जीवट के धनी राजेश पाल जी से मुलाकात
साथियो! आज हमारे साथ हैं राजस्थान राज्य से बच्चों के प्रिय शिक्षक व भामाशाह श्री राजेश पाल मीणा जी। आप वर्तमान में अध्यापक लेवल प्रथम के पद पर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेदरी ब्लॉक उनियारा जनपद टोंक में लगातार बीस वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं। आप मूलत: गांव शेरपुर खिलचीपुर जिला सवाई माधोपुर के निवासी हैं। आपने
अपनी सरकारी सेवा की शुरुआत एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में आज से बीस वर्ष पहले की थी। अपने सेवाकाल में इस राजकीय विद्यालय के बच्चों के लिए निरंतर तरह-तरह के अविस्मरणीय कार्य कर रहे हैं। आप अपने विद्यालय को साधन संपन्न बनाने हेतु समय-समय पर आर्थिक सहयोग भी देते रहते है। आप सदैव पढ़ते लिखते रहते हैं। आप उदारमना होने के कारण शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। आप हमेशा सबको साथ लेकर टीम वर्क से कार्य करने में विश्वास रखते हैं और कई वर्षों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। आपके प्रयासों से स्कूली बच्चों में अद्भुत क्षमताओं का विकास हुआ है। आपका सरल व सौम्य स्वभाव बरबस ही सबका ध्यान आपकी ओर आकर्षित कर लेता है। आप धर्मपरायण व सामूहिक नेतृत्व क्षमता में विश्वास रखने वाले सरल व सहज व्यक्तित्व के धनी हैं। आप सदैव दूसरों की सेवा व सहयोग करने के लिए तत्पर रहते हैं।आपका नाम आपके क्षेत्र में जाने माने भामाशाह के रूप में जाना जाता है।
आपके द्वारा विद्यालय के लिए किए गए सदप्रयासों से प्रेरित होकर गांव वाले भी अब विद्यालय में लाखों रुपए के कार्य करवाने लगे हैं।आप सदैव समुदाय से जुड़े रहते हैं। इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई देते हैं।
आज हम इसी विषय पर आपसे कुछ बातचीत करने जा रहे हैं।
प्रश्न १. सर, भामाशाह के रूप में लगातार सहयोग करने की प्रेरणा आपको कहां से मिलती है? ज़रा हमें भी बताइए।
उत्तर-“एक बार विद्यालय जाते समय मुझे रास्ते में एक वृद्ध यात्री मिला। उसने मुझसे लिफ्ट मांगी। मैंने पूछा कि आप कहां जा रहे हो तो उसने बताया कि मैं इटावा के बालाजी के दर्शन करने जा रहा हूं। अचानक ही मुझे याद आया कि मेरी जेब में पांच का सिक्का था। जिसको मैंने उस यात्री को बालाजी की दानपेटी में डालने के लिए दे दिया। लगभग एक सौ पचास मीटर दूर चलने के बाद अचानक से मेरी मोटरसाइकिल के टायर के नीचे दो किलो का पत्थर आ गया तो मेरी बाइक क्षण भर में गिरने ही वाली थी। तुरंत मुझे एहसास हो गया कि ₹5 का दिया हुआ दान आज काम आ गया।
मेरे जीवन की दूसरी घटना 25 अप्रैल 2008 को घटित हुई जब मेरी मोटरसाइकिल चोरी हो गई थी। अचानक 8 जुलाई 2011 को मेरे पास पुलिस स्टेशन से फोन आया कि आपकी मोटरसाइकिल हमें मिल गई है। आप आवश्यक दस्तावेज लेकर आ जाएं।
उक्त दोनों घटनाओं से मैं खासा प्रभावित हुआ। मैं समझ चुका था कि कर भला तो हो भला और उसके बाद से मैं लगातार बच्चों के लिए विद्यालय में कुछ न डोनेट करता ही रहता हूं।”
प्रश्न २. सर, आप शासकीय सेवा में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए क्या कार्य कर रहे हैं? हम आपसे यह जानना चाहते हैं।
उत्तर- “मैं शिक्षा में गुणवत्ता लाने हेतु बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर अपने स्तर से उन्हें पुरस्कृत करता रहता हूं। विद्यालय में बच्चों के साप्ताहिक एवं मासिक टेस्ट आयोजित किए जाते हैं। हालिया जनवरी 2025 में मेरे द्वारा डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यालय में एक कंप्यूटर सेट तथा एक 46 इंच की एलईडी भेंट की गई है। केवल किताबी ज्ञान प्रदान करना ही अंतिम उद्देश्य नहीं है बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करने के साथ योग्य नागरिक बनाना भी इसमें समाहित है।”
प्रश्न ३. सर, आज दिन तक आपके प्रयासों से आपके विद्यालय में कौन-कौन सी सुविधाएं बच्चों के लिए सुलभ हुई हैं? उनकी संक्षिप्त जानकारी हमें दें।
उत्तर-“एक बोरिंग मय मोटर के, एक कंप्यूटर सेट, एक 46 इंच की टीवी, चार पंखे, छात्रों को पुरस्कार हेतु 18 दीवार घड़ियां, दो छात्रों को बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान आने पर पृथक-पृथक रूप से 11000 रुपए, एक ₹5000 का स्पीच स्टैंड, एक वालीबॉल किट, एक बास्केटबॉल किट, खो खो मैदान की सामग्री, अनगिनत संख्या में बच्चों को पुरस्कार ऐसी सुविधाओं के रूप में प्रदान किए गए हैं जो इस प्रकार हैं – नोटबुक, पेन पेंसिल, रबर, रफ कॉपी, सामान्य ज्ञान की पुस्तक, अंग्रेजी के शब्दकोष व नकद राशि इत्यादि।”
प्रश्न ४. सर, आपका प्रिय विषय कौन – सा और क्यों है?
उत्तर- “मैं लेवल एक का अध्यापक हूं। जिसमें सभी विषय पढ़ाने होते हैं। वैसे विज्ञान मेरा प्रिय विषय है क्योंकि प्रैक्टिकल ज्ञान के द्वारा ही बच्चों में स्थाई समझ बनाए जा सकती है। ऐसा मेरा मानना है।”
प्रश्न ५. सर, आप विद्यार्थियों के साथ अधिकांश समय जुड़े रहते हैं। क्या आपको ऐसा लगता है कि कभी आपका बच्चों से भी कुछ सीखना हुआ है?
उत्तर- “बच्चों के बीच में रहकर मैंने निश्छल व्यवहार करना और नि:स्वार्थ भाव से कार्य करना सीखा है।”
प्रश्न ६. सर आप शिक्षक वर्ग को क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर-“मैं शिक्षक समुदाय से यही अपील करता हूं कि देश सर्वोपरि है तथा वह राष्ट्र निर्माता है इसलिए उसका कर्तव्य भी सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी सच्ची निष्ठा से कार्य करते रहें।”
प्रश्न ७. सर, शिक्षा के क्षेत्र में आपकी भावी योजना क्या है?
उत्तर- “बच्चों को अंतर जिला शैक्षणिक भ्रमण कराना तथा निर्धन पृष्ठभूमि के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु गांव में बुक बैंक की स्थापना करना।”
सूचना स्रोत
श्री हंसराज हंस