सर्वेक्षण

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समाजशास्त्र संबंधी फील्ड सर्वे

आज दिनांक 16/03/2026 को एम.एम.एच. कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग के एम.ए. द्वितीय सेमेस्टर एवं चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के द्वारा शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता क्रेज विषय को लेकर शहरी महिलाओं के मध्य एक सर्वेक्षण किया गया।

इस सर्वे के लिए अध्ययन क्षेत्र महानगर के आर्य नगर व मॉडल टाउन क्षेत्र को लिया गया। इस अध्ययन में महिलाओं से ऑनलाइन शॉपिंग में खरीदी जाने वाली वस्तुओं के विषय में जानकारी प्राप्त की गई। ऑनलाइन शॉपिंग के बजट, फायदे–नुकसान, कारण और प्रवृत्तियों इत्यादि के विषय में जानकारी प्राप्त की गई। इस अध्ययन के लिए एक साक्षात्कार अनुसूची का प्रयोग किया गया।

इस सर्वेक्षण में पाया गया कि शहरी क्षेत्र की महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग की प्रवृत्ति बढ़ रही है। अधिकांश महिलाएं यह मानती हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग से समय, धन और श्रम की बचत होती है। साथ ही पारंपरिक रूप से बाजारों में खरीददारी करने से जो समस्याएं आती हैं उनसे बच जाते हैं।

इस सर्वेक्षण में स्नातकोत्तर के सभी छात्र-छात्राओं से उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह सर्वेक्षण समाजशास्त्र विभाग की विभाग प्रभारी प्रोफेसर रेखा शर्मा, डॉ. सीमा गुप्ता व प्रोफेसर राकेश राणा व प्रोफेसर प्रेमलता के निर्देशन में एम.एम.एच. ग़ाज़ियाबाद के समाजशास्त्र विभाग के छात्र-छात्राओं ने शैक्षणिक भ्रमण के लिए महिलाओं से ऑनलाइन शॉपिंग पर विस्तार से बातचीत की। साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से सूचनाओं को एकत्रित किया गया।

शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन के ट्रेंड को समझने का प्रयास समाजशास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. रेखा शर्मा के नेतृत्व में किया गया।

विभाग के शिक्षक प्रो. प्रेमलता जी और सीमा गुप्ता ने बच्चों को सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षण दिया। वहीं प्रो. राकेश राणा विद्यार्थियों के ग्रुप बनाकर उन्हें फील्ड सर्वे के लिए लेकर गए। रिसर्च ग्रुप लीडर के रूप में एम. ए. फाइनल के शिवानी, प्राची, कनिका, जया, आकांक्षा, डोली, प्रिया, अंकित और रोहित ने सक्रिय भूमिका निभायी। वही एम. ए. प्रथम वर्ष के विधार्थियों में सचिन, आकाश, शिवम चौहान, अंकिता झा, हर्ष, गोल्डि, आरती इत्यादि ने दिन भर इस सर्वेक्षण में सक्रिय भूमिका निभायी। इस फील्ड वर्क में विभाग के सभी शिक्षकों सहित लगभग 52 बच्चों ने भाग लिया। लौट कर सभी ने विभाग में बैठ कर सामूहिक जलपान किया। अंत में विभागाध्यक्षा डॉ. रेखा शर्मा ने विधार्थियों को इस सर्वे के माध्यम से इकठ्ठे किये गए आंकड़ों का टेबुलेशन कर रिपोर्ट लेखन के टिप्स दिए। डॉ सीमा गुप्ता जी ने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।

विषय : शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता क्रेज।
स्थान : एम.एम.एच. कॉलेज।
साक्षात्कार : समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष श्रीमती रेखा शर्मा।

प्रश्न १. आजकल शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से आप इसे कैसे देखती हैं?
उत्तर (रेखा शर्मा) : “समाजशास्त्र के दृष्टिकोण से यह केवल खरीदारी की आदत में परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह बदलती जीवन-शैली, तकनीकी विकास और समय की आवश्यकता का परिणाम है। शहरी जीवन में व्यस्तता अधिक है, ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग महिलाओं को सुविधा, विविधता और समय की बचत प्रदान करती है।”

