मुक्तक

इंसान की इंसानियत देखी,
देखी दुनिया की दुनियादारी,
भाइयों की भाईगिरी देखी,
देखी घनिष्ठ मित्रों की यारी,
अपने हिस्से का जीवन जीकर,
समय की चाल पहचानो,
कलयुगी लोगों की चाल देखी,
देखी अपनों की गद्दारी।।
रचनाकार
श्री मुकेश मंगल
टोंक (राजस्थान)
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति



