।।बसंत पंचमी पर्व के उपलक्ष में।।
।। माँ सरस्वती।।
हे! माँ सरस्वती, भगवती, नारायणी।
हे! माँ शारदे, वर दे, वीणा वादिनी।।
हे! माँ तुम वीणा की ऐसी तान सुनाओ।
मेरे सोये हुए भाग्य को तुम जगाओ।।
हे! माँ सरगम के सात सुरों का ज्ञान दो।
माँ मेरे रोम-रोम में गाने की तान भर दो।।
हे! माँ भगवती मेरा भी कल्याण कर दो।
भगवद्गीता ज्ञान से मेरी भी झोली भर दो।।
हे! माँ मधुरभाषिणी मेरे सिर पर हाथ धर दो।
मेरे तन-मन, जीवन को ज्ञान से फिर भर दो।।
रचनाकार
मुकेश कुमावत ‘मंगल’
टोंक (राजस्थान)