मुक्तक एक
मुझे सहयोग जो तेरा मिला उपकार तेरा है
बहुत बढ़िया लगा है ये मुझे व्यवहार तेरा है।
नज़र भर देखकर तुझको वहीं पहचान कर ली थी
बना मुझको सका अपना,सरल ये प्यार तेरा है।
मुक्तक दो
तुझे मैं रोज ही कहती,गलत व्यवहार तेरा है
इसे क्यों डांटती हो जबकि ये भरतार तेरा है।
मुझे है दर्द बेटे का,इसे नौकर बना छोड़ा
दया इसपे करो तुम अब,यही उपकार तेरा है।
मुक्तक तीन
सजाया प्यार दुनिया में, बड़ा उपकार तेरा है
धरा पर रूप धर आये, यही अवतार तेरा है।
कभी तो राम बन आये,कभी हो श्याम प्यारे तुम
दिया उपदेश जीवन का,अमिट गीता सार तेरा है
मुक्तक चार
नहीं कमजोर अब नारी,सभी स्वीकार करते हैं
अभी भी लोग कुछ हैं जो ग़लत व्यवहार करते हैं।
निकालो ढूॅंढ ऐसों को, सज़ा लो हाथ से अपने
उन्हीं का साथ जो लेकर, सतत् व्यापार करते हैं।
मुक्तक चार विशेष रूप से मातृ शक्ति को विश्व महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए।
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रचनाकार
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’
मालपुरा, टोंक (राजस्थान)