एक सपना जो हकीकत बन गया

एक सपना जो हकीकत बन गया

लिटिल चैम्प टैलेंट शो

सपना, जो हकीकत बन गया

मुजफ्फरनगर के होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल के संस्थापक प्रवेंद्र दहिया हमेशा से कुछ अलग करने की सोच रखते थे। उनका मानना था कि बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उनकी छिपी हुई प्रतिभा को भी निखारने के लिए एक मंच देना चाहिए। वे अक्सर सोचते थे,

“अगर बच्चों को अपनी कला और हुनर दिखाने का मौका मिले, तो उनका आत्मविश्वास कितना बढ़ जाएगा!”

एक नई पहल और असमंजस

एक दिन, उन्होंने स्कूल स्टाफ के साथ बैठक बुलाई और अपने विचार साझा किए—

“हम एक ऐसा मंच तैयार करें, जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी प्रतिभा दिखा सकें।”

शुरुआत में कुछ शिक्षकों को संकोच हुआ यह सोचकर कि

“क्या बच्चे तैयार हो पाएंगे?” या कि “क्या माता-पिता सहयोग करेंगे?”

ऐसे सवाल उठने लगे। लेकिन प्रवेंद्र दहिया अपने निर्णय पर अडिग थे। उन्होंने समझाया,

“ऐसे कार्यक्रम बच्चों की झिझक को दूर करेंगे और माता-पिता भी समझेंगे कि उनके बच्चों में कितनी संभावनाएं छिपी हैं।”

लिटिल चैम्प टैलेंट शो का आयोजन

आखिरकार, महीनों की तैयारी के बाद 5 मार्च 2025 को लिटिल चैम्प टैलेंट शो का आयोजन हुआ। स्कूल का सभागार रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा उठा। मुख्य अतिथियों में समाजसेविका ममता अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर, सोनिका आर्य, रोहताश कली, रेणु चौधरी, रितु चौधरी, शालू जलोत्रा, सुनीता जलोत्रा, पुष्पा चौधरी, लाइफ कोच सोनिया लूथरा और स्कूल की अध्यक्ष रीटा दहिया शामिल हुईं। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ और स्टेज पर बच्चों की धमाकेदार प्रस्तुतियां शुरू हो गईं।

नन्हे कलाकारों की अकल्पनीय प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में दो सौ साठ से अधिक बच्चों ने भाग लिया। धवल, अंशु, मनीष, अतुल, यश, नैतिक, अर्शी, जीनत, अंश धीमान, नक्श, अंजुमन और रिहान ने ‘महाकुंभ थीम’ पर संगीत और वाद्य यंत्रों की बेहतरीन प्रस्तुति दी। छोटे बच्चों ने ‘सुदामा चरित्र-चित्रण’, ‘चंदा कब दूर गगन से’, ‘जय-जयकारा’, ‘झांसी की रानी’ जैसे नृत्य-नाटिकाओं से समा बांध दिया।

स्टेज पर बच्चों को इतने आत्मविश्वास से परफॉर्म करते देख अभिभावक भी हैरान थे। वे सोच रहे थे,

“क्या ये वही बच्चे हैं जो घर पर शर्माते हैं?”

कई माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे।

अतिथियों के प्रेरक स्मरणीय कथन

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों की हौसला-अफजाई की।

ममता अग्रवाल ने कहा,

“माता-पिता को सिर्फ बच्चों के दोस्त बनने की जगह उन्हें सही संस्कार भी देने चाहिए। उन्हें पहले एक अच्छा इंसान बनाना जरूरी है।”

सोनिका आर्य ने कहा,

“इस शो की सबसे खास बात यह है कि बच्चे खुद अपनी तैयारी करते हैं। यह मंच उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाता है।”

लाइफ कोच सोनिया लूथरा ने कहा,

“बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखकर दिल खुश हो जाता है। जब वे खुश रहते हैं, तो घर में भी सकारात्मक माहौल बना रहता है।”

शालू जलोत्रा ने अभिभावकों से आग्रह किया,

“अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें। उन्हें अपनी रुचि के अनुसार बढ़ने दें, ताकि वे खुशी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।”

नई सोच, नई दिशा सबके लिए संभव

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया ने सभी अतिथियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया और कहा,

“आज हमने देखा कि जब बच्चों को सही मंच मिलता है, तो वे क्या कमाल कर सकते हैं। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बच्चों और अभिभावकों के लिए एक सीख थी—

“झिझक छोड़ें, सपनों को पंख दें!”

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकों और स्टाफ के सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

बच्चों में दौड़ी आत्मविश्वास की लहर

उस दिन के बाद स्कूल का माहौल बदल गया। जो बच्चे पहले झिझकते थे, अब बेझिझक अपनी प्रतिभा दिखाने लगे। माता-पिता भी समझ गए कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के आत्मविश्वास और व्यक्तिगत विकास के लिए ऐसे कार्यक्रम कितने जरूरी हैं।

और इस तरह, एक सोच से जन्मा यह छोटा सा कार्यक्रम, बच्चों के आत्मविश्वास की एक नई उड़ान बन गया!

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