत स्थली पर चलकर महामानव देशभक्त शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का विचार रखा जो सहज ही परवान चढ़ गया। प्रधानाचार्य श्री ओ०पी० शर्मा सर का आग्रह था कि समय बहुत कम है, अनुकल मौसम नहीं मिलेगा, चलने का तुरन्त प्रोग्राम बनायें। और! संस्थान के यात्रीदल की सूची तैयार हो गई।
यात्रीदल की सूची मिलते ही अग्रिम भुगतान कर, यात्रा दिवस (दिनांक 22 से 28 मार्च 2018 तक) निश्चित कर दिया गया। श्री धनावतजी के द्वारा तुरन्त आरक्षण व्यवस्था अग्रिम करा लेने से, यात्रा बहुत सस्ती व्ययसाध्य नहीं बनी।
इस यात्रा के संस्मरण के रचनाकाल में जब भी मैंने लेखनी को अपने स्वाभाविक आलस्य में विराम दिया है कि
“भला यह संस्मरण किसी के क्या काम आने वाला है?”
मुझे कलम उठाने के लिये तत्वान्वेषी प्रिन्सिपल साहिब श्री ओ.पी. शर्मा जी का प्यार भरा प्रोत्साहन मिला।
आभार सूचीबद्ध करने की औपचारिकता नहीं, आभार व्यक्त करने की व्यग्रता लिये लेखनी उठाई तो एकाएक समझ में आया कि लेख नहीं, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संस्थान के यात्रीदल का यात्रा वृतान्त संस्मरिणिका के रूप में उपलब्ध करवाना उचित है।
देशभक्त बलिदानी वीरों को श्रृद्धांजलि देने के पुनीत कार्य करने के लिये यह वरिष्ठ नागरिक दल की यात्रा है। यत्र-तत्र डायरी के कुछ पन्नों को छोड़ दूं तो मुख्यतः स्मृति आधारित यह यात्रा वृत्तान्त कहीं भी काल्पनिक नहीं है, हां, तारीख, दिवस में सामान्य हेर फेर हो गया हो, तो उसके लिए में क्षमा प्रार्थी हूँ, अस्तु।
संस्थान के यात्रादल में कुल नौ सदस्य थे। जिनके नाम का भी उल्लेख पूर्व ही में कर देना उचित रहेगा, जिनका जिक्र यात्रा काल में बार बार आवेगा। निम्न सदस्यगण-
सर्वश्री के.एल. सेठी जी (संस्थान के संस्थापक सदस्य, दल के टीम मैनेजर), श्री नरेन्द्र कुमार जी (पूर्व अध्यक्ष, तथा भू.पू. निदेशक कृषि विभाग), श्री के.पी. जी शर्मा (सदस्य पूर्व अति. निदेशक, कृषि विभाग), श्री (प्रधानाचार्य) ओमप्रकाश जी शर्मा (संस्थान के वर्तमान अध्यक्ष), श्री एल.एन धनावतजी (संस्थान के सदस्य तथा पूर्व सेण्ट्रल एक्साइज अधिकारी), श्री मातादीन जी शर्मा (संस्थान के सदस्य), श्री बदन सिंह जी (अतिथि व रेलवे कॉन्ट्रैक्टर, जयपुर), श्री एच.एल. मीना जी (अधिशासी अभिन्ता, विद्युत प्रसारण निगम) और शिव कुमार कुर्मी पाटीदार (स्वयं)।
