सशक्तिकरण की यात्रा: शिक्षिका आंचल इत्तन से विशेष बातचीत

सशक्तिकरण की यात्रा: शिक्षिका आंचल इत्तन से विशेष बातचीत

सशक्तिकरण की यात्रा

शिक्षिका आंचल इत्तन से विशेष बातचीत

साक्षात्कारकर्ता (अनिल चौहान): अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस साहस, संकल्प और महिलाओं की असाधारण क्षमता का उत्सव है। इस विशेष अवसर पर, हम एक ऐसी महिला से बातचीत कर रहे हैं जो दो अहम भूमिकाएँ निभा रही हैं—एक शिक्षिका और एक पशु कार्यकर्त्री के रूप में। आइए उनसे उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा के बारे में जानते हैं।

साक्षात्कारकर्ता: आपकी यात्रा दो अलग-अलग भूमिकाओं—एक शिक्षक और एक कार्यकर्ता—से जुड़ी है। आप इसे कैसे देखती हैं?  

आंचल इत्तन: मेरे लिए ये दोनों भूमिकाएँ एक ही उद्देश्य से जुड़ी हैं—एक दयालु और शिक्षित समाज का निर्माण। एक शिक्षक के रूप में, मैं युवा दिमागों को ज्ञान और नैतिकता से संवारने की कोशिश करती हूँ, और एक कार्यकर्ता के रूप में, मैं जानवरों और पक्षियों की रक्षा के लिए समर्पित हूँ। शिक्षा और करुणा एक साथ मिलकर दुनिया को बेहतर बनाते हैं, और मैं इन दोनों माध्यमों से बदलाव लाने का प्रयास कर रही हूँ।

साक्षात्कारकर्ता: शिक्षा महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण साधन है। इस क्षेत्र में काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?  

आंचल: शिक्षा सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। खासकर लड़कियों के लिए, यह एक शक्तिशाली माध्यम है जो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने और समाज में अपना स्थान बनाने में मदद करता है। लेकिन इसमें चुनौतियाँ भी हैं—सामाजिक बाधाएँ, रूढ़ियाँ, और सीमित संसाधन। इसके बावजूद, मैंने देखा है कि जब लड़कियों को सही अवसर दिए जाते हैं, तो वे किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। मैं अपनी कक्षा में सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाती, बल्कि आत्मविश्वास, आलोचनात्मक सोच और सहानुभूति भी विकसित करने की कोशिश करती हूँ।

साक्षात्कारकर्ता: आप पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी सक्रिय हैं। इस दिशा में आपने क्या कदम उठाए हैं?  

आंचल: मेरा हमेशा से मानना रहा है कि करुणा सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। मैंने एक गैर सरकारी संगठन (NGO) की स्थापना की है, जो घायल और बेसहारा जानवरों और पक्षियों के बचाव और पुनर्वास पर केंद्रित है। मैं जागरूकता फैलाने का भी प्रयास करती हूँ ताकि लोग जानवरों के प्रति अधिक संवेदनशील बनें। जब हम बच्चों को जानवरों के प्रति दयालु बनना सिखाते हैं, तो वे समाज में भी अधिक संवेदनशील और सहृदय बनते हैं।

साक्षात्कारकर्ता: महिलाओं की भूमिका समाज में लगातार बदल रही है। आप महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?  

आंचल: महिलाएँ परिवर्तन की आधारशिला हैं। चाहे वे शिक्षक हों, कार्यकर्ता हों, या किसी अन्य क्षेत्र में हों—वे समाज को हर दिन बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। इस महिला दिवस पर मैं सभी महिलाओं से कहना चाहूँगी कि वे अपनी ताकत को पहचाने और अपने कार्यों से बदलाव लाने के लिए आगे आएँ। शिक्षा देना, किसी की मदद करना, या किसी के हक के लिए खड़ा होना—हर छोटा कदम भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

साक्षात्कारकर्ता: अंत में, आपके लिए महिला दिवस का क्या महत्व है?  

आंचल: यह सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं की शक्ति, धैर्य और योगदान का सम्मान करने का अवसर है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि ताकत केवल शारीरिक शक्ति में नहीं, बल्कि ज्ञान, दयालुता और नेतृत्व में भी होती है। हर महिला जो सपने देखने, शिक्षित करने, सुरक्षा देने और प्रेरित करने का साहस रखती है, वह बदलाव की वाहक है। इस दिन को हर उस महिला के सम्मान में मनाया जाना चाहिए जो अपने प्रयासों से दुनिया को एक बेहतर जगह बना रही है।

साक्षात्कारकर्ता:यह वास्तव में प्रेरणादायक रहा! आपके विचार और प्रयास निश्चित रूप से कई लोगों को प्रेरित करेंगे। इस महत्वपूर्ण बातचीत के लिए आपका धन्यवाद।  

आंचल जी: धन्यवाद! मुझे आशा है कि हम सब मिलकर शिक्षा और करुणा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

प्रतिभा के छायाचित्र

पशुओं की देखरेख