ग़ज़ल
इस दुनिया से प्यारे यारी रख
करना प्यार मुहब्बत जारी रख।
जो भी भाये ना अपने दिल को
पास नहीं ऐसी बीमारी रख।
अपने पड़ोस इधर उधर की सब
खबर पास में अपने सारी रख।
अपनों की भी खबर ले समय पर
इतनी सी पास समझदारी रख।
शतरंज का खेल है दुनिया ये
प्यादे अपने सारे भारी रख।
न जाने कब कौन बन बैठे शत्रु
हार जीत की सब तैयारी रख।
संघर्ष के बाद मिलेगी जीत
तुम अबके बात ये हमारी रख।
दोहे
आँखों से यूं मत बहा, प्यारे इतना नीर।
दिल में सबके पास है, थोड़ी थोड़ी पीर।।
सागर जल से है भरा, शांत भाव गंभीर।
लहरें उस पर चल रहीं, बढा रही हैं पीर।।
बादल आया देख के, नाचे है मन मोर।
छाते भू पर बन घटा, बरसे है घनघोर।।
बिजली के आवेश में, बंधा हुआ संसार।
नफ़रत के विपरीत सदा, बसता दिल में प्यार।।
देख सरोवर प्यार का, मन में खिलते फूल।
कलयुग का ये वक्त है, रहा नहीं अनुकूल।।
गंगा जल निर्मल करे, धोये मल मल पाप।
मनवा ये समझे नही,इसकी महिमा आप।।
आनंद सखी छंद
आनंद कहां मिलता है,हमें बताओ प्यारे तुम।
स्वर्ग सजा जो धरती पर,हमें दिखाओ प्यारे तुम।।
हमने देखा धरती पर,नफ़रत की ऑंधी आई ।
भाई भाई लड़ते हैं, जो है जग में दुखदाई।।
हमें दिखा दो सुख सागर,इस दुनिया के सारे तुम।
आनंद कहाॅं मिलता है, हमें बताओ प्यारे तुम।।
गंगा का तट देखा तो,वो बदला बदला पाया।
सजे लुटेरों के डेरे,जिसने मुझको भरमाया।।
मन के दाग़ धुले जो जल,हमें दिखाओ प्यारे तुम।
आनंद कहां मिलता है,हमें बताओ प्यारे तुम।।
मंदिर मस्जिद देखी तो,मिले नहीं उनमें भगवन।
जन सारे दौड़ रहे हैं,करने पावन अपना मन।।
कहां मिलेगे भगवन अब,पता लिखाओ प्यारे तुम।
आनंद कहां मिलता है, हमें बताओ प्यारे तुम।।
रचनाकार
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’
मालपुरा

