संक्षेप में व्यक्तित्व (Personality in a Nutshell)
प्रतिभाग
डॉ. सतीश कुमार शास्त्री एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं—एक समर्पित शिक्षक, कवि, प्रखर ज्योतिषाचार्य, समाजसेवी, संवेदनशील साहित्यकार और भारतीय संस्कृति के सच्चे संवाहक। उनका जीवन ज्ञान, सेवा और संस्कारों का सुंदर संगम है। वे केवल अपने कार्यों से नहीं, अपितु अपने विचारों से भी समाज को दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत हैं।
मैं, डॉ सतीश कुमार शास्त्री, हरिद्वार, (उत्तराखंड)
अपने जीवन के उन विशेष क्षणों को शब्दों में संजोते हुए अत्यंत भावुक और गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूँ, जब 15 मार्च 2026, रविवार को “ऊर्जा ज्योतिष सम्मेलन चंडीगढ़” में मुझे सम्मानित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि मेरे वर्षों के अध्ययन, साधना और ज्योतिष के प्रति समर्पण का सार्वजनिक स्वीकार था।
उस दिन “ज्योतिष प्रांगण” में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम अपने आप में ऊर्जा, आस्था और ज्ञान का संगम प्रतीत हो रहा था। ऊर्जा ज्योतिष की संस्थापिका श्रीमती पूनम शर्मा द्वारा जब मुझे अंगवस्त्र ओढ़ाकर और टीम द्वारा तिलक आदि लगाकर सम्मानित किया गया, तब मुझे लगा मानो मेरे भीतर की साधना को समाज ने स्नेहपूर्वक स्वीकार किया है। वह क्षण मेरे लिए केवल सम्मान का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के और अधिक विस्तार का संकेत था।
इस समारोह का सबसे प्रेरणादायक और अविस्मरणीय पल वह रहा, जब मुझे पंजाब के वर्तमान महामहिम राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया जी के कर-कमलों से सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिला। उनके व्यक्तित्व की गरिमा और उनके हाथों से मिला यह सम्मान मेरे लिए जीवन की एक अमूल्य निधि बन गया। उस क्षण ने मुझे यह विश्वास दिलाया कि यदि साधना सच्ची हो, तो उसे पहचान अवश्य मिलती है।
इस पूरे आयोजन ने मेरे अंतःकरण में एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार किया है—कि मैं ज्योतिष के माध्यम से समाज के कल्याण, मार्गदर्शन और सकारात्मक परिवर्तन के लिए और अधिक निष्ठा से कार्य करता रहूँ। यह सम्मान मेरे लिए एक पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है, जहाँ हर कदम पर मैं अपने ज्ञान को समाज की सेवा में समर्पित कर “भारतीय जान परम्परा” अक्षुण्ण रहूँगा।
वैसे तो ज्योतिष विज्ञान और भारतीय संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए असंख्य राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले, परन्तु इस बार अविस्मरणीय रहा। देश के कौने कौने से पधारे ज्योतिष के मूर्धन्य विद्वानों द्वारा अनेकों विधाओं द्वारा विभिन्न गूढ़ विषयों पर चर्चा की।
झलकियाँ


**विशेष साक्षात्कार**
**डॉ. सतीश कुमार शास्त्री: एक व्यक्तित्व, अनेक आयाम**
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प्रश्न 1: डॉ. शास्त्री जी, आपके जीवन की मूल प्रेरणा क्या रही ?**
**उत्तर:** मेरे जीवन की मूल प्रेरणा भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मानव सेवा रही है। बचपन से ही गुरुकुलीय परंपरा में अध्ययन ने मुझे संस्कार, अनुशासन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराया। यही कारण है कि मैंने शिक्षा, साहित्य और ज्योतिष के माध्यम से समाज को दिशा देने का प्रयास किया।
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**प्रश्न 2: आपने शिक्षा और ज्योतिष—दोनों क्षेत्रों में संतुलन कैसे बनाया ?**
**उत्तर:** मेरे लिए शिक्षा और ज्योतिष दोनों ही ज्ञान के माध्यम हैं। शिक्षा व्यक्ति को तार्किक बनाती है, जबकि ज्योतिष उसे आत्मचिंतन और जीवन की गहराई समझने में सहायता करता है। मैंने दोनों को पूरक रूप में अपनाया, जिससे मैं विद्यार्थियों और समाज दोनों का मार्गदर्शन कर सका।
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**प्रश्न 3: आपके अंतरराष्ट्रीय अनुभवों ने आपके दृष्टिकोण को किस प्रकार प्रभावित किया ?**