प्रश्न २. क्या आपको लगता है कि डिजिटल तकनीक ने महिलाओं के जीवन में कोई नया सामाजिक परिवर्तन लाया है?
उत्तर : “निश्चय ही। डिजिटल तकनीक ने महिलाओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। अब वे घर बैठे विभिन्न उत्पादों की तुलना कर सकती हैं, कीमतें देख सकती हैं और अपनी पसंद के अनुसार निर्णय ले सकती हैं। यह आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाता है।”

प्रश्न ३. इस विषय पर विद्यार्थियों द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षण का क्या महत्व है?
उत्तर : “ऐसे सर्वेक्षण विद्यार्थियों को समाज को समझने का व्यावहारिक अनुभव देते हैं। जब विद्यार्थी स्वयं लोगों से मिलकर उनके विचार और व्यवहार को समझते हैं, तब उनके अंदर विश्लेषण करने की क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित होती है।”

प्रश्न ४. विद्यार्थियों को इस प्रकार के सर्वेक्षण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर : “सबसे पहले उन्हें प्रश्नों को स्पष्ट और निष्पक्ष रखना चाहिए। उत्तरदाताओं की निजता और सम्मान का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है। साथ ही, प्राप्त आंकड़ों का निष्पक्ष विश्लेषण करना चाहिए ताकि निष्कर्ष सही और सार्थक हो।”

प्रश्न ५. शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते रुझान के पीछे मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?
उत्तर : “इसके कई कारण हैं—समय की बचत, घर बैठे खरीदारी की सुविधा, अधिक विकल्प, आकर्षक ऑफ़र और डिजिटल भुगतान की सरलता। इसके अलावा सोशल मीडिया और विज्ञापनों का भी बड़ा प्रभाव है।”

प्रश्न ६. क्या इस प्रवृत्ति के कुछ नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं?
उत्तर : “हाँ, हर सामाजिक परिवर्तन के साथ कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं। कभी-कभी अत्यधिक ऑनलाइन शॉपिंग से अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता या धोखाधड़ी जैसी समस्याएँ भी सामने आ सकती हैं, इसलिए जागरूकता और सावधानी आवश्यक है।”

प्रश्न ७. इस विषय पर किए गए सर्वेक्षण से विद्यार्थियों को क्या सीख मिल सकती है?
उत्तर : “विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि समाज में तकनीक किस प्रकार व्यवहार और सोच को प्रभावित करती है। वे आंकड़ों के माध्यम से यह देख सकते हैं कि सामाजिक परिवर्तन किस प्रकार धीरे-धीरे हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।”

प्रश्न ८. अंत में आप विद्यार्थियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर : “मैं विद्यार्थियों से यही कहना चाहूँगी कि वे समाज को केवल किताबों से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव से समझने का प्रयास करें। सर्वेक्षण और फील्ड स्टडी समाजशास्त्र की आत्मा हैं। इनके माध्यम से ही हम समाज के वास्तविक स्वरूप को समझ पाते हैं और अपनी सोच को अधिक परिपक्व बना सकते हैं।”

प्रो. राकेश राणा द्वारा विद्यार्थियों को समूहों में संगठित कर फील्ड सर्वेक्षण कराने की योजना वास्तव में शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का प्रयास है। इसे स्पष्ट करने के लिए निम्नलिखित साक्षात्कार (प्रश्नोत्तर) समस्त कार्य योजना को स्पष्ट कर सकता है, जिससे उनकी योजना, उद्देश्य और प्रक्रिया सहज रूप में सामने आ सकें।

साक्षात्कार

**प्रो. राकेश राणा से बातचीत : “विद्यार्थियों के साथ फील्ड सर्वे—शिक्षा को अनुभव से जोड़ने की पहल”**

**प्रश्न 1.** सर, सबसे पहले आप यह बताइए कि विद्यार्थियों को लेकर फील्ड सर्वेक्षण कराने का विचार आपको कैसे आया?
**उत्तर:** मेरा हमेशा यह मानना रहा है कि शिक्षा केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। समाज, गांव, बाजार और वास्तविक परिस्थितियाँ ही विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा विद्यालय हैं। इसी सोच के साथ हमने तय किया कि विद्यार्थियों को समूहों में बाँटकर उन्हें फील्ड में भेजा जाए ताकि वे स्वयं जाकर वास्तविक तथ्यों को समझ सकें।

