कविता

🌹 ऐ जिन्दगी 🌹

ढूँढती हैं, जिसे मेरी आंखें।
ऐ जिन्दगी मै तेरे, आईने में
खुद को ही तलाशती हूँ,

रोज नयी ख्वाहिशें बुनकर
मैं सपने तलाशती हूँ
ढूँढती हैं जिसे मेरी आंखें,

जब वक्त के पन्नों में खोये
अपने ही अक्स से मिलती हूँ,

जिंदगी की कशमकश में
क्या क्या खोया मैं तलाशती हूँ

दुनिया ढूँढती है कमियाँ मेरी,
मैं हौसलों की दीवारें, तलाशती हूँ

जिंदगी ईश्वर का दिया हुआ नायाब तोहफ़ा है,
ये भुलाकर मैं ही मुझको, तलाशती हूँ

शुक्रिया अदा करना है उस ईश्वर का,
उस परमपिता का, और माता पिता का,

इतने अच्छे माता पिता, भाई बंधु सखा
सहेलियाँ और इतनी प्यारी दुनिया में भेजा,

जब तक रहे नेकी पर चलें
ऐ जिंदगी तेरा शुक्रिया अदा करती हूँ।

रचनाकार

प्रमिला त्रिवेदी