संदीप जी की कविता

संदीप जी की कविता

जल बिना जीवन नही

जल बहुत अनमोल है, रखो इसका मान,

सोच-समझ कर खर्चिये, इसको पूंजी जान।।

 

जल बिना जीवन नहीं, जल में सबकी जान,

बहते जल को रोकिए, कल का रख के ध्यान।।

 

रहिमन भी यह कह गये, बिन पानी सब सून,

तीन माह बेहद कठिन, अप्रैल, मई और जून।।

 

बहता जल कल-कल करे, इसमें छुपा है राज,

कल जिंदा रहना अगर, जल संचय कर आज।।

 

कल-कल करके जल कहे, कल का भी रख ध्यान,

मत व्यर्थ जल को बहा, कर आगे की पहचान।।

 

भू-गर्भ जल भंडार को, मत धरती से छीन।

तड़प तड़प मर जायेगा, जैसे जल बिन मीन।

 

सागर बहुत जल से भरे, मगर उसमें है खार।

पीने के लायक नहीं, क्यों न करे विचार।।

 

बेवजह मत ढोलिये, जल को यूं बेकार।

जल बिन जल जाएगा, एक दिन यह संसार।।

 

सभी जल स्रोत का, रक्खो निर्मल नीर।

जल संरक्षण जरूरी है, कह गए सन्त फ़कीर।।

 

सन्दीप बिन नीर के, सूख जाएंगे प्राण।

समय रहते चेत जा, महिमा जल की जाण।।

रचनाकार

सन्दीप कुमार जैन

ककोड़ , टोंक (राजस्थान)

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति