कविता

मिल सकते यदि हम तो इतने दूर ना होते
शब्दों का आश्रय लेने को मजबूर ना होते
सांसों में साकार स्वयं बन जाती कविता
तुम सुनते मेरी बात स्वयं बन जाती कविता
एहसासों के समुंदर में डूब कर शब्दों के साथ तैरना ही कविता है। विश्व कविता दिवस पर सभी को बहुत-बहुत बधाई
रचनाकार

विजया डालमिया
।। कविता मेरी बहना, सखी सहेली।
कविता, से इश्क होने लगा है,
इससे जैसे जन्मों का नाता जुड़ा है,
यूं ही तो नहीं शब्दों से प्रेम होता,
ना आँखें यूं रोतीं, ना मन चैन खोता,
जरा देखो तो मन में घुमड़ने लगा है
हर शब्द अजीज होने लगा है
इसके प्रेम की गहराई भी रंग लाई है, लगता है खुद से ही, प्रेम सगाई है,
हो गई हूँ मैं तो जैसे पराई,
विचारों की नन्ही नन्ही, बातों में आई
बूंदों सा उतर आता है मेरे अंतस में,
पकड़कर हाथों में कलम भी थमाई,
लिखने मैं बैठी हूँ जब दिल की बातें,
पकड़ाकर मुझे एक प्यारी-सी रचना,
कहने लगी मुझसे मिल ले तू बहना,
तेरे मेरे चर्चे सभी को पंसद हैं,
मेरा प्रेम तुझ में समाने लगा है,
मेरे इश्क में तू चलती रहा कर,
जमीं आस्मां में विचरती रहा कर,
मेरे प्रेम को अपने दिल में बसाले,
कभी गुनगुना और कभी मुस्कुराले,
मेरे प्रेम को अपने दिल मे बसा ले,
थिरक ले कभी झूम ले और गा ले।
थिरक ले कभी झूम ले और गा ले।

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