यह यात्रा, संस्थान स्थल से, दल के यात्री सदस्यों को दो टैक्सी से उनके डेस्टीनेशन पाइण्ट से लेते हुए दिल्ली के लिए दिनांक 21.03.2018 सांयकाल 9.30 को आरम्भ हुई। दिल्ली एयरपोर्ट से अण्डमान निकोबार पोर्ट ब्लेयर के वायुयान में सवार होना था। टैक्सी ने हमें दिनांक 22.03.2018 को प्रातः 2.30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतार दिया। यात्रा दल में दो सदस्यों को छोड़कर सभी सदस्यों की ही यह पहली हवाई यात्रा थी। प्रातः 2.30 से 8.00 बजे तक का समय दिल्ली एयरपोर्ट पर व्यतीत किया। हवाईजहाज उतरते और उड़ान भरते देखते रहे। एयरपोर्ट का काफी बड़ा और यात्रीगणों से भरा आगन्तुक हाल था। प्रातः चाय का सेवन करने कैण्टीन में पहुंचे, तो 120/रुपये की चाय का कप, काफी का 180/- रुपये का मिला। विस्तारा के वायुयान से प्रातः 7.30 पर उड़ान भरनी थी किन्तु उसने 8.00 बजे उड़ान भरी।
विस्तारा वायुमान की टिकिट काउण्टर विण्डो पर हम सबसे पहले खड़े थे। टिकिट नम्बर, पीछे की सीट से देना चालू हुआ और वह पीछे की सीटें सुखद रहीं। वहां से नीचे के पूरे दृश्य देखे जा सकते थे, बीच की सीटों वालों के खिड़कियों के नीचे वायुमान के पंख आने से नीचे के दृश्यों को देख पाना लगभग असंभव था।
वायुयान प्रातः 8.00 बजे रवाना हुआ और कोलकाता 10.30 बजे पहुंचा। कोलकाता के यात्रीगण को उतारकर अण्डमान के यात्रीगण को लेकर पोर्ट ब्लेयर पर मध्याह्न 12.55 पर उसने हमको उतार दिया। वायुमान में हमें कोलकाता के बाद अच्छा गर्म नाश्ता व चाय/काफी उपलब्ध करवा दी गई थी।
वायुमान से यात्रीहाल तक सभी यात्रियों को ले जाने के लिए लोअर-फ्लोर बसें आ जाती हैं, जो अपना अपना ट्रैक नहीं छोड़तीं।
पोर्ट ब्लेयर पर, वायुयान से निकलने के बाद बाहर चारों ओर बहुत सुन्दर हरियाली भरी हुई जगह दिखाई दी। यात्री दल को लेने के लिये टैक्सी अटेण्डेन्ट उपलब्ध थे। वे हमें पूर्व आरक्षित बोर्डिंग स्थल ‘होटल वेस्टर्न पार्क (HOTEL WESTERN PARK) स्थल पर लेकर गये। सैलुलर जेल देखने के लिये सांयकाल 3.00 बजे का समय निर्धारित कर दिया गया था। अल्पाहार आदि के बाद हम निर्धारित समय पर जेलस्थल पर पहुंच गये।
जेल देखने के लिये प्रवेश टिकिट पहले से बनवा लिये गये थे। जेल कैम्पस का कम्पाउण्ड वाल काफी ऊंचा था। जिस पर उस काल खण्ड की चित्रकारी हो रही थी। जेल के प्रवेश द्वार से आगे बढ़ते ही एक बड़ी छतरी के अन्दर बलिदानियों की स्मृति में अनवरत जलती मशाल थी। प्रांगण में आगे की ओर बढ़े तो विशाल ऊंची तीनों फ्लोर पर, लम्बी लम्बी कोठरियां, उनमें छोटा सा बहुत ऊंचा रोशनदान और उसके नीचे एक नाला। पानी का बड़ा कटोरा (तसला) कह सकते हैं, थे। तीसरी मंजिल पर एक कोने वाला सैल (कोठरी) वीर दामोदर सावरकर जी की थी। उसके बगल में ही उनके भाई की कोठरी थी। दोनों को आपस की कोठरी में कौन है ज्ञान नहीं था, कि बगल में कौन कैदी है। दरवाजे मोटे-मोटे सरियों के बने हुये थे जिनके कुन्चे सामने नहीं खुलकर, गेट की दीवार से दो फीट दूर दीवार में आगल कुन्दे से खुलते थे। सावरकर जी की कोठरी के नीचे प्रांगण में फांसी का तख्ता बना हुआ था जिस पर मृत्युदण्ड