धनपति देवी सम्मान डॉ. लता को
सुलतानपुर। साक्षी सृजन संवाद समिति एवं कथा समवेत पत्रिका के संयोजन में जनपद के जिला पंचायत सभागार में ‘माँ धनपती देवी स्मृति कथा साहित्य सम्मान समारोह एवं साहित्यिक संगोष्ठी-2025’ का आयोजन किया गया।
इस वर्ष कहानी प्रतियोगिता में सफल हुए कहानीकार डॉ लता अग्रवाल “तुलजा” (भोपाल), वीना श्रीवास्तव (राँची), यामिनी नयन गुप्ता (रामपुर), मनोरमा पंत (भोपाल) सहित प्रतियोगिता के निर्णायक अखिलेश श्रीवास्तव चमन और डॉ विनयदास को अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न, प्रमाणपत्र और घोषित नकद धनराशि प्रदान करके सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही पत्रिका के सम्पादक डॉ शोभनाथ शुक्ल, संगीता शुक्ला, अध्यक्ष आद्या प्रसाद सिंह, प्रदीप और मंचस्थ अतिथियों द्वारा इनके अतिरिक्त जनपद के साहित्यकारों मथुरा प्रसाद सिंह जटायु, सुशील पांडेय, साहित्येन्दु, सुरेश चंद्र शर्मा, नीतू मुकुल, करुणेश भट्ट और अवनीश त्रिपाठी को भी कथा समवेत साहित्य रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।
यह आयोजन लोकभूषण आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम दो सत्रों में सम्पन्न हुआ। पहले सत्र का आरम्भ वाकदेवी सरस्वती और माँ धनपती देवी के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं डॉ करुणेश भट्ट की वाणी वंदना से हुआ। इसके पश्चात आगन्तुक साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के आयोजक डॉ शोभनाथ शुक्ल ने कहा कि “समय समाज और जीवन की व्यापक प्रस्तुति और सामाजिक समरसता को जनसरोकारों की पक्षधरता के साथ पाठकों तक पहुंचाने की कला आज भी कहानी में विद्यमान है। इस प्रतियोगिता का निरन्तर विस्तार होना कहानी के प्रति इसी लगाव का ही परिणाम है। शोभनाथ शुक्ल के कहानी संग्रह ‘गली आबाद है’ और ‘कथा समवेत’ पत्रिका के दिसम्बर अंक का लोकार्पण भी इसी सत्र में मंचस्थ अतिथियों और वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति में किया गया। प्रतियोगिता की कहानियों और पत्रिका पर एक समीक्षात्मक वक्तव्य देते हुए कथाकार चित्रेश ने कहा कि “इन कहानियों में संघर्ष और विजन की निरन्तर मौजूदगी बनी हुई है। ये रचनाएँ सामाजिक तनाव से मुक्त नहीं हैं लेकिन इस नकारात्मक परिवेश में सकारात्मकता का संचार कर रही हैं।”
कहानी प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में वक्तव्य देते हुए कथाकार अखिलेश श्रीवास्तव चमन ने कहा कि “कहानियों के आकार और स्वरूप का कोई निश्चित मानक नहीं है। प्रतियोगिता में पुरस्कृत कहानियां विविध सन्दर्भों को लिए हुए हैं जिनमें छोटी संवेदना भी बड़ा आकार ले लेती है।” डॉ विनय दास ने कहा कि “कहानियाँ जीवन की हर तपन और छुवन का परिणाम हैं। इसी क्रम में दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश का कहना था कि कहानी लेखन में कथ्य और शिल्प कहानी के प्रभाव को बढ़ाता है। कथाकारों का कहना था कि “साहित्य जगत से कुछ अपने को समृद्ध करने का अद्भुत अवसर है।” कहानियों पर आई टिप्पणी निःसन्देह यह साबित करती है कि “कहानी कहीं न कहीं लोगों को सोचने के लिए बाध्य कर रही है।” डॉ लता अग्रवाल ने कहा कि “कहानी का फलक व्यापक होना चाहिए जिसमें जीवन अनुभव हो,विगत से आगत को प्रेरणा मिले। आधुनिकता के नये आयामों को छूता हो। युवा कथाकार पैनी दृष्टि और बेबाक कलम से सामयिक यथार्थ को बड़ी कुशलता से उकेर रहे हैं।”
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में उपस्थित कवियों द्वारा काव्यपाठ किया गया। साक्षी शुक्ला की कविताओं पर श्रोताओं की खूब तालियाँ बजती रहीं। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन डॉ करुणेश भट्ट ने और दूसरे सत्र का आशुकवि डॉ मथुरा प्रसाद सिंह ‘जटायु’ ने किया।दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ. लता अग्रवाल ‘तुलजा’ ने की।
इस कार्यक्रम में डॉ रामप्यारे प्रजापति, वर्तिका, ज्ञानेंद्र विक्रम ‘रवि’, पवन सिंह, निष्ठा, प्रिया मिश्रा, एन पी शुक्ल, दिलीप सिंह, सत्य प्रकाश पाठक, अभय रंजन मिश्र, विवेक तिवारी, अनन्त नारायण मिश्र, उमा मिश्रा, संजय सिंह, राकेश गुप्ता, शकुन्तला मिश्रा, अनूप श्रीवास्तव, दिनेशचन्द्र शास्त्री, यतीन्द्र प्रताप शाही सहित सैकड़ों बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
झलकियाँ

सूचना स्रोत

श्रीमती लता अग्रवाल ‘तुलजा’
स्थानीय सम्पादिका, उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
भोपाल
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति



