विश्व गौरैया दिवस (२० मार्च)

टहनी पर बैठी, गौरैया
चहक चहक कर कहती भैया,
नहीं कड़कना बादल,
क्यों कि, मेरा भी,
अस्तित्व यहाँ है,
अब घन, गर्जन गान ना चाहे,
ज़ोर जबरदस्ती से ,
नहीं चलता, ताल्लुक, किसी का,
पिंजरे में रहने का,
पंछी का स्वप्न, नहीं होता,
परिंदों को पिंजरे से,
लगाव नहीं होता,
स्वच्छ निर्मल आकाश में,
उड़ने का सपना ,
उनका भी होता है,
इरादा है ऊंची उड़ान का,
जोश है आसमान को नापने का,
जीवन के हर रंग सजाने, संवारने का,
खुली हवा में सांस लेने का,
स्वतंत्रता की मुख्य भूमिका होती है आजादी,
आज तुम कहाँ चली गयी गौरैया,
रचनाकार

स्थानीय संपादक
उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
हैदराबाद (तेलंगाना)
गौरैया चहकती नहीं
आजकल…
गौरैया दिखाई नहीं देती
आजकल…
पर… गौर से देखो तो…
किसी कटे पेड़ की टहनी
या घर के खामोश आँगन
में या खिड़की के किसी
कोने में
गुमसुम बैठी मिल जाएगी
गौरैया… उदास बीते पलों
से मुलाकात करते हुए….
रचनाकार
विजया डालमिया
राष्ट्रीय संयोजिका
उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
प्रस्तुति