पाये कैदी को फांसी दी जाती थी। सभी कोठरियों के बाहर उस कैदी का पूरा नाम मय विवरण पट्टिका लगा हुआ/लगी हुई थी। चौथी तल पर एक गुमटी बनी हुई थी जिस पर सामान्य व्यक्ति चढ़ नहीं सकता, बहुत ऊंची थी। प्रधानाचार्य जी, घनावत जी और मैं ऊपर चढ़े। वहां पर एक बहुत बड़ा पीतल का घण्टा था। जानकारी दी गई जब किसी कैदी को फांसी होती तो इसे जोर जोर से बजाया जाता था। एक से अधिक कैदी को फांसी होती तो फिर जोर जोर से बजाया जाता था। जेल की छत से हमने फोटोज भी लिए। इसके पश्चात् हमने जेल के अन्दर प्रदर्शनी देखी। इसके पश्चात जेल के बाहर निकलकर कारव्यान्स कोव (Corbyn’s Cove Beach) बीच ,जो जेल के पूर्वी ओर बना हुआ है भी देखा।
तत् समय इसके किनारों पर बड़े-बड़े पत्थर लाने का कार्य कैदियों से लिया जाता था। बीच बहुत सुन्दर था। Sound & Light Show (साउण्ड एण्ड लाइट शो) देखने के लिये हमें उसी टिकिट के दूसरे भाग से प्रवेश लेकर प्रांगण में 7.30 बजे तक बैठना था। शो का विस्तृत वर्णन न कर संक्षिप्त में उल्लेखित करना चाहूंगा। स्वतंत्रता सेनानियों के वीरतापूर्ण संघर्षों का सचित्र चित्रण साउण्ड एण्ड लाइट शो में देखने को मिला। यह शो नहीं देख पाते तो अण्डमान की सैलुलर जेल जो स्वाधीनता संग्राम के वीर सपूतों का शहीद स्थल तीर्थस्थल की आधी-अधूरी जानकारी प्राप्त होती।
मैंने देखा कि जब शो समाप्ति की ओर था और समाप्त हुआ तो एक सन्नाटा सा पसरा दिखा। शो प्रांगण में वीर सपूतों के बलिदान पर, पूरा प्रांगण श्रद्धांजलि की श्रद्धावनत मुद्रा में था जो राष्ट्रगीत के आरम्भ होने पर टूटा। तत्पश्चात् रात्रि 9.00 बजे लगभग हम अपनी टैक्सियों से बोर्डिंगस्थल की ओर रवाना हो गये।
23 मार्च 2018
आज की यात्रा में हमें जल्दी सुबह अण्डमान से हैवलाक आईलैण्ड (by Luxary Cruise to Havelock Island) के लिये प्रस्थान करना था। हमारा अटेण्डेण्ट गाइड सुबह 7.30 बजे टैक्सी के साथ उपस्थित था। होटल चैक आउट कर हम डाइनिंग हॉल में अल्पाहार के लिये पहुंचे। सैल्फ सर्विस थी, अतः जल्दी फ्री हो गये। हमारे टिकिट, गाइड पहले से ले चुका था। यात्रा पूर्व प्रत्येक सदस्य की आई डी. जांच हुई। क्रूज पर सवार होने तक चार जगह जांच हो चुकी थी। अपने साथ एक बैग रख सकते थे, अन्य बैग्स जमा करा दिये गये थे।
यह मेरे जीवन की पहली समुद्री यात्रा थी। जहां तक संभव हो मैं खिड्की के पास बैठने की जगह चुनता था। यात्रीगण खड़े होकर भी बाहर देखते थे। क्रूज काफी पानी उछालता, तीव्रता से आगे बढ़ रहा था। वायुयान की यात्रा में वायुयान में घुमना प्रतिबन्धित रहता है, ऐसा यहां नहीं था। क्रूज ज्यों ज्यों विशाल समुद्री मार्ग पर बढ़ा, क्षितिज से क्षितिज तक सिर्फ गहरा नीला हल्का सा लहराता शांत समुद्र। मैं अपनी कल्पनाओं