समझौते से बचना

समझौते से बचना

भूमिका

समझौते से बचने की सलाह देना दृढ़ सिद्धांतों, मूल्यों या उद्देश्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह विभिन्न संदर्भों में अलग-अलग परिणाम दे सकता है। व्यक्तिगत मूल्यों के मामले में, यह व्यक्ति की ईमानदारी और अडिगता को दिखाता है, जिससे सम्मान तो मिलता है, लेकिन उन लोगों के साथ टकराव हो सकता है जो लचीलेपन को प्राथमिकता देते हैं। कार्यस्थल पर, समझौते से बचना उच्च मानकों के प्रति समर्पण को दर्शा सकता है, लेकिन इससे प्रगति में देरी या सहयोगियों के साथ संबंधों में खटास आ सकती है। वार्तालाप में, यह दृष्टिकोण एक पक्ष को उपेक्षित महसूस करा सकता है या सौदा विफल हो सकता है, लेकिन अगर यह दृष्टिकोण आपसी लाभ के साथ मेल खाता है तो मजबूत परिणाम भी मिल सकते हैं। रिश्तों में, समझौते से बचने की सलाह स्वार्थी लग सकती है और आपसी समझ की कमी पैदा कर सकती है। कुल मिलाकर, समझौते से बचना ताकत और स्पष्टता को दर्शाता है, लेकिन यह सहयोग और आपसी सम्मान में चुनौतियां भी उत्पन्न कर सकता है। कवि की दूरदर्शिता देखिए।

कविता

कभी किसी कीमत पर कोई समझौता मत कर लेना,

समझौतों  के  प्रस्तावों  का  ठोकर  से  उत्तर  देना।

समझौतों  की  चालों  से  बचना  बहुत  जरूरी   है,

दम  दुश्मन  में  नहीं  रहा  यही  उसकी मजबूरी है।।

मजबूरी  में  समझौतों  को  वो ।आधार  बनाएगा,

देशद्रोही गद्दारों को लालच से बहकाएगा।

उलझ न जाना समझौतों में फंस मत जाना चालों में,

रहना पड़े भले ही कुछ दिन टूटे फूटे हालों में।।

डॉ देशराज सिंह

प्रस्तुति