महिलाओं और लड़कियों को स्वच्छता और मासिक धर्म के बारे में जागरूक किया गया
खरखौदा, मेरठ (25 मार्च 2025) ‘नींव’ (National Education and Empowerment for Villages; Neev) एक सामाजिक शैक्षिक पहल है, जिसे आई.आई.टी. (Indian Institutes of Technology) के पूर्व छात्रों के द्वारा आरम्भ किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण, स्लम और आदिवासी इलाकों में शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। ‘नींव’ का मुख्य लक्ष्य आर्थिक रूप से निर्धन तबके के बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं में सशक्त बनाना है। इस संगठन ने भारत के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर कार्य किया है।
आज ‘नींव’ के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. उपदेश वर्मा जी ने राजकीय महिला महाविद्यालय खरखौदा की एन.एस.एस. इकाई के साथ मिलकर खरखौदा की मलिन बस्ती में स्वच्छता और हाइजीन के बारे में महिलाओं और लड़कियों को जागरूक किया। इस दौरान, डॉ. वर्मा ने उन्हें सैनिटरी पैड स्वयं बनाने का तरीका भी सिखाया और मासिक धर्म, पीरियड्स तथा इससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य जानकारियाँ दीं।
महिला महाविद्यालय के एन.एस.एस. की संयोजक डॉ. सीमा गौतम और रसायन विभाग के धर्मेंद्र जी ने इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बस्ती की महिलाओं को सैनिटरी पैड वितरित कर उनके सही उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. वर्मा ने मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को तोड़ते हुए महिलाओं को स्वच्छता बनाए रखने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
सैनिटरी पैड का सही उपयोग महिलाओं की सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह उन्हें असमय संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है। पैड का उपयोग न केवल स्वच्छता बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि यह महिलाओं की आत्मसम्मान को भी बढ़ाता है। मासिक धर्म के दौरान उचित हाइजीन की कमी से महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि इन्फेक्शन और खुजली, जो आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती हैं।
इसके बाद, कार्यक्रम का आयोजन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, खरखौदा में भी किया गया, जहां किशोरियों को हाइजीन और मासिक धर्म के बारे में बताया गया और उन्हें सैनिटरी पैड वितरित किए गए। यह पहल किशोरियों और महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी और जागरूकता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
इस पहल के माध्यम से एक सामाजिक संदेश भी दिया गया, जिसमें यह बताया गया कि मासिक धर्म कोई शर्म या छुपाने की बात नहीं है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे खुले तौर पर स्वीकार करना और इसके बारे में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह अभियान समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रहा है।
चित्रशाला
सूचना स्रोत
डॉ. उपदेश वर्मा
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*DR UPDESH VERMA*
PhD IITD, Postdoc PPPL Princeton University USA
NATIONAL COORDINATOR NEEV
www.neeviit.org
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