**उत्तर:** विदेश यात्राओं, विशेषकर फीजी, न्यूजीलैंड और अन्य देशों में भारतीय संस्कृति और हिन्दी के प्रचार-प्रसार के दौरान मैंने अनुभव किया कि हमारी जड़ें कितनी मजबूत हैं। इससे मेरा विश्वास और दृढ़ हुआ कि भारतीय संस्कृति वैश्विक स्तर पर मानवता को जोड़ने का कार्य कर सकती है।
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**प्रश्न 4: आपको अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। आप इन्हें कैसे देखते हैं ?**
**उत्तर:** मेरे लिए सम्मान लक्ष्य नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत हैं। ये पुरस्कार यह बताते हैं कि समाज आपसे और अधिक अपेक्षा करता है। मैं इन्हें अपने कार्य के प्रति प्रेरणा के रूप में देखता हूँ, न कि उपलब्धि के अंत के रूप में।
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**प्रश्न 5: आपने शिक्षा क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय दिया है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अनुभव क्या रहा ?**
**उत्तर:** सबसे महत्वपूर्ण अनुभव यह रहा कि शिक्षा केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण करना है। जब मेरे विद्यार्थी समाज में अच्छा कार्य करते हैं, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।
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**प्रश्न 6: सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में आपकी सक्रियता का मुख्य उद्देश्य क्या है ?**
**उत्तर:** मेरा उद्देश्य समाज को उसकी जड़ों से जोड़ना है। चाहे वह योग हो, पर्यावरण संरक्षण, हिन्दी का प्रचार या सांस्कृतिक जागरूकता—इन सभी के माध्यम से मैं एक समृद्ध और जागरूक समाज का निर्माण देखना चाहता हूँ।
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**प्रश्न 7: कोविड-19 जैसे कठिन समय में आपने जो कार्य किए, उनके पीछे आपकी सोच क्या थी ?**
*उत्तर:** उस समय सबसे बड़ी आवश्यकता मानसिक और आत्मिक शक्ति की थी। मैंने लोगों को जागरूक करने, उनमें सकारात्मकता और आत्मबल बढ़ाने का प्रयास किया। मेरा मानना है कि संकट के समय सेवा ही सबसे बड़ा धर्म होता है।
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**प्रश्न 8: कोविड-19 जैसे कठिन समय में आपके द्वारा किए गए किसी एक विशेष कार्य के विषय में बताइए ?**
*उत्तर* सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र नई दिल्ली (संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार) के संयुक्त तत्वाधान में “आजादी की कहानी बच्चों की जुबानी” विषय पर सात देशों के बच्चों के अभिभावकों से अनुमति लेकर उनके देश की आजादी के विषय में काव्य पाठ करवाया।
जिसमें (भारत,फीजी, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, ओमान, नेपाल, तंजानिया) आदि देशों के बच्चों ने प्रतिभाग किया। बच्चों का यह काव्यपाठ “आज़ादी के अमृत महोत्सव के लिये चुना गया”, तदोपरांत 28 सितम्बर 2021 को रेडियो पर “मन की बात” कार्यक्रम में श्री नरेन्द्र मोदी जी माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की गई।
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**प्रश्न 9: आपकी आगामी योजनाएँ क्या हैं ?**
**उत्तर:** वर्तमान में मेरी पुस्तक “गिरमिटया: एक प्रेम कहानी” प्रकाशनाधीन है, जो भारत और फीजी के संबंधों पर आधारित है। साथ ही, मैं इसे फिल्म के रूप में भी प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ, ताकि यह संदेश अधिक व्यापक स्तर तक पहुँचे।
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**प्रश्न 10: युवा पीढ़ी के लिए आपका क्या संदेश है ?**
**उत्तर:** युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, भाषा और मूल्यों से जुड़कर आधुनिकता को अपनाना चाहिए। केवल सफलता ही नहीं, बल्कि सार्थकता को लक्ष्य बनाएं। जीवन में धैर्य, परिश्रम और सेवा की भावना ही आपको सच्ची ऊँचाइयों तक ले जाएगी, ताकि हम अभय होकर “विश्व बंधुत्व” की राह पर निकल सके।
सूचना स्रोत
श्री सतीश शास्त्री जी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 


