वीर अमर सिंह
हल्दी घाटी का युद्ध, शेर की गर्जन।
दुश्मन भयभीत प्रयाण, कंप अंतर्मन ।।
अवरुद्ध वचन थे यवन, अश्व ना वश में ।
ज्यों शुष्क हुआ था रक्त , अमर के यश में ।।
शेरों के होते शेर, दिखा ये रण में ।
राणा मूंछों पर ताव, चढ़ा उस क्षण में ।
सारी सेना में बजा, अमर का डंका ।
था मानसिंह अति व्यथित, लगी जब लंका।
अकबर की गर्दन झुकी, ख़बर जब पाई ।
अति दुखित हृदय सम्राट, नींद ना आई ।
चिंतित मन में बहु भांति, अमर के रण से ।
नत मस्तक विजय बिसार, गया उस क्षण से ।
…dAyA shArmA