में था. समुद्र में खूब ऊंची लहरें उठती हैं या उनमें बहुत तेज बहाव होता है पर समझ में आने लगा कि ऐसा तो केवल समुद्र और धरती के मिलनस्थल पर होता है अथवा समुद्र में तूफान आने पर। नीले सागर को देखकर यह भी आभास हुआ कि फाउण्टेन पेन की नीली स्याही को क्यों नेवी ब्लू इंक कहते हैं। श्री घनावत जी अपने साथ बहुत अच्छे क्वालिटी का बायनोक्यूलर लेकर गये थे। उससे दूरस्थ चलते जहाज क्रूज, पहाड़, समुद्री दिशा सूचक यंत्रों को बहुत ही साफ बायनोक्यूलर से देखते थे। लगभग तीन घण्टे की यात्रा के बाद क्रूज हैवलाक आईलैण्ड पर पहुंच गया।
हमारा एनवाय पोर्ट पर टैक्सी लेकर प्रतीक्षारत था। पूर्व-निर्धारित बोर्डिंगस्थल ‘गोल्ड स्टार बीच रिसोर्ट (GOLD STAR BEACH RESORT) पर चैक इन किया। मध्याह्न भोजन किया विश्राम आदि कर हम एशिया के सुन्दरतम राधानगर बीच पर पहुंचे। प्राकृतिक सुरम्यता लिए बहुत ही सुन्दर बीच था। हमारे गाइड ने रिसोर्ट पर अवगत कराया दिया था कि समुद्र में स्नान करना चाहें तो कपड़े लेकर चल सकते है। मैंने जयपुर से चलते समय तीन जोड़ी जूते, चप्पल, सेण्डिल रख लिये थे। बाजार में चलने के लिये जूते चाहिये। 150-200 मीटर समुद्र के पानी तक पहुंचने के लिये गर्म समुद्री सफेद बजरी पर सैण्डिल और रित्तोर्ट में चप्पल। समुद्र में, स्नान के लिये यहाँ प्रधानाचार्य शर्माजी, श्री के.पी. शर्माजी, श्री मातादीन जी और मैं उतरे। श्री के.पी. शर्माजी और मातादीन जी बहुत जल्दी बाहर आ गये। डेढ़ घण्टे वहां रहने के पश्चात् प्रधानाचार्य जी और मैं बाहर आ गये। तैरने वालों पर कोस्ट गार्ड पानी में कड़ी निगाह रखते हैं और निर्धारित स्थल से आगे नहीं जाने देते। समुद्र स्नान के बाद साफ पानी से नहाना अत्यन्त आवश्यक होता है। अतः वहां पर एक निजी संस्था का बाथरूम था, जिस पर स्नान दर 100/- रूपये थी।
टीम मैनेजर सेठी जी साहिब अल्पाहार में शुद्ध खाद्य पदार्थ की पहले जांच पड़ताल कर लेते थे, तत्पश्चात् उपयोग की अनुमति देते। पूरे दिन का समय प्रबन्धन, भोजन कहां पर लेना, कब लौटना है। टैक्सी को उसी अनुरूप बोर्डिंग पोर्च में आने का प्रोग्राम देते। भ्रमण काल में प्राकृतिक स्थलों की मनोरमता व भव्यता ऐसी मिलती थी कि बोर्डिंग स्थल पर भी समय पर पंहुचना है यह अक्सर ध्यान नहीं रहता था। सांयकाल हम बोर्डिंग गोल्ड स्टार रिसोर्ट पर वापिस लौट आये।
अण्डमान के बीच यात्रा का अनुकल समय अक्टूबर से मध्य मार्च तक रहता है। मार्च में काफी गर्मी आ चुकी थी।
24 मार्च 2018
हमने आज बोर्डिंग रिसोर्ट पर ही प्रातः ब्रेकफास्ट लिया और लगभग 11.00 बजे ऐलेफण्ट बीच (ELEPHANT BEACH) के लिये प्रस्थान किया। ऐलेफण्ट बीच के लिये एक घण्टा समुद्र में नाव की सवारी करके पहुंचा जाता है। अतः हम एक नाव जिसका तला पारदर्शी फाइबर का था, उसमें बैठे। उसमें नाविक ने सबको सेफ्टी जाकेट पहनाकर बिठाया। मुझे डर भी लगा छोटी नाव से जो बड़े जनरेटर से चलेगी और समुद्र की यात्रा करनी है।