**प्रश्न 2.** इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
**उत्तर:** इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को **व्यावहारिक ज्ञान**, **समाज की वास्तविक स्थिति का अनुभव** और **डेटा संग्रहण की विधियों का अभ्यास** कराना है। इसके माध्यम से वे सीखते हैं कि किसी भी विषय पर तथ्य कैसे जुटाए जाते हैं और उनका विश्लेषण कैसे किया जाता है।

**प्रश्न 3.** विद्यार्थियों को समूहों में बाँटने की प्रक्रिया किस प्रकार की जाती है?
**उत्तर:** हम विद्यार्थियों को 4–5 के छोटे-छोटे समूहों में बाँटते हैं। प्रत्येक समूह में अलग-अलग प्रकार की क्षमताओं वाले विद्यार्थी होते हैं—कोई संवाद में अच्छा होता है, कोई लिखने में, कोई अवलोकन करने में। इससे टीमवर्क की भावना विकसित होती है।

**प्रश्न 4.** फील्ड सर्वे के लिए विद्यार्थियों को पहले किस प्रकार की तैयारी कराई जाती है?
**उत्तर:** फील्ड में जाने से पहले विद्यार्थियों को **सर्वेक्षण की तकनीक**, **प्रश्नावली तैयार करने की विधि**, और **लोगों से संवाद करने के शिष्ट तरीके** सिखाए जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें यह भी बताया जाता है कि सर्वे करते समय निष्पक्षता और संवेदनशीलता बनाए रखना कितना आवश्यक है।

**प्रश्न 5.** फील्ड में जाकर विद्यार्थी किस प्रकार की जानकारी एकत्र करते हैं?
**उत्तर:** यह सर्वेक्षण जिस विषय पर आधारित होता है, उसी के अनुसार जानकारी ली जाती है। जैसे—सामाजिक स्थिति, शिक्षा, रोजगार, स्थानीय समस्याएँ, लोगों की सोच आदि। विद्यार्थी प्रश्नावली के माध्यम से लोगों से बातचीत करते हैं और आवश्यक तथ्यों को नोट करते हैं।

**प्रश्न 6.** इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका क्या होती है?
**उत्तर:** शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका में होते हैं। हम विद्यार्थियों को दिशा देते हैं, उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सर्वेक्षण सही और व्यवस्थित तरीके से सम्पन्न हो।

**प्रश्न 7.** क्या इस सर्वेक्षण से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी कोई प्रभाव पड़ता है?
**उत्तर:** बिल्कुल। फील्ड सर्वे से विद्यार्थियों में **आत्मविश्वास**, **संचार कौशल**, **टीमवर्क** और **समस्या को समझने की क्षमता** विकसित होती है। वे समाज की विविधता और वास्तविक चुनौतियों को नजदीक से देख पाते हैं।

**प्रश्न 8.** सर्वेक्षण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों से क्या अपेक्षा की जाती है?
**उत्तर:** सर्वे के बाद प्रत्येक समूह अपनी **रिपोर्ट तैयार करता है**। उसमें वे प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं। इससे उन्हें शोध कार्य की प्रारंभिक समझ मिलती है।

**प्रश्न 9.** क्या इस सर्वेक्षण के परिणाम समाज या संस्थान के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं?
**उत्तर:** जी हाँ, यदि सर्वेक्षण गंभीरता से किया जाए तो उससे प्राप्त निष्कर्ष समाज की वास्तविक समस्याओं को उजागर कर सकते हैं। ऐसे अध्ययन नीति निर्माण या सामाजिक जागरूकता के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

**प्रश्न 10.** अंत में, विद्यार्थियों के लिए आपका क्या संदेश है?
**उत्तर:** मेरा यही कहना है कि सीखने का सबसे अच्छा तरीका है—**स्वयं देखना, समझना और अनुभव करना**। यदि विद्यार्थी जिज्ञासु बनकर समाज से जुड़ेंगे तो उनकी शिक्षा भी सार्थक होगी और उनका व्यक्तित्व भी समृद्ध होगा।

सूचना स्रोत

डॉ राकेश राणा

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति

कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति

चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)
सहयोगी