भूमिका
गाँव की कच्ची सड़कों पर धूल उड़ाती हुई हमारी मोटर साइकिल धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। चारों ओर विस्तृत रेतीले क्षेत्र के बीच से गुजरते हुए, दूर एक विशाल निर्माणस्थल नजर आने लगा—यह वही स्थान था, जहाँ एक बड़ा बांध बन रहा था। मशीनों की गड़गड़ाहट को स्पष्ट सुना जा सकता था। स्थानीय ग्रामीण उत्सुकता से इस परिवर्तन को देख रहे थे—कुछ आशान्वित, तो कुछ चिंतित। इस यात्रा का उद्देश्य केवल बांध का निरीक्षण नहीं था, बल्कि उन कहानियों को समझना था जो इस बदलाव के साथ जन्म ले रही थीं।
यात्रा विवरण
प्रस्तुत यात्रा वृतांत टोडारायसिंह से बनेठा तक का दिनांक 26 जनवरी 2025 से 27 जनवरी 2025 तक का है। जब मैं और मेरे साथी श्री महावीर पाटीदार प्रातः 8.30 बजे टोडारायसिंह से मोटर साइकिल पर बनता के लिए रवाना हुए।
सूरज नारायण की धूप अच्छी लग रही थी। कुछ कुछ सर्दी का अहसास भी हो रहा था। हम वाया टोंक होकर बनेठा पहुंचे और 11.00 बजे एक सामाजिक कार्य में शामिल हुए। चाय पानी के कुछ समय बाद सुबह का भोजन लिया। मेहमानों से मेल मिलाप हुआ। सायंकाल 4.00 बजे बनेठा से 3 किलोमीटर दूर ईसरदा बांध देखने हम लोग चले गए। इस बांध में 28 गेट बन चुके हैं। दोनों तरफ दीवार बनने कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। बांध में थोड़ी मात्रा में पानी रुका हुआ था जिसमें बगुले अपने शिकार का ध्यान लगाकर खड़े थे। हमने बांध के फोटो खींचे। बांध के दूसरी तरफ भी जा कर देखा।
बनास नदी का पाट काफी चौड़ा लग रहा था। गणतंत्र दिवस की वजह से बांध पर कार्य बन्द था। बड़ी बड़ी मशीने लगी हुई थीं। इस बांध का पानी आधा दर्जन जिलों की प्यास बुझा पायेगा। साथ ही चाई के लिए भी मीठा पानी उपलब्ध हो सकेगा। वहाँ से हम 5.45 पर रवाना हो कर एक बालाजी के मन्दिर दर्शन करने हेतु गये। इसके बाद गाँव में स्थित कल्याण जी के मन्दिर दर्शन करने हेतु गए। इसके बाद सामाजिक कार्य में भोजन ग्रहण किया। रात्री विश्राम किया।
दूसरे दिन प्रात काल दिनचर्या से निवृत्त होकर गोपाल माहाराज के दर्शन करने गए। इस के बाद समाज के घरों में आथित्य स्वीकार करने चले गए। इसके बाद ठीक 10 बजे रा, उ, मा, वि- बनेठा में चले गए। स्कूल में विद्यार्थी पढ़ने आ रहे थे। गुरुजन भी विद्यालय में मौजूद नजर आये। शारीरिक शिक्षक महोदय प्रार्थना सभा की तैयारी में व्यस्त थे। हम भी प्रार्थना सभा में शामिल हुए। कवि हंसराज ‘हंस’ जी भी आ गए।
प्रार्थना सभा के बाद कवि हंसराज, हंस जी ने हमारा परिचय दिया। शाला परिवार की ओर से दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। मुझे बोलने का अवसर दिया। सभी बच्चों को खुशखबरी सुनाई कि आपके बनेठा निवासी कवि हंसराज ‘हंस’ जी का मध्य प्रदेश सरकार सम्मान करने जा रही है साहित्य के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य हेतु। हमने कवि हंसराज जी का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
इसके बाद बच्चों को विलुप्त होती पत्र विधा के बारे में अवगत कराया। डाकघर में मिलने वाले पोस्टकार्ड अन्तर्देशीय पत्र, लिफाफा दिखाकर जानकारी दी गई। डा. सूरज सिंह नेगी साहब द्वारा संपादित पुस्तक, बच्चों के पत्र, से बालक विकास द्वारा पत्र वाचन करवाया गया। अखिल भारतीय स्तर की पाती लेखन, युवाओं के लिए पाती, प्रतियोगिता की जानकारी देकर पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया गया।
कवि हंसराज हंस जी ने गौरैया संरक्षण एवं संवर्धन पर बच्चों को अवगत कराया। गौरैया की पुकार, पुस्तक से बालिका द्वारा हंसराज जी हंस का प्रकाशित पत्र का वाचन करवाया गया। अन्य स्कूली विद्यार्थियों द्वारा बनाये गए गौरैया के पोस्टर दिखाये गए। साथ ही साथ गौरैया का चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया। सभी बच्चों एवं शाला परिवार ने फ्लेक्स पर गौरैया संरक्षण जागरुकता के हस्ताक्षर किए। विद्यालय के संस्था प्रधान श्री संजय कुमार महावर ने आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया। बच्चों को विलुप्त होती पत्र विधा एवं गौरैया संरक्षण की जानकारी के लिए साधुवाद दिया। इसके बाद बच्चों के पत्र, पुस्तक पुस्तकालय हेतु साहित्य मंच द्वारा संस्था प्रधान एवं पुस्तकालय प्रभारी को भेंट की गई। कार्यक्रम समापन के बाद भोजन कर टोडारायसिंह के लिए रवाना हो गए। सायंकाल 5.00 घर पर आये। यह यात्रा सुखद रही।