एक अध्यापक की प्रेरणादायक पहल
भामाशाह अध्यापक राजेश पाल मीणा की प्रेरणा से स्थानीय विद्यालय में विगत दस वर्षों से मृत्युभोज कुप्रथा के खिलाफ बच्चों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक सामाजिक अभियान चला रखा है। विद्यालय में ग्यारह बालक-बालिकाएँ ऐसे हैं जिनके ऊपर परिवार व समाज का भारी दबाव होने के बावजूद भी वे कभी मृत्यु भोज में शामिल नहीं हुए। कई बच्चे व माता-पिता मृत्यु भोज में जाते हैं किंतु ये अबोध बच्चे अपने अभिभावकों को भी जाने से मना करते हैं। इनके त्याग व समर्पण की भावना को ध्यान में रखते हुए आज स्थानीय विद्यालय में इन बच्चों को पुरस्कृत करने हेतु भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापकश्री शंकरलाल मीणा ने बताया कि भामाशाह अध्यापक राजेश पाल मीणा निवाली शेरपुर- खिलचीपुर द्वारा उक्त बच्चों एवं समस्त स्टाफ हेतु विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का प्रबंधन किया गया। विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ खाकर व पुरुस्कार प्राप्त करके बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। भामाशाह अध्यापक के आर्थिक सहयोग द्वारा जल्दी ही इन बच्चों को अंतर जिला शैक्षिक भ्रमण भी करवाया जायेगा ।
इस दौरान नोडल प्रधानाचार्य श्री चंद्रभूषण शर्मा, व्याख्याता हरिराज मीणा द्वारा मृत्युभोज की रोकथाक पर अपने विचार प्रकट किये गए। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय विद्यालय के स्टाफ साथी एवं SMC. उपाध्यक्ष रामसहाय गुर्जर उपस्थित रहे। सभी ने भामाशाह अध्यापक की अनोखी सामाजिक पहल की प्रशंसा की।
चित्रदीर्घा
वीडियो
सूचना स्रोत
प्रधानाध्यापक
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सेंदरी (कुण्डेर)
पं.स.उनियारा
टोंक (राजस्थान)