।। मकर संक्रान्ति।।
दिन है १४ जनवरी, पर्व है मकर संक्रांति,
सब प्रेम से रहिए, मत पालो कोई भ्रान्ति।
गुड़ तिल की रेवड़ी का, है अद्भुत संयोग,
धर्म कर्म दान नियमित करो, नित्य लगाओ भोग।।
यह मकर संक्रांति ऐसा परिवर्तन लाती है,
सूर्य को दक्षिणायन से उत्तरायण कर जाती है।
आकाश में उड़ती पतंगें, तितलियों-सी नजर आती हैं,
बच्चों के तन-मन को हर्षोल्लास से भर जाती हैं।।
मुकेश कुमावत ‘मंगल’
टोंक (राजस्थान)