कविता

कविता

प्रेम है तो आवाज़ उठाओ

रामभक्त हो, तो राम मन्दिर की चोरी पर बोलो,                सत्य के पथ पर चलकर, अन्याय के विरुद्ध बोलो।

गौप्रेमी हो, तो गौहत्या पर आवाज़ उठाओ,                  गौमाता की पीड़ा समझो, उनका दर्द भी अपनाओ।

शिक्षाप्रेमी हो, तो पेपर लीक पर बोलो,                      मेहनत करने वाले बच्चों के हक़ में मुँह खोलो।

राष्ट्रप्रेमी हो, तो शहीदों के सम्मान में बोलो,                  सीमा पर बहते लहू का मोल भी कभी तो बोलो।

प्रकृतिप्रेमी हो, तो कटते जंगलों पर बोलो,                    उजड़ रहे पशु-पक्षियों के घर की खातिर बोलो।

नारी को देवी मानते हो, तो उसकी इज़्ज़त पर बोलो,      उसके सम्मान की ख़ातिर, अन्याय के विरुद्ध बोलो।

धर्म अगर सिखलाता है, तो न्याय निभाना सीखो,            केवल जयकारे नहीं, सच के संग चलना सीखो।

जिस मुद्दे पर स्वार्थ नहीं, उस पर मौन क्यों छाता है?        क्या सच भी अब सुविधाओं के हिसाब से बोला जाता है?

प्रेम अगर सच्चा है, तो हर पीड़ा पर बोलो,                  आस्था अगर सच्ची है, तो अन्याय के विरुद्ध बोलो।

चुन-चुनकर सच बोलोगे, तो झूठ का मान घटेगा,            जहाँ न्याय मौन खड़ा रहेगा, अन्याय वहीं बढ़ेगा।

सृजक

सरोज प्रसाद राय
उलझन सुलझन, स्थानीय संपादिका
जयपुर महिला प्रकोष्ठ

प्रस्तुति

उलझन सुलझन