किसी भी देश के नागरिकों को ‘समाज की वर्तमान आवश्यकताएं क्या हैं?’ यह ज्ञान होना चाहिए। और!यह सब भावी भविष्य को ध्यान में रख होना चाहिए तथा उसमें सर्व समाज सहित सजातीय क्या समग्र सम्मान, शैक्षिक व आर्थिक स्थिति सभी सम्मिलित होनी चाहिए। हम यह भी विचारें कि क्या अभी तक हम समाज का सम्मान कुछ ब्यूरोक्रेट्स, राजनीतिज्ञों और धनवान व्यक्तियों मे ही मान रहे थे? विडंबना है कि इन श्रेणियों का सम्मान इन्हीं की अनियमितताओं के कारण स्वमेव धीरे धीरे कम हो गया है जिसका भान ना तो इनको है और ना ही हमको। अतः हमारा यह मानना कि केवल इनसे ही समाज का सम्मान हो पाएगा संदिग्धतापूर्ण है। यह आवश्यक है परन्तु समाज के सम्मान के लिए हमें समग्र समाज के उत्थान के लिए शिक्षा, कृषि, अर्थतंत्र और राष्ट्रव्यापी बौद्धिक सामाजिक संगठन की व्यवस्था हर पक्ष को समझकर करनी होगी।
समूचा समाज अनगिनत हिस्सों में विभिन्न आधारों पर विभाजित है इसलिए इनको एक सूत्र में बांधना होगा। हमें अपने अतीत के साथ साथ वर्तमान पर उसके प्रभाव का भी ज्ञान होना चाहिए। हमें अपनी सभ्यता संस्कृति का भी ज्ञान होना चाहिए। यदि अपना और समाज का भविष्य सुरक्षित और औरायुक्त करना है तो अपने संयमित और जिज्ञासु बनाए रखने के तरीकों का पता होना चाहिए। समाज के विघटनकारी षड्यंत्रों का भी ज्ञान होना चाहिए। समाज और समाज के विभिन्न घटकों ने देश और मानवता के लिए जो कुछ भी किया है उसका भी ज्ञान होना चाहिए। हमारा अतीत गौरवान्वित करने वाला है शर्मसार करने वाला नहीं।
हमे समाज के मित्र और शत्रु का भी ज्ञान होना चाहिए तब ही हम अपने भविष्य को सुरक्षित आवरण प्रदान कर सकते हैं। यह हमारा दायित्व है कि हम अपने पूर्वजों की भाँति ही सुरक्षित भविष्य के लिए करें और यही रीत भी है और समाज को वापसी है। यह जिम्मेदारी साक्षर व बौद्धिक व्यक्तियों पर अधिक है। आओ! मिलकर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं और समाज के सपूत कहलाएं।
सूचना स्रोत
श्री शेषराज जी
प्रस्तुति