महाशिवरात्रि पर विशेष

महाशिवरात्रि पर विशेष

महाशिवरात्रि

शिवरात्रि को रचा विवाह,

बनाया उसे महाशिवरात्रि।

फागुन मास कृष्ण पक्ष की,

चौदस को मनाते हैं शिवरात्रि।

 

शिव भक्तों का पूजा पाठ,

शुरू होता है अर्द्धरात्रि।

भजन कीर्तन जागरण कर,

मनाते हैं सब शिवरात्रि।

 

यह पर्व है अनोखा,

दूर-दूर से आते हैं यात्री।

हर हर महादेव मां पार्वती,

चढ़ा विल्व पत्र करें आरती।

 

त्रिदेव के रूप में पूजे जाते,

ब्रह्मा विष्णु और महेश।

करते हैं हर इच्छा पूरी,

नहीं रखते कोई शेष।

 

शिव की महिमा है न्यारी,

पूजते हैं सब नर नारी।

जो नित करता है सेवा,

मिटा देते हैं बाधा सारी।

 

भक्तों के वश में होते हैं,

कहलाते हैं भोलेनाथ।

जो भी मांगे वरदान,

दे देते हैं त्रिलोकी नाथ।

हंसराज ‘हंस’

टोंक (राजस्थान)

पुनः शिव का ध्यान

मगन समाधि में सदा, रहते शिव भगवान।

निराधार यह मान्यता, करत भंग का पान।।

पशुताजनक प्रवृत्तियाँ, अन्तर में असवार।

कैसे पशुपतिनाथ की, कृपा होत साकार।।

अब तो भाला उठा लो, महाकाल अवतार।

मानव के भीतर असुर, कर डालो संहार।।

देश जाति अरु पंथ की, केंचुल को दो चीर।

विषदन्तो को तोड़कर, हरो विश्व की पीर।।

असुरों ने भी धर लिए, नाना मोहक रूप।

अरे भांगमय हो रहा , मानो सारा कूप।।

रचनाकार

केदार शर्मा

टोंक (राज.)

मोबाइल – 9587615121

🙏🏽🙏🏽🙏🏽 महादेव 🙏🏽🙏🏽🙏🏽

नाम है आपका शिव शंकर भोलेनाथ,

देते हो आप अपने भक्तों का सदैव साथ।

 

मस्तक पर चंद्र से आप हैं चंद्रशेखर कहलाते,

अपनी जटाओं में गंगा मैया को हैं सजाते।

 

गले में नाग, कंठ में विष धारण करते हो,

दुखियों के दु:ख आप सहज में ही हरते हो।

 

आप देवों के देव महादेव कहलाते हो,

नूतन सृष्टि सृजन हेतु लीलाएं रचाते हो।

 

माता गौरी से गौरीशंकर है आपका नाम,

ओम नमः शिवाय से बनते बिगड़े काम।

 

शिवालिक पहाड़ी पर है आपका निवासस्थान,

गाँव-गाँव और शहर शहर में बने हुए हैं पावन धाम।

 

ना ही आपका आदि हैं, और ना ही आपका अन्त,

आप सरल, सहज हैं, और आपकी शक्तियाँ हैं अनन्त।

 

आप आशुतोष हो, जल्दी से हो जाते हो प्रसन्न,

आपका बड़ा बेटा कार्तिकेय, तो छोटा है गजानन।

 

मुकेश ‘मंगल’ आपके गुणों का करता है गुणगान,

रिद्धि-सिद्धि धन देना और करना जगत का कल्याण।

रचयिता

मुकेश मंगल कुमावत

टोंक (राजस्थान)