छंद

छंद

नमन मंच

छंद चवपैया एक

चलना सिखलाती, गीत सुनाती, माता जग में प्यारी।

लगती है अच्छी, मन को सच्ची, मूरत इसकी न्यारी।

सबको हर्षाती, कदम बढ़ाती, नभ को छूती नारी।

घर घर को मिलाती, वंश बढ़ाती, महिमा इसकी भारी।

छंद चवपैया दो

खुशी खुशी रहती, मन की कहती, लक्ष्मी कहलाती है।

ऐसी ही नारी, जग की सारी, खुशियां घर लाती है।

जो डींगें हाँकती, सदा भागती, नखरे दिखलाती है।

न किसी की माने, मन की ठाने, कभी न सुख पाती है।

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’

मालपुरा

टोंक (राजस्थान)

प्रस्तुति