यात्रा के दौरान ज्ञात हुआ ऐलेफण्ट बीच के मध्य विश्व की सबसे अच्छी कोरल पाई जाती है। कोरल की अनेक चट्टानें मूंगा जैसे रंग की मखमली जैसी परत चढ़ी हुई, गहरे हल्के पीले व नारंगी रंग की भी थीं। अच्छी धूप खिली हुई थी और पानी में नाविक अपनी नाव के पारदर्शी तल से कोरल दिखाता चल रहा था। बतला रहा था इनको बनने में एक हजार साल का समय लग जाता है जो हमें बायनोकुलर से बहुत साफ और सुन्दर दिखाई दीं। एक घण्टा का समय यों ही निकल गया और नाव एलेफण्ट बीच के किनारे पर पहुंच गई। सबको डेढ फीट पानी में समुद्र किनारे उतार दिया गया। समुद्र से धरातल सड़क तक 100 मीटर समुदी सफेद गर्म बालू थी। सड़क पर चल कर दृश्य देखते मुख्य बीच पर पहुंचे।
राधानगर बीच की तरह यह बीच कम विस्तार वाला था। समुद्र स्नान के लिये प्रधानाचार्य शर्मा जी, मातादीन जी और मैं पहले से उत्सुक थे।
मैंने समुद्र के अन्दर देर तक डूबकी लगाने के लिए एक उपकरण (snorkelling) रेण्ट पर लिया। यह उपकरण मुंह में लगाने की लंबी नली जो तैरते समय पानी के नीचे सांस लेने में मदद करती है। पानी में काफी देर तक रहकर देख सकते हैं। विशाल एक्वेरियम जैसी दृश्यता दिखाई दी। उपकरण पाइप का मास्क मुंह में जोर से दबाकर रखना पड़ता था। अतः असहजता होती और कुछ देर में पानी से बाहर आना पड़ता था। साफ पानी से स्नान करने बाथरूम पहुंचे तो दर 150 रुपये थी। तत्पश्चात वोट से वापस एलेफन्ट बीच लौटे और भ्रमण करते हुये बोर्डिंग होटल पर आ गये।
25 एवं 26.03.2018
हैवलाक से नील आईलैण्ड (NEIL ISLAND) हैवलाक आईलैण्ड से प्रातः नाश्ता करके हमने मध्याह्न पूर्व नील आईलैण्ड के लिए क्रूज से प्रस्थान किया और लक्ष्मणपुर बीच पर पहुंचे। यह भी कोरल का समुद्र क्षेत्र था। हम क्रूज में थे अतः कोरल नहीं देख सके। लक्ष्मणपुर बीच-प्रथम पर बोर्डिंग होटल था, उसमें निवास किया। समय अधिक था। अतः दो सरकारी कार्यालयों के कैम्पस भी देखे। साफ सुथरे हरियाली से भरपूर, बाहर बाजार में भीड़ आदि नहीं, पर्यटकों को लाने ले जाने वाली टैक्सियां देखने में आती थीं। एक होटल में अल्पाहार लिया। तत्पश्चात बोर्डिंग होटल पर आ गये।
नील आईलैण्ड का लक्षमणपुर बीच, भरतपुर बीच और सीतापुर बीच प्राकृतिक सौन्दर्य से भरे हुये थे।
यहां पर सबसे पहले लक्ष्मणपुर बीच पर गये। अत्यन्त सुन्दर प्राकृतिक रूप से पेडों से बना एक बहुत बड़ा गेट देखने को मिला। इस गेट तक देखने गये तो रास्ते में ही अनेक केलों के वृक्ष खड़े थे, नारियल के पेड़ जिन पर नारियल बेतहाशा लटक रहे थे। सुपारी के पेड़ जिन पर टिण्डा, टमाटर जैसे आकार की सुपारियां थीं। एक म्यूजियम था।
