कलमकार के सामयिक दोहे

कलमकार के सामयिक दोहे

दोहे

गणतंत्र आधारित

संविधान इस देश का, देता है अधिकार।
हर झगड़े का साथ ही, करता है उपचार।।

अनेकता में एकता, भारत की पहचान।
भाषाओं का जाल है, इसकी प्यारी शान।।

मना रहे गणतंत्र हम, मिलकर सारे आज।
देश के संविधान पर, करते हैं हम नाज।।

संविधान ने है दिया, हमको जब अधिकार।
अपने मत के योग से, बनती अब सरकार।।

समता के अधिकार से, मिली आज पहचान।
सोच-समझ करना सदा, अपना हर मतदान।।

स्वतंत्रता के साथ ही, सजता है गणतंत्र।
बनी रहे यह एकता, यही है मूलमंत्र।।

सजे तिरंगा देश में, घर-घर हो पहचान।
सबके मुख मुस्कान हो, दिल में हो अभिमान।।

सृजक

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’

मालपुरा

प्रस्तुति

प्रस्तुतकर्ता