महिला दिवस
महिला दिवस है तभी सार्थक जब होवे सम्मानित नारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता अधिकारी।।
वैसे तो महिला दिवस सदा नित नित ही मनता आया है।
बिना नारी के पूर्ण जगत में काम ना बनता पाया है।
अर्द्धनारीश्वर स्वयं पुरुष है शिव ने बन दिखलाया है।
नर हेतु नारी महत्व पाठ यह शिव ने स्वयं पढ़ाया है।
नारी ही सृजन करती है यह सृष्टि सदा-सदा सारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता अधिकारी।।१।।
नारी की पावन महिमा सब धर्मग्रन्थों ने गाई है।
हैं सभी देवियाँ नारी ही जगती में पुजती पाई हैं।
नारी मृदुलता की मूरत पाषाण बनी भी पाई हैं।
जीवन के सभी क्षेत्रों में वे आगे बढ़ हर्षाई हैं।
नारी माता नारी पत्नी नारी ही है बहना प्यारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता अधिकारी।।२।।
संघर्ष किये हैं नारी ने नारी ने गौरव भी पाया।
आज सभी को नारी ने शिखरों पर चढ़ कर दिखलाया।
कुछ भी हो पर नारी नयनों का नीर नहीं है रुक पाया।
कुदृष्टि और कुचालों में उसको फंसते नित नित पाया।
बच्ची से लेकर वृद्धा तक झेली है निर्ममता भारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता अधिकारी।।३॥
कुछ नियम बने हैं नारी का जग में सम्मान बढ़ाने को।
पर लगता जैसे नियम सभी हैं उसको मात्र रिझाने को।
हैं तभी सार्थक नियम बने जब हों सब बाध्य निभाने को।
वरना तो ये हैं नियम सभी केवल जग को दिखलाने को।
हो यत्न सदा ऐसा जग में वो रहे नहीं अब बेचारी ।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता आधिकारी॥४।।
कर्तव्य नहीं यह नर का ही कर्तव्य यही नारी का भी।
जो छली जगत में जाती है कुछ दोष स्वंय नारी का भी।
कोई कदम स्वयं न गलत उठे यह बोध लाज धारी का भी।
वो नयन बन्द विश्वास करे न्योता विपदा भारी का भी।
वो आये नहीं बहकावे में नारी खुद है बुद्धिधारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता आधिकारी॥५।।
किन्तु पक्ष दूसरा भी नर भी प्रताड़ित होता है।
सब नियम पक्ष नारी के हैं इनमें फंस नर भी रोता है।
बच्चों में संस्कार नारी का लालन पालन बोता है।
कुछ दोष हैं थोड़े आधुनिक मानव मानवता खोता है।
हम कर्म करें निर्मल पावन ना समझें इनको लाचारी।
नर नारी का भेद जाय मिट वो होवे समता आधिकारी॥६।।