अतः हम पूछताछ करना चाहते थे कि समुद्र में स्नान के बाद साफ पानी से नहाने का चार्ज क्या होगा। दर 200/- रूपये पर बाल्टी बतलाई। पूछने पर पता चला कि साफ पानी की समस्या है, दूर से पानी आता है। वस्तुतः हमें शाम तक इस बीच पर रुकना था। दूसरी ओर जाकर सूर्यास्त का दृश्य देखना था । अतः यहां समुद्र स्नान छोड़ दिया। यहाँ पर मोटर साइकिल, स्कूटर, साइकिल सुबह से शाम तक किराये पर भी मिलती है। भरतपुर बीच ज्यादा सुन्दरतम बीच था। जब हम सूर्यास्त देखने दूसरी और पहुंचे तो एक बहुत लम्बे टीले पर काफी पर्यटक थे, उसके 200 मीटर दलान पर नीचे समुद्र था। सूर्य अस्त होते समय समुद्र ऊंचा दिखता है और सूरज उसके पीछे उतरता। यह दृश्य आते आते बादल आ गये, और हम सारे पर्यटक उस दृश्य से महरूम हो रहे। इस बीच पर सन्ध्या काल आ गया था, टैक्सी थोडी विलम्ब से भी आई।
दूसरे दिन भरतपुर बीच जो सूर्योदय के दृश्य देखने के लिए ज्यादा पसंदीदा है किन्तु हमारी अनुकूलता नहीं थी। अतः एवं एक दूसरे बीच पर पहुंचे, जिसका नाम काला पत्थर बोला गया (सही नाम स्मृति से ओझल हो गया) देखने गये। यहाँ बीच के किनारे पर अच्छी क्लालिटी के शंख बिक्री के लिये उपलब्ध थे। क्रय भी किये, बजाकर देखे भी गये, एक म्यूजियम था किन्तु बन्द। बाहर समद्री ज्ञान के बारे में बड़े बड़े बोर्ड पर जानकारियों पढ़ने को मिली। वहीं पर हमें दो कोस्टगार्ड मिले जिन्होंने हमें पूरे पर्यटक स्थलों की अच्छी अच्छी जानकारियां कराई। हमें वापस मध्याह्न वाय क्रूज से पोर्टब्लेयर भी लौटना था। अतः बीच से बोर्डिंग होटल पर आ गये। और चैक आउट किया। और! दिनांक 26.03.2024 की सायं हम नील आईलैण्ड से अण्डमान पोर्ट ब्लेयर बोर्डिंग स्थल पर आ गये। सांयकाल होटल में भोजन किया और विश्राम।
27.03.2018
सुबह बोर्डिंग होटल से ब्रेक फास्ट करके हमें प्रातः 9.30 पर पोर्ट ब्लेयर पहुंचना था। अतः होटल चैक आउट कर एयरपोर्ट पर उपस्थित हो गये। इण्डिगो के वायुयान से प्रातः 1130 पर दिल्ली के लिये प्रस्थान करना था। जिसे चैनई एयरपोर्ट पर लैण्ड कर दिल्ली की सवारी लेकर उड़ान भरनी थी। चेन्नई एयरपोर्ट से इण्डिगो की फ्लाइट ने सांयकाल 5.30 पर चलकर 8.00 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा। यहाँ पर जयपुर के लिये टैक्सी हमारा इन्तजार कर रही थी। जयपुर सकुशल प्रभात काल में टैक्सियों ने दल के यात्रियों को उनके निवासस्थल पर उतार दिया।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण संस्थान, प्रतापनगर के यात्रीदल की सद्-उद्देश्यपरक यह यात्रा सकुशल सम्पन्न हुई।
रचनाकार
शिवकुमार कुर्मी पाटीदार
30. केडियाज दी कुनबा नीयर एसडीएम कोर्ट,
सांगानेर, जयपुर-302029 (राजस्थान)